Romans 52017

1सो जब हम विश्‍वास से धर्मी ठहरे, तो अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्‍वर के साथ मेल रखें,

2जिसके द्वारा विश्‍वास के कारण उस अनुग्रह तक जिसमें हम बने हैं, हमारी पहुँच भी हुई, और परमेश्‍वर की महिमा की आशा पर घमण्‍ड करें।

3केवल यही नहीं, वरन् हम क्‍लेशों में भी घमण्‍ड करें, यही जानकर कि क्‍लेश से धीरज,

4और धीरज से खरा निकलना, और खरे निकलने से आशा उत्‍पन्‍न होती है;

5और आशा से लज्‍जा नहीं होती, क्‍योंकि पवित्र आत्‍मा जो हमें दिया गया है उसके द्वारा परमेश्‍वर का प्रेम हमारे मन में डाला गया है।

6क्‍योंकि जब हम निर्बल ही थे, तो मसीह ठीक समय पर भक्तिहीनों के लिये मरा।

7किसी धर्मी जन के लिये कोई मरे, यह तो दुर्लभ है; परन्‍तु क्‍या जाने किसी भले मनुष्‍य के लिये कोई मरने का भी हियाव करे।

8परन्‍तु परमेश्‍वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा।

9सो जब कि हम, अब उसके लहू के कारण धर्मी ठहरे, तो उसके द्वारा परमेश्वर के क्रोध से क्‍यों न बचेंगे?

10क्‍योंकि बैरी होने की दशा में तो उसके पुत्र की मृत्‍यु के द्वारा हमारा मेल परमेश्‍वर के साथ हुआ, फिर मेल हो जाने पर उसके जीवन के कारण हम उद्धार क्‍यों न पाएँगे?

11और केवल यही नहीं, परन्‍तु हम अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा, जिसके द्वारा हमारा मेल हुआ है, परमेश्‍वर में आनन्दित होते है।

12इसलिये जैसा एक मनुष्‍य के द्वारा पाप जगत में आया, और पाप के द्वारा मृत्‍यु आई, और इस रीति से मृत्‍यु सब मनुष्‍यों में फैल गई, क्योंकि सब ने पाप किया।

13क्‍योंकि व्‍यवस्‍था के दिए जाने तक पाप जगत में तो था, परन्‍तु जहाँ व्‍यवस्‍था नहीं, वहाँ पाप गिना नहीं जाता।

14तौभी आदम से लेकर मूसा तक मृत्‍यु ने उन लोगों पर भी राज्‍य किया, जिन्‍होंने उस आदम, के अपराध की नाईं जो उस आनेवाले का चिन्‍ह है, पाप न किया।

15पर जैसी अपराध की दशा है, वैसी अनुग्रह के वरदान की नहीं, क्‍योंकि जब एक मनुष्‍य के अपराध से बहुत लोग मरे, तो परमेश्‍वर का अनुग्रह और उसका जो दान एक मनुष्‍य के, अर्थात् यीशु मसीह के अनुग्रह से हुआ बहुत से लोगों पर अवश्‍य ही अधिकाई से हुआ।

16और जैसा एक मनुष्‍य के पाप करने का फल हुआ, वैसा ही दान की दशा नहीं, क्‍योंकि एक ही के कारण दण्‍ड की आज्ञा का फैसला हुआ, परन्‍तु बहुत से अपराधों से ऐसा वरदान उत्‍पन्‍न हुआ कि लोग धर्मी ठहरे।

17क्‍योंकि जब एक मनुष्‍य के अपराध के कारण मृत्‍यु ने उस एक ही के द्वारा राज्‍य किया, तो जो लोग अनुग्रह और धर्मरूपी वरदान बहुतायत से पाते हैं वे एक मनुष्‍य के, अर्थात् यीशु मसीह के द्वारा अवश्‍य ही अनन्‍त जीवन में राज्‍य करेंगे।

18इसलिये जैसा एक अपराध सब मनुष्‍यों के लिये दण्‍ड की आज्ञा का कारण हुआ, वैसा ही एक धर्म का काम भी सब मनुष्‍यों के लिये जीवन के निमित्त धर्मी ठहराए जाने का कारण हुआ।

19क्‍योंकि जैसा एक मनुष्‍य के आज्ञा न मानने से बहुत लोग पापी ठहरे, वैसे ही एक मनुष्‍य के आज्ञा मानने से बहुत लोग धर्मी ठहरेंगे।

20व्‍यवस्‍था बीच में आ गई कि अपराध बहुत हो, परन्‍तु जहाँ पाप बहुत हुआ, वहाँ अनुग्रह उससे भी कहीं अधिक हुआ,

21कि जैसा पाप ने मृत्‍यु फैलाते हुए राज्‍य किया, वैसा ही हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा अनुग्रह भी अनन्‍त जीवन के लिये धर्मी ठहराते हुए राज्‍य करे।

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