Luke 42017

1फिर यीशु पवित्र आत्‍मा से भरा हुआ, यरदन से लौटा; और चालीस दिन तक आत्‍मा के सिखाने से जंगल में फिरता रहा;

2और शैतान उसकी परीक्षा करता रहा। उन दिनों में उसने कुछ न खाया और जब वे दिन पूरे हो गए, तो उसे भूख लगी।

3और शैतान ने उससे कहा, “यदि तू परमेश्‍वर का पुत्र है, तो इस पत्‍थर से कह, कि रोटी बन जाए।”

4यीशु ने उसे उत्तर दिया, “लिखा है: ‘मनुष्‍य केवल रोटी से जीवित न रहेगा’।”

5तब शैतान उसे ले गया और उसको पल भर में जगत के सारे राज्‍य दिखाए।

6और उससे कहा, “मैं यह सब अधिकार, और इनका वैभव तुझे दूँगा, क्‍योंकि वह मुझे सौंपा गया है: और जिसे चाहता हूँ, उसी को दे देता हूँ।

7इसलिये, यदि तू मुझे प्रणाम करे, तो यह सब तेरा हो जाएगा।”

8यीशु ने उसे उत्तर दिया, “लिखा है: ‘तू प्रभु अपने परमेश्‍वर को प्रणाम कर; और केवल उसी की उपासना कर’।”

9तब उसने उसे यरूशलेम में ले जाकर मन्‍दिर के कंगूरे पर खड़ा किया, और उससे कहा, “यदि तू परमेश्‍वर का पुत्र है, तो अपने आप को यहाँ से नीचे गिरा दे।

10क्‍योंकि लिखा है, ‘वह तेरे विषय में अपने स्‍वर्गदूतों को आज्ञा देगा, कि वे तेरी रक्षा करें।’

11और ‘वे तुझे हाथों हाथ उठा लेंगे ऐसा न हो कि तेरे पाँव में पत्‍थर से ठेस लगे’।”

12यीशु ने उसको उत्तर दिया, “यह भी कहा गया है: ‘तू प्रभु अपने परमेश्‍वर की परीक्षा न करना’।”

13जब शैतान सब परीक्षा कर चुका, तब कुछ समय के लिये उसके पास से चला गया।।

14फिर यीशु आत्‍मा की सामर्थ्य से भरा हुआ गलील को लौटा, और उसकी चर्चा आस-पास के सारे देश में फैल गई।

15और वह उन ही आराधनालयों में उपदेश करता रहा, और सब उसकी बड़ाई करते थे।।

16और वह नासरत में आया; जहाँ पाला पोसा गया था; और अपनी रीति के अनुसार सब्‍त के दिन आराधनालय में जा कर पढ़ने के लिये खड़ा हुआ।

17यशायाह भविष्‍यद्वक्‍ता की पुस्‍तक उसे दी गई, और उसने पुस्‍तक खोलकर, वह जगह निकाली जहाँ यह लिखा था:

18“प्रभु का आत्‍मा मुझ पर है, इसलिये कि उसने कंगालों को सुसमाचार सुनाने के लिये मेरा अभिषेक किया है, और मुझे इसलिये भेजा है, कि बन्‍धुओं को छुटकारे का और अन्‍धों को दृष्‍टि पाने का सुसमाचार प्रचार करूँ और कुचले हुओं को छुड़ाऊँ,

19और प्रभु के प्रसन्‍न रहने के वर्ष का प्रचार करूँ।”

20तब उसने पुस्‍तक बन्‍द करके सेवक के हाथ में दे दी, और बैठ गया: और आराधनालय के सब लोगों की आँखे उस पर लगी थी।

21तब वह उनसे कहने लगा, “आज ही यह लेख तुम्‍हारे सामने पूरा हुआ है।”

22और सब ने उसे सराहा, और जो अनुग्रह की बातें उसके मुँह से निकलती थेीं, उनसे अचम्भित हुए; और कहने लगे, “क्‍या यह यूसुफ का पुत्र नहीं?”

23उसने उससे कहा, “तुम मुझ पर यह कहावत अवश्‍य कहोगे, कि हे वैद्य, अपने आप को अच्‍छा कर! जो कुछ हम ने सुना है कि कफरनहूम में किया गया है उसे यहाँ अपने देश में भी कर।”

24और उसने कहा, “मैं तुम से सच कहता हूँ, कोई भविष्‍यद्वक्‍ता अपने देश में मान-सम्‍मान नहीं पाता।

25और मैं तुम से सच कहता हूँ, कि एलिय्‍याह के दिनों में जब साढ़े तीन वर्ष तक आकाश बन्‍द रहा, यहाँ तक कि सारे देश में बड़ा आकाल पड़ा, तो इस्राएल में बहुत सी विधवाएँ थीं।

26पर एलिय्‍याह उनमें से किसी के पास नहीं भेजा गया, केवल सैदा के सारफत में एक विधवा के पास।

27और एलीशा भविष्‍यद्वक्‍ता के समय इस्राएल में बहुत से कोढ़ी थे, पर सीरिया वासी नामान को छोड़ उनमें से काई शुद्ध नहीं किया गया।”

28ये बातें सुनते ही जितने आराधनालय में थे, सब क्रोध से भर गए।

29और उठकर उसे नगर से बाहर निकाला, और जिस पहाड़ पर उन का नगर बसा हुआ था, उसकी चोटी पर ले चले, कि उसे वहाँ से नीचे गिरा दें।

30पर वह उनके बीच में से निकलकर चला गया।।

31फिर वह गलील के कफरनहूम नगर में गया, और सब्‍त के दिन लोगों को उपदेश दे रहा था।

32वे उस के उपदेश से चकित हो गए क्‍योंकि उसका वचन अधिकार सहित था।

33आराधनालय में एक मनुष्‍य था, जिसमें अशुद्ध आत्‍मा थी।

34वह ऊँचे शब्‍द से चिल्‍ला उठा, “हे यीशु नासरी, हमें तुझ से क्‍या काम? क्‍या तू हमें नाश करने आया है? मैं तुझे जानता हूँ तू कौन है? तू परमेश्‍वर का पवित्र जन है!”

35यीशु ने उसे डाँटकर कहा, “चुप रह: और उसमें से निकल जा!” तब दुष्‍टात्‍मा उसे बीच में पटककर बिना हानि पहुँचाए उसमें से निकल गई।

36इस पर सब को अचम्‍भा हुआ, और वे आपस में बातें करके कहने लगे, “यह कैसा वचन है? कि वह अधिकार और सामर्थ्य के साथ अशुद्ध आत्‍माओं को आज्ञा देता है, और वे निकल जाती हैं।”

37अतः चारों ओर हर जगह उसकी चर्चा होने लगी।

38वह आराधनालय में से उठकर शमौन के घर में गया और शमौन की सास को ज्‍वर चढ़ा हुआ था, और उन्होंने उसके लिये उससे विनती की।

39उसने उसके निकट खड़े होकर ज्‍वर को डाँटा और ज्वर उतर गया और वह तुरन्‍त उठकर उनकी सेवा-टहल करने लगी।

40सूरज डूबते समय जिन-जिन के यहाँ लोग नाना प्रकार की बीमारियों में पड़े हुए थे, वे सब उन्‍हें उसके पास ले आएं, और उसने एक एक पर हाथ रखकर उन्‍हें चंगा किया।

41और दुष्‍टात्‍मा चिल्‍लाती और यह कहती हुई, “तू परमेश्‍वर का पुत्र है,” बहुतों में से निकल गई पर वह उन्‍हें डाँटता और बोलने नहीं देता था, क्‍योंकि वे जानते थे, कि यह मसीह है।

42जब दिन हुआ तो वह निकलकर एक जंगली जगह में गया, और भीड़ की भीड़ उसे ढूँढ़ती हुई उसके पास आई, और उसे रोकने लगी, कि हमारे पास से न जा।

43परन्‍तु उसने उनसे कहा, “मुझे और और नगरों में भी परमेश्‍वर के राज्‍य का सुसमाचार सुनाना अवश्‍य है, क्‍योंकि मैं इसीलिये भेजा गया हूँ।”

44और वह गलील के आराधनालयों में प्रचार करता रहा।

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