Luke 32017

1तिबिरियुस कैसर के राज्‍य के पंद्रहवें वर्ष में जब पुन्‍तियुस पीलातुस यहूदिया का हाकिम था, और गलील में हेरोदेस नाम चौथाई का इतूरैया, और त्रखोनीतिस में, उसका भाई फिलिप्‍पुस, और अबिलेने में लिसानियास चौथाई के राजा थे।

2और जब हन्‍ना और कैफा महायाजक थे, उस समय परमेश्‍वर का वचन जंगल में जकरयाह के पुत्र यूहन्‍ना के पास पहुँचा।

3और वह यरदन के आस-पास के सारे प्रदेश में आकर, पापों की क्षमा के लिये मन फिराव के बपतिस्‍मा का प्रचार करने लगा।

4जैसे यशायाह भविष्‍यद्वक्‍ता के कहे हुए वचनों की पुस्‍तक में लिखा है, “जंगल में एक पुकारनेवाले का शब्‍द हो रहा हे कि ‘प्रभु का मार्ग तैयार करो, उसकी सड़कें सीधी बनाओ।

5हर एक घाटी भर दी जाएगी, और हर एक पहाड़ और टीला नीचा किया जाएगा; और जो टेढ़ा है सीधा, और जो ऊँचा नीचा है वह चौरस मार्ग बनेगा।

6और हर प्राणी परमेश्‍वर के उद्धार को देखेगा’।”

7जो भीड़ की भीड़ उससे बपतिस्‍मा लेने को निकल कर आती थी, उनसे वह कहता था, “हे साँप के बच्‍चो, तुम्‍हें किस ने चिता दिया, कि आनेवाले क्रोध से भागो।

8अतः मन फिराव के योग्‍य फल लाओ: और अपने-अपने मन में यह न सोचो, कि हमारा पिता अब्राहम है; क्‍योंकि मैं तुम से कहता हूँ, कि परमेश्‍वर इन पत्‍थरों से अब्राहम के लिये सन्‍तान उत्‍पन्न कर सकता है।

9और अब ही कुल्‍हाड़ा पेड़ों की जड़ पर धरा है, इसलिये जो-जो पेड़ अच्‍छा फल नहीं लाता, वह काटा और आग में झोंका जाता है।”

10और लोगों ने उससे पूछा, “तो हम क्‍या करें?”

11उसने उन्‍हें उतर दिया, “जिसके पास दो कुरते हों? वह उसके साथ जिसके पास नहीं हैं बाँट दे और जिसके पास भोजन हो, वह भी ऐसा ही करे।”

12और महसूल लेनेवाले भी बपतिस्‍मा लेने आए, और उससे पूछा, “हे गुरू, हम क्‍या करें?”

13उसने उनसे कहा, “जो तुम्‍हारे लिये ठहराया गया है, उससे अधिक न लेना।”

14और सिपाहियों ने भी उससे यह पूछा, “हम क्‍या करें?” उसने उनसे कहा, “किसी पर उपद्रव न करना, और न झूठा दोष लगाना, और अपनी मजदूरी पर सन्‍तोष करना।”

15जब लोग आस लगाए हुए थे, और सब अपने-अपने मन में यूहन्‍ना के विषय में विचार कर रहे थे, कि क्‍या यही मसीह तो नहीं है।

16तो यूहन्‍ना ने उन सब के उत्तर में कहा, “मैं तो तुम्‍हें पानी से बपतिस्‍मा देता हूँ, परन्‍तु वह आनेवाला है, जो मुझ से शक्तिमान है; मैं तो इस योग्‍य भी नहीं, कि उसके जूतों का बन्‍ध खोल सकूँ, वह तुम्‍हें पवित्र आत्‍मा और आग से बपतिस्‍मा देगा।

17उसका सूप, उसके हाथ में है; और वह अपना खलिहान अच्‍छी तरह से साफ करेगा; और गेहूँ को अपने खत्ते में इकट्ठा करेगा, परन्‍तु भूसी को उस आग में जो बुझने की नहीं जला देगा।”

18अतः वह बहुत सी शिक्षा दे देकर लोगों को सुसमाचार सुनाता रहा। हेरोदेस द्वारा यूहन्ना को बन्दीगृह में डालना

19परन्‍तु उसने चौथाई देश के राजा हेरोदेस को उसके भाई फिलिप्‍पुस की पत्‍नी हेरोदियास के विषय, और सब कुकर्मों के विषय में जो उसने किए थे, उलाहना दिया।

20इसलिये हेरोदेस ने उन सब से बढ़कर यह कुकर्म भी किया, कि यूहन्‍ना को बन्‍दीगृह में डाल दिया।

21जब सब लोगों ने बपतिस्‍मा लिया, और यीशु भी बपतिस्‍मा लेकर प्रार्थना कर रहा था, तो आकाश खुल गया।

22और पवित्र आत्‍मा शारीरिक रूप में कबूतर के नाई उस पर उतरा, और यह आकाशवाणी हुई: “तू मेरा प्रिय पुत्र है, मैं तुझ से प्रसन्‍न हूँ।”

23जब यीशु आप उपदेश करने लगा, तो लगभग तीस वर्ष की आयु का था और (जैसा समझा जाता था) यूसुफ का पुत्र था; और व एली का,

24और वह मत्तात का, और वह लेवी का, और वह मलकी का, और वह यन्‍ना का, और वह यूसुफ का,

25और वह मत्तित्याह का, और वह आमोस का, और वह नहूम का, और वह असल्‍याह का, और वह नोगह का,

26और वह मात का, और वह मत्तित्‍याह का, और वह शिमी का, और वह योसेख का, और वह योदाह का,

27और वह यूहन्‍ना का, और वह रेसा का, और वह जरूब्‍बाबिल का, और वह शालतियेल का, और वह नेरी का,

28और वह मलकी का, और वह अद्दी का, और वह कोसाम का, और वह इलमोदाम का, और वह एर का,

29और वह येशू का, और वह इलाजार का, और वह योरीम का, और वह मत्तात का, और वह लेवी का,

30और वह शमौन का, और वह यहूदाह का, और वह यूसुफ का, और वह योनान का, और वह इलयाकीम का,

31और वह मलेआह का, और वह मिन्‍नाह का, और वह मत्तता का, और वह नातान का, और वह दाऊद का,

32और वह यिशै का, और वह ओबेद का, और वह बोअज का, और वह सलमोन का, और वह नहशोन का,

33और वह अम्‍मीनादाब का, और वह अरनी का, और वह हिस्रोन का, और वह फिरिस का, और वह यहूदाह का,

34और वह याकूब का, और वह इसहाक का, और वह अब्राहम का, और वह तिरह का, और वह नाहोर का,

35और वह सरूग का, और वह रऊ का, और वह फिलिग का, और वह एबिर का, और वह शिलह का,

36और वह केनान का, वह अरफक्षद का, और वह शेम का, वह नूह का, वह लिमिक का,

37और वह मथूशिलह का, और वह हनोक का, और वह यिरिद का, और वह महललेल का, और वह केनान का,

38और वह एनोश का, और वह शेत का, और वह आदम का, और वह परमेश्‍वर का था।।

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