Luke 52017

1जब भीड़ उस पर गिरी पड़ती थी, और परमेश्‍वर का वचन सुनती थी, और वह गन्‍नेसरत की झील के किनारे पर खड़ा था, तो ऐसा हुआ।

2कि उसने झील के किनारे दो नावें लगी हुई देखीं, और मछुवे उन पर से उतरकर जाल धो रहे थे।

3उन नावों में से एक पर, जो शमौन की थी, चढ़कर, उसने उससे विनती की, कि किनारे से थोड़ा हटा ले चले, तब वह बैठकर लोगों को नाव पर से उपदेश देने लगा।

4जब वे बातें कर चुका, तो शमौन से कहा, “गहिरे में ले चल, और मछलियाँ पकड़ने के लिये अपने जाल डालो।”

5शमौन ने उसको उत्तर दिया, “हे स्‍वामी, हम ने सारी रात मेहनत की और कुछ न पकड़ा; तौभी तेरे कहने से जाल डालूँगा।”

6जब उन्होंने ऐसा किया, तो बहुत मछलियाँ घेर लाए, और उनके जाल फटने लगे।

7इस पर उन्होंने अपने साथियों को जो दूसरी नाव पर थे, संकेत किया, कि आकर हमारी सहायता करो: और उन्होंने आकर, दोनो नाव यहाँ तक भर लीं कि वे डूबने लगीं।

8यह देखकर शमौन पतरस यीशु के पाँवो पर गिरा, और कहा, “हे प्रभु, मेरे पास से जा, क्‍योंकि मैं पापी मनुष्‍य हूँ!”

9क्‍योंकि इतनी मछलियों के पकड़े जाने से उसे और उसके साथियों को बहुत अचम्‍भा हुआ;

10और वैसे ही जब्दी के पुत्र याकूब और यूहन्‍ना को भी, जो शमौन के सहभागी थे, अचम्‍भा हुआ: तब यीशु ने शमौन से कहा, “मत डर, अब से तू मनुष्‍यों को जीवता पकड़ा करेगा।”

11और वे नावों को किनारे पर ले आए और सब कुछ छोड़कर उसके पीछे हो लिए।

12जब वह किसी नगर में था, तो देखो, वहाँ कोढ़ से भरा हुआ एक मनुष्‍य था, और वह यीशु को देखकर मुँह के बल गिरा, और विनती की, “हे प्रभु यदि तू चाहे तो मुझे शुद्ध कर सकता है।”

13उसने हाथ बढ़ाकर उसे छूआ और कहा, “मैं चाहता हूँ, तू शुद्ध हो जा।” और उसका कोढ़ तुरन्‍त जाता रहा।

14तब उसने उसे चिताया, “किसी से न कह, परन्‍तु जाके अपने आप को याजक को दिखा, और अपने शुद्ध होने के विषय में जो कुछ मूसा ने चढ़ावा ठहराया है उसे चढ़ा कि उन पर गवाही हो।”

15परन्‍तु उसकी चर्चा और भी फैलती गई, और भीड़ की भीड़ उसकी सुनने के लिये और अपनी बिमारियों से चंगे होने के लिये इकट्ठी हुई।

16परन्‍तु वह जंगलों में अलग जाकर प्रार्थना किया करता था।

17और एक दिन ऐसा हुआ कि वह उपदेश दे रहा था, और फरीसी और व्‍यवस्‍थापक वहाँ बैठे हुए थे, जो गलील और यहूदिया के हर एक गाँव से, और यरूशलेम से आए थे; और चंगा करने के लिये प्रभु की सामर्थ्य उसके साथ थी।

18और देखो कई लोग एक मनुष्‍य को जो लकवे का रोगी था, खाट पर लाए, और वे उसे भीतर ले जाने और यीशु के सामने रखने का उपाय ढूँढ़ रहे थे।

19और जब भीड़ के कारण उसे भीतर न ले जा सके तो उन्होंने छत पर चढ़ कर और खपरैल हटाकर, उसे खाट समेत बीच में यीशु के सामने उतरा दिया।

20उसने उन का विश्‍वास देखकर उससे कहा, “हे मनुष्‍य, तेरे पाप क्षमा हुए।”

21तब शास्‍त्री और फरीसी विवाद करने लगे, “यह कौन है, जो परमेश्‍वर की निन्‍दा करता है? परमेश्‍वर का छोड़ कौन पापों की क्षमा कर सकता है?”

22यीशु ने उनके मन की बातें जानकर, उनसे कहा, “तुम अपने मनों में क्‍या विवाद कर रहे हो?

23सहज क्‍या है? क्‍या यह कहना, कि ‘तेरे पाप क्षमा हुए,’ या यह कहना कि ‘उठ और चल फिर’?

24परन्‍तु इसलिये कि तुम जानो कि मनुष्‍य के पुत्र को पृथ्‍वी पर पाप क्षमा करने का भी अधिकार है।” (उसने उस लकवे के रोगी से कहा), “मैं तुझ से कहता हूँ, उठ और अपनी खाट उठाकर अपने घर चला जा।”

25वह तुरन्‍त उनके सामने उठा, और जिस पर वह पड़ा था उसे उठाकर, परमेश्‍वर की बड़ाई करता हुआ अपने घर चला गया।

26तब सब चकित हुए और परमेश्‍वर की बड़ाई करने लगे, और बहुत डरकर कहने लगे, “आज हम ने अनोखी बातें देखी हैं।”

27और इसके बाद वह बाहर गया, और लेवी नाम एक चुंगी लेनेवाले को चुंगी की चौकी पर बैठे देखा, और उससे कहा, “मेरे पीछे हो ले।”

28तब वह सब कुछ छोड़कर उठा, और उसके पीछे हो लिया।

29और लेवी ने अपने घर में उसके लिये एक बड़ा भोज दिया; और चुंगी लेनेवालों की और औरों की जो उसके साथ भोजन करने बैठे थे एक बड़ी भीड़ थी।

30और फरीसी और उनके शास्‍त्री उस के चेलों से यह कहकर कुड़कुड़ाने लगे, “तुम चुंगी लेनेवालों और पापियों के साथ क्‍यों खाते-पीते हो?”

31यीशु ने उनको उत्तर दिया, “वैद्य भले चंगों के लिये नहीं, परन्‍तु बीमारों के लिये अवश्‍य है।

32मैं धर्मियों को नहीं, परन्‍तु पापियों को मन फिराने के लिये बुलाने आया हूँ।”

33और उन्होंने उससे कहा, “यूहन्‍ना के चेले तो बराबर उपवास रखते और प्रार्थना किया करते हैं, और वैसे ही फरीसियों के भी, परन्‍तु तेरे चेले तो खाते-पीते हैं।”

34यीशु ने उनसे कहा, “क्‍या तुम बरातियों से जब तक दूल्‍हा उनके साथ रहे, उपवास करवा सकते हो?

35परन्‍तु वे दिन आएँगे, जिन में दूल्‍हा उनसे अलग किया जाएगा, तब वे उन दिनों में उपवास करेंगे।”

36उसने एक और दृष्‍टान्‍त भी उनसे कहा: “कोई मनुष्‍य नये वस्त्र में से फाड़कर पुराने वस्त्र में पैवन्द नहीं लगाता, नहीं तो नया फट जाएगा और वह पैवन्द पुराने में मेल भी नहीं खाएगा।

37और कोई नया दाखरस पुरानी मशकों में नही भरता, नहीं तो नया दाखरस मशकों को फाड़कर बह जाएगा, और मशकें भी नाश हो जाएँगी।

38परन्‍तु नया दाखरस नई मशकों में भरना चाहिये।

39कोई मनुष्‍य पुराना दाखरस पीकर नया नहीं चाहता क्‍योंकि वह कहता है, कि पुराना ही अच्‍छा है।”

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