Jude 12017

1यहूदा की ओर से जो यीशु मसीह का दास और याकूब का भाई है, उन बुलाए हुओं के नाम जो परमेश्‍वर पिता में प्रिय और यीशु मसीह के लिये सुरक्षित हैं।

2दया और शान्‍ति और प्रेम तुम्‍हें बहुतायत से प्राप्‍त होता रहे।

3हे प्रियो, जब मैं तुम्‍हें उस उद्धार के विषय में लिखने में अत्‍यन्‍त परिश्रम से प्रयत्‍न कर रहा था, जिस में हम सब सहभागी हैं; तो मैं ने तुम्‍हें यह समझाना आवश्‍यक जाना कि उस विश्‍वास के लिये पूरा यत्‍न करो जो पवित्र लोगों को एक ही बार सौंपा गया था।

4क्‍योंकि कितने ऐसे मनुष्‍य चुपके से हम में आ मिले हैं, जिन से इस दण्‍ड का वर्णन पुराने समय में पहिले ही से लिखा गया था: ये भक्तिहीन हैं, और हमारे परमेश्‍वर के अनुग्रह को लुचपन में बदल डालते है, और हमारे अद्वैत स्‍वामी और प्रभु यीशु मसीह का इन्‍कार करते हैं।

5पर यद्यपि तुम सब बात एक बार जान चुके हो, तौभी मैं तुम्‍हें इस बात की सुधि दिलाना चाहता हूँ, कि प्रभु ने एक कुल को मिस्र देश से छुड़ाने के बाद विश्‍वास न लानेवालों को नाश कर दिया।

6फिर जो स्वर्गदूत ने अपने पद को स्‍थिर न रखा वरन अपने निज निवास को छोड़ दिया, उस ने उन को भी उस भीषण दिन के न्‍याय के लिये अन्‍धकार में जो सदा काल के लिये है बन्‍धनों में रखा है।

7जिस रीति से सदोम और अमोरा और उन के आस पास के नगर, जो इन की नाई व्‍यभिचारी हो गए थे और पराये शरीर के पीछे लग गए थे आग के अनन्‍त दण्‍ड में पड़कर दृष्‍टान्‍त ठहरे हैं।

8उसी रीति से ये स्‍वप्‍नदर्शी भी अपने अपने शरीर को अशुद्ध करते, और प्रभुता को तुच्‍छ जानते हैं; और ऊँचे पदवालों को बुरा भला कहते हैं।

9परन्‍तु प्रधान स्‍वर्गदूत मीकाईल ने, जब शैतान से मूसा की लोथ के विषय में वाद-विवाद करता था, तो उस को बुरा भला कहके दोष लगाने का साहस न किया; पर यह कहा, “प्रभु तुझे डाँटे।”

10पर ये लोग जिन बातों को नहीं जानते, उन को बुरा भला कहते हैं; पर जिन बातों को अचेतन पशुओं की नाई स्‍वभाव ही से जानते हैं, उन में अपने आप को नाश करते हैं।

11उन पर हाय! कि वे कैन की सी चाल चले, और मजदूरी के लिये बिलाम की नाई भ्रष्‍ट हो गए हैं: और कोरह की नाई विरोध करके नाश हुए हैं।

12यह तुम्‍हारी प्रेम सभाओं में तुम्‍हारे साथ खाते-पीते, समुद्र में छिपी हुई चट्टान सरीखे हैं, और बेधड़क अपना ही पेट भरनेवाले रखवाले हैं; वे निर्जल बादल हैं; जिन्‍हें हवा उड़ा ले जाती है; पतझड़ के निष्‍फल पेड़ हैं, जो दो बार मर चुके हैं; और जड़ से उखड़ गए हैं;

13ये समुद्र के प्रचण्‍ड हिलकोरे हैं, जो अपनी लज्‍जा का फेन उछालते हैं: ये डाँवाडोल तारे हैं, जिन के लिये सदा काल तक घोर अन्‍धकार रखा गया है।

14और हनोक ने भी जो आदम से सातवीं पीढ़ी में था, इन के विषय में यह भविष्‍यद्वाणी की, “देखो, प्रभु अपने लाखों पवित्रों के साथ आया।

15कि सब का न्‍याय करे, और सब भक्तिहीनों को उन के अभक्ति के सब कामों के विषय में, जो भक्तिहीन पापियों ने उसके विरोध में कही हैं, दोषी ठहराए।”

16ये तो असंतुष्‍ट, कुड़कुड़ानेवाले, और अपने अभिलाषाओं के अनुसार चलनेवाले हैं; और अपने मुँह से घमण्‍ड की बातें बोलते हैं; और वे लाभ के लिये मुँह देखी बड़ाई किया करते हैं।

17पर हे प्रियों, तुम उन बातों को स्‍मरण रखो; जो हमारे प्रभु यीशु मसीह के प्रेरित पहिले कह चुके हैं।

18वे तुम से कहा करते थे, “पिछले दिनों में ऐसे ठट्ठा करनेवाले होंगे, जो अपनी अभक्ति के अभिलाषाओं के अनुसार चलेंगे।”

19ये तो वे है, जो फूट डालते हैं; ये शारीरिक लोग हैं, जिन में आत्‍मा नहीं।

20पर हे प्रियों तुम अपने अति पवित्र विश्‍वास में अपनी उन्‍नति करते हुए और पवित्र आत्‍मा में प्रार्थना करते हुए।

21अपने आप को परमेश्‍वर के प्रेम में बनाए रखो; और अनन्‍त जीवन के लिये हमारे प्रभु यीशु मसीह की दया की आशा देखते रहो।

22और उन पर जो शंका में हैं दया करो।

23और बहुतों को आग में से झपटकर निकालो, और बहुतों पर भय के साथ दया करो; बरन उस वस्‍त्र से भी घृणा करो जो शरीर के द्वारा कलंकित हो गया है।

24अब जो तुम्‍हें ठोकर खाने से बचा सकता है, और अपनी महिमा की भरपूरी के साम्‍हने मगन और निर्दोष करके खड़ा कर सकता है।

25उस अद्वैत परमेश्‍वर हमारे उद्धारकर्ता की महिमा, और गौरव, और पराक्रम, और अधिकार, हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा जैसा सनातन काल से है, अब भी हो और युगानुयुग रहे। आमीन।

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