Hebrews 122017

1इस कारण जब कि गवाहों का ऐसा बड़ा बादल हम को घेरे हुए है, तो आओ, हर एक रोकनेवाली वस्‍तु, और उलझानेवाले पाप को दूर करके, वह दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें।

2और विश्‍वास के कर्ता और सिद्ध करनेवाले यीशु की ओर ताकते रहें; जिस ने उस आनन्‍द के लिये जो उसके आगे धरा था, लज्‍जा की कुछ चिन्‍ता न करके, क्रूस का दु:ख सहा; और सिंहासन पर परमेश्‍वर के दहिने जा बैठा।

3इसलिये उस पर ध्‍यान करो, जिस ने अपने विरोध में पापियों का इतना वाद-विवाद सह लिया कि तुम निराश होकर हियाव न छोड़ दो।

4तुम ने पाप से लड़ते हुए उससे ऐसी मुठभेड़ नहीं की, कि तुम्‍हारा लहू बहा हो।

5और तुम उस उपदेश को जो तुम को पुत्रों की नाई दिया जाता है, भूल गए हो: “हे मेरे पुत्र, प्रभु की ताड़ना को हलकी बात न जान, और जब वह तुझे घुड़के तो हियाव न छोड़।

6क्‍योंकि प्रभु, जिस से प्रेम करता है, उस की ताड़ना भी करता है; और जिसे पुत्र बना लेता है, उस को कोड़े भी लगाता है।”

7तुम दु:ख को ताड़ना समझकर सह लो: परमेश्‍वर तुम्‍हें पुत्र जानकर तुम्‍हारे साथ बर्ताव करता है, वह कौन सा पुत्र है, जिस की ताड़ना पिता नहीं करता?

8यदि वह ताड़ना जिस के भागी सब होते हैं, तुम्‍हारी नहीं हुई, तो तुम पुत्र नहीं, पर व्‍यभिचार की सन्‍तान ठहरे!

9फिर जब कि हमारे शारीरिक पिता भी हमारी ताड़ना किया करते थे, तो क्‍या आत्‍माओं के पिता के और भी आधीन न रहें जिस से हम जीवित रहें।

10वे तो अपनी अपनी समझ के अनुसार थोड़े दिनों के लिये ताड़ना करते थे, पर यह तो हमारे लाभ के लिये करता है, कि हम भी उस की पवित्रता के भागी हो जाएँ।

11और वर्तमान में हर प्रकार की ताड़ना आनन्‍द की नहीं, पर शोक ही की बात दिखाई पड़ती है, तौभी जो उस को सहते सहते पक्‍के हो गए हैं, पीछे उन्‍हें चैन के साथ धर्म का प्रतिफल मिलता है।

12इसलिये ढीले हाथों और निर्बल घुटनों को सीधे करो।

13और अपने पाँवों के लिये सीधे मार्ग बनाओ, कि लंगड़ा भटक न जाए, पर भला चंगा हो जाए।

14सब से मेल मिलाप रखने, और उस पवित्रता के खोजी हो जिस के बिना कोई प्रभु को कदापि न देखेगा।

15और ध्‍यान से देखते रहो, ऐसा न हो, कि कोई परमेश्‍वर के अनुग्रह से वंचित रह जाए, या कोई कड़वी जड़ फूटकर कष्‍ट दे, और उसके द्वारा बहुत से लोग अशुद्ध हो जाएँ।

16ऐसा न हो, कि कोई जन व्‍यभिचारी, या एसाव की नाई अधर्मी हो, जिसने एक बार के भोजन के बदले अपने पहिलौठे होने का पद बेच डाला।

17तुम जानते तो हो, कि बाद को जब उसने आशीष पानी चाही, तो अयोग्‍य गिना गया, और आँसू बहा बहाकर खोजने पर भी मन फिराव का अवसर उसे न मिला।

18तुम तो उस पहाड़ के पास जो छूआ जा सकता था और आग से प्रज्‍वलित था, और काली घटा, और अन्‍धेरा, और आन्‍धी के पास।

19और तुरही की ध्‍वनि, और बोलनेवाले के ऐसे शब्‍द के पास नहीं आए, जिस के सुननेवालों ने बिनती की, कि अब हम से और बातें न की जाएँ।

20क्‍योंकि वे उस आज्ञा को न सह सके: “यदि कोई पशु भी पहाड़ को छूए, तो पत्‍थरवाह किया जाए।”

21और वह दर्शन ऐसा डरावना था, कि मूसा ने कहा, “मैं बहुत डरता और काँपता हूँ।”

22पर तुम सिय्‍योन के पहाड़ के पास, और जीवते परमेश्‍वर के नगर स्‍वर्गीय यरूशलेम के पास और लाखों स्‍वर्गदूतों,

23और उन पहिलौठों की साधारण सभा और कलीसिया जिन के नाम स्‍वर्ग में लिखे हुए हैं: और सब के न्‍यायी परमेश्‍वर के पास, और सिद्ध किए हुए धर्मियों की आत्‍माओं।

24और नई वाचा के मध्‍यस्‍थ यीशु, और छिड़काव के उस लहू के पास आए हो, जो हाबिल के लहू से उत्तम बातें कहता है।

25सावधान रहो, और उस कहनेवाले से मुँह न फेरो, क्‍योंकि वे लोग जब पृथ्‍वी पर के चितावनी देनेवाले से मुँह मोड़कर न बच सके, तो हम स्‍वर्ग पर से चितावनी देनेवाले से मुँह मोड़कर क्‍योंकर बच सकेंगे?

26उस समय तो उसके शब्‍द ने पृथ्‍वी को हिला दिया पर अब उसने यह प्रतिज्ञा की है, “एक बार फिर मैं केवल पृथ्‍वी को नहीं, वरन् आकाश को भी हिला दूँगा।”

27और यह वाक्‍य ‘एक बार फिर’ इस बात को प्रगट करता है, कि जो वस्‍तुएँ हिलाई जाती हैं, वे सृजी हुई वस्‍तुएँ होने के कारण टल जाएँगी; ताकि जो वस्‍तुएँ हिलाई नहीं जातीं, वे अटल बनी रहें।

28इस कारण हम इस राज्‍य को पाकर जो हिलने का नहीं, उस अनुग्रह को हाथ से न जाने दें, जिस के द्वारा हम भक्ति, और भय सहित, परमेश्‍वर की ऐसी आराधना कर सकते हैं जिस से वह प्रसन्‍न होता है।

29क्‍योकि हमारा परमेश्‍वर भस्‍म करनेवाली आग हैं ।

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