Hebrews 132017

1भाईचारे की प्रीति बनी रहे।

2अतिथि सत्कार करना न भूलना, क्‍योंकि इस के द्वारा कितनों ने अनजाने स्‍वर्गदूतों का आदर सत्कार किया है।

3कैदियों की ऐसी सुधि लो, कि मानो उनके साथ तुम भी कैद हो; और जिन के साथ बुरा बर्ताव किया जाता है, उन की भी यह समझकर सुधि लिया करो, कि हमारी भी देह है।

4विवाह सब में आदर की बात समझी जाए, और विवाह बिछौना निष्‍कलंक रहे; क्‍योंकि परमेश्‍वर व्‍यभिचारियों, और परस्‍त्रीगामियों का न्‍याय करेगा।

5तुम्‍हारा स्‍वभाव लोभरहित हो, और जो तुम्‍हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्‍योंकि उसने आप ही कहा है, “मैं तुझे कभी न छोडूँगा, और न कभी तुझे त्‍यागूँगा।”

6इसलिये हम बेधड़क होकर कहते हैं, “प्रभु, मेरा सहायक है; मैं न डरूँगा; मनुष्‍य मेरा क्‍या कर सकता है।”

7जो तुम्‍हारे अगुवे थे, और जिन्‍हों ने तुम्‍हें परमेश्‍वर का वचन सुनाया है, उन्‍हें स्‍मरण रखो; और ध्‍यान से उन के चाल-चलन का अन्‍त देखकर उन के विश्‍वास का अनुकरण करो।

8यीशु मसीह कल और आज और युगानुयुग एक सा है।

9नाना प्रकार के और ऊपरी उपदेशों से न भरमाए जाओ, क्‍योंकि मन का अनुग्रह से दृढ़ रहना भला है, न कि उन खाने की वस्‍तुओं से जिन से काम रखनेवालों को कुछ लाभ न हुआ।

10हमारी एक ऐसी वेदी है, जिस पर से खाने का अधिकार उन लोगों को नहीं, जो तम्‍बू की सेवा करते हैं।

11क्‍योंकि जिन पशुओं का लहू महायाजक पाप-बलि के लिये पवित्र स्‍थान में ले जाता है, उन की देह छावनी के बाहर जलाई जाती है।

12इसी कारण, यीशु ने भी लोगों को अपने ही लहू के द्वारा पवित्र करने के लिये फाटक के बाहर दु:ख उठाया।

13सो आओ उस की निन्‍दा अपने ऊपर लिए हुए छावनी के बाहर उसके पास निकल चलें।

14क्‍योंकि यहाँ हमारा कोई स्‍थिर रहनेवाला नगर नहीं, वरन् हम एक आनेवाले नगर की खोज में हैं।

15इसलिये हम उसके द्वारा स्‍तुतिरूपी बलिदान, अर्थात् उन होठों का फल जो उसके नाम का अंगीकार करते हैं, परमेश्‍वर के लिये सर्वदा चढ़ाया करें।

16पर भलाई करना, और उदारता न भूलो; क्‍योंकि परमेश्‍वर ऐसे बलिदानों से प्रसन्‍न होता है।

17अपने अगुवों की मानो; और उनके अधीन रहो, क्‍योंकि वे उन की नाई तुम्‍हारे प्राणों के लिये जागते रहते, जिन्‍हें लेखा देना पड़ेगा, कि वे यह काम आनन्‍द से करें, न कि ठंडी साँस ले लेकर, क्‍योंकि इस दशा में तुम्‍हें कुछ लाभ नहीं।

18हमारे लिये प्रार्थना करते रहो, क्‍योंकि हमें भरोसा है, कि हमारा विवेक शुद्ध है; और हम सब बातों में अच्‍छी चाल चलना चाहते हैं।

19प्रार्थना करने के लिये मैं तुम्‍हें और भी समझाता हूँ, कि मैं शीघ्र तुम्‍हारे पास फिर आ सकूँ।

20अब शान्‍तिदाता परमेश्‍वर जो हमारे प्रभु यीशु को जो भेड़ों का महान रखवाला है सनातन वाचा के लहू के गुण से मरे हुओं में से जिलाकर ले आया,

21तुम्‍हें हर एक भली बात में सिद्ध करे, जिस से तुम उस की इच्‍छा पूरी करो, और जो कुछ उस को भाता है, उसे यीशु मसीह के द्वारा हम में उत्‍पन्‍न करे, जिस की बड़ाई युगानुयुग होती रहे। आमीन।

22हे भाइयों मैं तुम से बिनती करता हूँ, कि इन उपदेश की बातों को सह लो; क्‍योंकि मैं ने तुम्‍हें बहुत संक्षेप में लिखा है।

23तुम यह जान लो कि तीमुथियुस हमारा भाई छूट गया है और यदि वह शीघ्र आ गया, तो मैं उसके साथ तुम से भेंट करूँगा।

24अपने सब अगुवों और सब पवित्र लोगों को नमस्‍कार कहो। इतालियावाले तुम्‍हें नमस्‍कार कहते हैं।

25तुम सब पर अनुग्रह होता रहे। आमीन।

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