2 John 12017

1मुझ प्राचीन की ओर से उस चुनी हुई महिला और उसके बच्चों के नाम जिनसे मैं उस सच्‍चाई के कारण सत्‍य प्रेम रखता, हूँ और केवल मैं ही नहीं, वरन् वह सब भी प्रेम रखते हैं, जो सच्‍चाई को जानते हैं।

2वह सत्य जो हम में स्थिर रहता है, और सर्वदा हमारे साथ अटल रहेगा;

3परमेश्‍वर पिता, और पिता के पुत्र यीशु मसीह की ओर से अनुग्रह, और दया, और शान्‍ति, सत्‍य, और प्रेम सहित हमारे साथ रहेंगे।

4मैं बहुत आनन्‍दित हुआ, कि मैं ने तेरे कुछ बच्चों को उस आज्ञा के अनुसार, जो हमें पिता की ओर से मिली थी सत्‍य पर चलते हुए पाया।

5अब हे महिला, मैं तुझे कोई नई आज्ञा नहीं, पर वही जो आरम्‍भ से हमारे पास है, लिखता हूँ; और तुझ से बिनती करता हूँ, कि हम एक दूसरे से प्रेम रखें।

6और प्रेम यह है कि हम उस की आज्ञाओं के अनुसार चलें: यह वही आज्ञा है, जो तुम ने आरम्‍भ से सुनी है और तुम्‍हें इस पर चलना भी चाहिए।

7क्‍योंकि बहुत से ऐसे भरमानेवाले जगत में निकल आए हैं, जो यह नहीं मानते, कि यीशु मसीह शरीर में होकर आया: भरमानेवाला और मसीह का विरोधी यही है।

8अपने विषय में चौकस रहो; कि जो परिश्रम हम ने किया है, उस को तुम न बिगाड़ो: वरन उसका पूरा प्रतिफल पाओ।

9जो कोई आगे बढ़ जाता है, और मसीह की शिक्षा में बना नहीं रहता, उसके पास परमेश्‍वर नहीं: जो कोई उस की शिक्षा में स्‍थिर रहता है, उसके पास पिता भी है, और पुत्र भी।

10यदि कोई तुम्‍हारे पास आए, और यही शिक्षा न दे, उसे न तो घर में आने दो, और न नमस्‍कार करो।

11क्‍योंकि जो कोई ऐसे जन को नमस्‍कार करता है, वह उस के बुरे कामों में साझी होता है।

12मुझे बहुत सी बातें तुम्‍हें लिखनी हैं, पर कागज और सियाही से लिखना नहीं चाहता; पर आशा है, कि मैं तुम्‍हारे पास आऊँगा, और सम्‍मुख होकर बातचीत करूँगा: जिस से तुम्‍हारा आनन्‍द पूरा हो।

13तेरी चुनी हुई बहिन के बच्चे तुझे नमस्‍कार करते हैं।

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