1 John 52017

1जिसका यह विश्‍वास है कि यीशु ही मसीह है, वह परमेश्‍वर से उत्‍पन्‍न हुआ है और जो कोई उत्‍पन्‍न करनेवाले से प्रेम रखता है, वह उससे भी प्रेम रखता है, जो उससे उत्‍पन्‍न हुआ है।

2जब हम परमेश्‍वर से प्रेम रखते हैं, और उसकी आज्ञाओं को मानते हैं, तो इसी से हम जानते हैं, कि परमेश्‍वर की सन्‍तानों से प्रेम रखते हैं।

3और परमेश्‍वर का प्रेम यह है, कि हम उसकी आज्ञाओं को मानें; और उसकी आज्ञाएँ कठिन नहीं।

4क्‍योंकि जो कुछ परमेश्‍वर से उत्‍पन्‍न हुआ है, वह संसार पर जय प्राप्‍त करता है, और वह विजय जिस से संसार पर जय प्राप्‍त होती है हमारा विश्‍वास है।

5संसार पर जय पानेवाला कौन है? केवल वह जिसका विश्‍वास है, कि यीशु, परमेश्‍वर का पुत्र है।

6यही है वह, जो पानी और लोहू के द्वारा आया था; अर्थात् यीशु मसीह: वह न केवल पानी के द्वारा, बरन पानी और लोहू दोनों के द्वारा आया था।

7और जो गवाही देता है, वह आत्‍मा है; क्‍योंकि आत्‍मा सत्‍य है।

8और गवाही देनेवाले तीन हैं; आत्‍मा, और पानी, और लोहू; और तीनों एक ही बात पर सम्‍मत हैं।

9जब हम मनुष्‍यों की गवाही मान लेते हैं, तो परमेश्‍वर की गवाही तो उससे बढ़कर है; और परमेश्‍वर की गवाही यह है, कि उसने अपने पुत्र के विषय में गवाही दी है।

10जो परमेश्‍वर के पुत्र पर विश्‍वास करता है, वह अपने ही में गवाही रखता है; जिस ने परमेश्‍वर की प्रतीति नहीं की, उसने उसे झूठा ठहराया; क्‍योंकि उसने उस गवाही पर विश्‍वास नहीं किया, जो परमेश्‍वर ने अपने पुत्र के विषय में दी है।

11और वह गवाही यह है, कि परमेश्‍वर ने हमें अनन्‍त जीवन दिया है: और यह जीवन उसके पुत्र में है।

12जिसके पास पुत्र है, उसके पास जीवन है; और जिसके पास परमेश्‍वर का पुत्र नहीं, उसके पास जीवन भी नहीं है।।

13मैं ने तुम्‍हें, जो परमेश्‍वर के पुत्र के नाम पर विश्‍वास करते हो, इसलिये लिखा है; कि तुम जानो, कि अनन्‍त जीवन तुम्‍हारा है।

14और हमें उसके साम्‍हने जो हियाव होता है, वह यह है; कि यदि हम उसकी इच्‍छा के अनुसार कुछ माँगते हैं, तो हमारी सुनता है।

15और जब हम जानते हैं, कि जो कुछ हम माँगते हैं वह हमारी सुनता है, तो यह भी जानते हैं, कि जो कुछ हम ने उससे माँगा, वह पाया है।

16यदि कोई अपने भाई को ऐसा पाप करते देखे, जिसका फल मृत्‍यु न हो, तो विनती करे, और परमेश्‍वर, उसे, उनके लिये, जिन्‍हों ने ऐसा पाप किया है जिसका फल मृत्‍यु न हो, जीवन देगा : पाप ऐसा भी होता है जिसका फल मृत्‍यु है : इस के विषय में मै विनती करने के लिये नहीं कहता।

17सब प्रकार का अधर्म तो पाप है, परन्‍तु ऐसा पाप भी है, जिसका फल मृत्‍यु नहीं।।

18हम जानते हैं, कि जो कोई परमेश्‍वर से उत्‍पन्‍न हुआ है, वह पाप नहीं करता; जो परमेश्‍वर से उत्‍पन्‍न हुआ, उसे वह बचाए रखता है: और वह दुष्‍ट उसे छूने नहीं पाता।

19हम जानते हैं, कि हम परमेश्‍वर से हैं, और सारा संसार उस दुष्‍ट के वंश में पड़ा है।

20और यह भी जानते हैं, कि परमेश्‍वर का पुत्र आ गया है और उसने हमें समझ दी है, कि हम उस सच्‍चे को पहचानें, और हम उसमें जो सत्‍य है, अर्थात् उसके पुत्र यीशु मसीह में रहते हैं: सच्‍चा परमेश्‍वर और अनन्‍त जीवन यही है।

21हे बालको, अपने आप को मूरतों से बचाए रखो।

Copyright © 2017 Bridge Connectivity Solutions. Released under the Creative Commons Attribution No Derivatives license 4.0.

Choose Translation

Switch translation for 1 John 5.

Reading Settings

Paragraph viewDisplay verses as flowing paragraphs instead of individual lines
Show verse numbersDisplay verse numbers inline
Red letterHighlight the words of Christ in red

Sign in to save your reading preferences across sessions.