1 Corinthians 162017

1अब उस चन्‍दे के विषय में जो पवित्र लोगों के लिये किया जाता है, जैसी आज्ञा मैं ने गलतिया की कलीसियाओं को दी, वैसा ही तुम भी करो।

2सप्‍ताह के पहले दिन तुम में से हर एक अपनी आमदनी के अनुसार कुछ अपने पास रख छोड़ा करे, कि मेरे आने पर चन्‍दा न करना पड़े।

3और जब मैं आऊँगा, तो जिन्‍हें तुम चाहोगे उन्‍हें मैं चिट्ठियाँ देकर भेज दूँगा, कि तुम्‍हारा दान यरूशलेम पहुँचा दें।

4और यदि मेरा भी जाना उचित हुआ, तो वे मेरे साथ जाएँगे।

5और मैं मकिदुनिया होकर तुम्‍हारे पास आऊँगा क्योंकि मुझे मकिदुनिया होकर जाना ही है।

6परन्‍तु सम्‍भव है कि तुम्‍हारे यहाँ ही ठहर जाऊँ और शरद ऋतु तुम्‍हारे यंहा काटूँ, तब जिस ओर मेरा जाना हो, उस ओर तुम मुझे पहुँचा दो।

7क्‍योंकि मैं अब मार्ग में तुम से भेंट करना नहीं चाहता; परन्‍तु मुझे आशा है, कि यदि प्रभु चाहे तो कुछ समय तक तुम्‍हारे साथ रहूँगा।

8परन्‍तु मैं पेन्‍तिकुस्‍त तक इफिसुस में रहूँगा।

9क्‍योंकि मेरे लिये एक बड़ा और उपयोगी द्वार खुला है, और विरोधी बहुत से हैं।

10यदि तीमुथियुस आ जाए, तो देखना, कि वह तुम्‍हारे यहाँ निडर रहे; क्‍योंकि वह मेरी नाई प्रभु का काम करता है।

11इसलिये कोई उसे तुच्‍छ न जाने, परन्‍तु उसे कुशल से इस ओर पहुँचा देना, कि मेरे पास आ जाए; क्‍योंकि मैं उसकी बाट जोह रहा हूँ, कि वह भाइयों के साथ आए।

12और भाई अपुल्‍लोस से मैं ने बहुत बिनती की है कि तुम्‍हारे पास भाइयों के साथ जाए; परन्‍तु उसने इस समय जाने की कुछ भी इच्‍छा न की, परन्‍तु जब अवसर पाएगा, तब आ जाएगा।

13जागते रहो, विश्‍वास में स्‍थिर रहो, पुरूषार्थ करो, बलवन्‍त होओ।

14जो कुछ करते हो प्रेम से करो।

15हे भाइयो, तुम स्‍तिफनास के घराने को जानते हो, कि वे अखया के पहले फल हैं, और पवित्र लोगों की सेवा के लिये तैयार रहते हैं।

16सो मैं तुम से बिनती करता हूँ कि ऐसों के आधीन रहो, बरन हर एक के जो इस काम में परिश्रमी और सहकर्मी हैं।

17और मैं स्‍तिफनास और फूरतूनातुस और अखइकुस के आने से आनन्‍दित हूँ, क्‍योंकि उन्होंने तुम्‍हारी घटी को पूरी की है।

18और उन्होंने मेरी और तुम्‍हारी आत्‍मा को चैन दिया है इसलिये ऐसों को मानो।

19आसिया की कलीसियाओं की ओर से तुम को नमस्‍कार; अक्विला और प्रिस्का का और उनके घर की कलीसिया का भी तुम को प्रभु में बहुत बहुत नमस्‍कार।

20सब भाइयों का तुम को नमस्‍कार: पवित्र चुम्‍बन से आपस में नमस्‍कार करो।

21मुझ पौलुस का अपने हाथ का लिखा हुआ नमस्‍कार: यदि कोई प्रभु से प्रेम न रखे तो वह स्‍त्रापित हो।

22हमारा प्रभु आनेवाला है।

23प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह तुम पर होता रहे।

24मेरा प्रेम मसीह यीशु में तुम सब से रहे। आमीन।

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