2 Corinthians 12017

1पौलुस की ओर से जो परमेश्‍वर की इच्‍छा से मसीह यीशु का प्रेरित है, और भाई तीमुथियुस की ओर से परमेश्‍वर की उस कलीसिया के नाम जो कुरिन्‍थुस में है, और सारे अखया के सब पवित्र लोगों के नाम:

2हमारे पिता परमेश्‍वर और प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्हे अनुग्रह और शान्‍ति मिलती रहे।

3हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्‍वर, और पिता का धन्‍यवाद हो, जो दया का पिता, और सब प्रकार की शान्‍ति का परमेश्‍वर है।

4वह हमारे सब क्‍लेशों में शान्‍ति देता है; ताकि हम उस शान्‍ति के कारण जो परमेश्‍वर हमें देता है, उन्‍हें भी शान्‍ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्‍लेश में हों।

5क्‍योंकि जैसे मसीह के दु:ख हम को अधिक होते हैं, वैसे ही हमारी शान्‍ति भी मसीह के द्वारा अधिक सहभागी होती है।

6यदि हम क्‍लेश पाते हैं, तो यह तुम्‍हारी शान्‍ति और उद्धार के लिये है और यदि शान्‍ति पाते हैं, तो यह तुम्‍हारी शान्‍ति के लिये है; जिसके प्रभाव से तुम धीरज के साथ उन क्‍लेशों को सह लेते हो, जिन्‍हें हम भी सहते हैं।

7और हमारी आशा तुम्‍हारे विषय में दृढ़ है; क्‍योंकि हम जानते हैं, कि तुम जैसे दुखों के वैसे ही शान्‍ति के भी सहभागी हो।

8हे भाइयों, हम नहीं चाहते कि तुम हमारे उस क्‍लेश से अनजान रहो, जो आसिया में हम पर पड़ा, कि ऐसे भारी बोझ से दब गए थे, जो हमारी सामर्थ से बाहर था, यहाँ तक कि हम जीवन से भी हाथ धो बैठे थे।

9वरन् हम ने अपने मन में समझ लिया था, कि हम पर मृत्‍यु की आज्ञा हो चुकी है कि हम अपना भरोसा न रखें, वरन् परमेश्‍वर का जो मरे हुओं को जिलाता है।

10उसी ने हमें ऐसी बड़ी मृत्‍यु से बचाया, और बचाएगा; और उससे हमारी यह आशा है, कि वह आगे को भी बचाता रहेगा।

11और तुम भी मिलकर प्रार्थना के द्वारा हमारी सहायता करोगे, कि जो वरदान बहुतों के द्वारा हमें मिला, उसके कारण बहुत लोग हमारी ओर से धन्‍यवाद करें।

12क्‍योंकि हम अपने विवेक** की इस गवाही पर घमण्‍ड करते हैं, कि जगत में और विशेष करके तुम्‍हारे बीच हमारा चरित्र परमेश्‍वर के योग्‍य ऐसी पवित्रता और सच्‍चाई सहित था, जो शारीरिक ज्ञान से नहीं, परन्‍तु परमेश्‍वर के अनुग्रह के साथ था।

13हम तुम्‍हें और कुछ नहीं लिखते, केवल वह जो तुम पढ़ते या मानते भी हो, और मुझे आशा है, कि अन्‍त तक भी मानते रहोगे।

14जैसा तुम में से कितनों ने मान लिया है, कि हम तुम्‍हारे घमण्‍ड का कारण है; वैसे तुम भी प्रभु यीशु के दिन हमारे लिये घमण्‍ड का कारण ठहरोगे।

15और इस भरोसे से मैं चाहता था कि पहले तुम्‍हारे पास आऊँ; कि तुम्‍हें एक और दान मिले।

16और तुम्‍हारे पास से होकर मकिदुनिया को जाऊँ, और फिर मकिदुनिया से तुम्हारे पास आऊँ और तुम मुझे यहूदिया की ओर कुछ दूर तक पहुँचाओ।

17इसलिये मैं ने जो यह इच्‍छा की थी तो क्‍या मैं ने चंचलता दिखाई? या जो करना चाहता हूँ क्‍या शरीर के अनुसार करना चाहता हूँ, कि मैं बात में ‘हां, हां’ भी करूँ; और ‘नहीं नहीं’ भी करूँ?

18परमेश्‍वर सच्‍चा गवाह है, कि हमारे उस वचन में जो तुम से कहा ‘हाँ’ और ‘नहीं’ दोनों पाई नहीं जातीं।

19क्‍योंकि परमेश्‍वर का पुत्र यीशु मसीह जिसका हमारे द्वारा अर्थात् मेरे और सिलवानुस और तीमुथियुस के द्वारा तुम्‍हारे बीच मे प्रचार हुआ; उसमें ‘हाँ’ और ‘नहीं’ दोनों न थी; परन्‍तु, उसमें ‘हाँ’ ही ‘हाँ’ हुई।

20क्‍योंकि परमेश्‍वर की जितनी प्रतिज्ञायँ हैं, वे सब उसी में ‘हाँ’ के साथ हैं: इसलिये उसके द्वारा आमीन भी हुई, कि हमारे द्वारा परमेश्‍वर की महिमा हो।

21और जो हमें तुम्‍हारे साथ मसीह में दृढ़ करता है, और जिस ने हमें अभिषेक किया वही परमेश्‍वर है।

22जिस ने हम पर छाप भी कर दी है और बयाने में आत्‍मा को हमारे मनों में दिया।

23मैं परमेश्‍वर को गवाह करता हूँ, कि मै अब तक कुरिन्‍थुस में इसलिये नहीं आया, कि मुझे तुम पर तरस आता था।

24यह नहीं, कि हम विश्‍वास के विषय में तुम पर प्रभुता जताना चाहते हैं; परन्‍तु तुम्‍हारे आनन्‍द में सहायक हैं क्‍योंकि तुम विश्‍वास ही से स्‍थिर रहते हो।

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