Psalms 11HINOVBSI

1मेरा भरोसा परमेश्‍वर पर है; तुम कैसे मेरे प्राण से कह सकते हो, “पक्षी के समान अपने पहाड़ पर उड़ जा;

2क्योंकि देखो, दुष्‍ट अपने धनुष चढ़ाते हैं, और अपने तीर धनुष की डोरी पर रखते हैं, कि सीधे मनवालों पर अन्धियारे में तीर चलाएँ;

3यदि नीवें ढा दी जाएँ तो धर्मी क्या कर सकता है?”

4परमेश्‍वर अपने पवित्र भवन में है; परमेश्‍वर का सिंहासन स्वर्ग में है; उसकी आँखें मनुष्य की सन्तान को नित देखती रहती हैं और उसकी पलकें उनको जाँचती हैं।

5यहोवा धर्मी को परखता है, परन्तु वह उनसे जो दुष्‍ट हैं और उपद्रव से प्रीति रखते हैं अपनी आत्मा में घृणा करता है।

6वह दुष्‍टों पर फन्दे बरसाएगा; आग और गन्धक और प्रचण्ड लूह उनके कटोरों में बाँट दी जाएँगी।

7क्योंकि यहोवा धर्मी है, वह धर्म ही के कामों से प्रसन्न रहता है; धर्मीजन उसका दर्शन पाएँगे।

Hindi OV (Re-edited) Bible - पवित्र बाइबिल OV (Re-edited) Bible Copyright © 2012 by The Bible Society of India Used by permission. All rights reserved worldwide.

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