1यहूदा के लोग परमेश्वर को जानते हैं। इस्राएल जानता है कि सचमुच परमेश्वर का नाम बड़ा है।
2परमेश्वर का मन्दिर शालेम में स्थित है। परमेश्वर का घर सिय्योन के पर्वत पर है।
3उस जगह पर परमेश्वर ने धनुष-बाण, ढाल, तलवारे और युद्ध के दूसरे शस्त्रों को तोड़ दिया।
4हे परमेश्वर, जब तू उन पर्वतों से लौटता है, जहाँ तूने अपने शत्रुओं को हरा दिया था, तू महिमा से मण्डित रहता है।
5उन सैनिकों ने सोचा की वे बलशाली है। किन्तु वे अब रणक्षेत्रों में मरे पड़े हैं। उनके शव जो कुछ भी उनके साथ था, उस सब कुछ के रहित पड़े हैं। उन बलशाली सैनिकों में कोई ऐसा नहीं था, जो आप स्वयं की रक्षा कर पाता।
6याकूब का परमेश्वर उन सैनिकों पर गरजा और वह सेना रथों और अश्वों सहित गिरकर मर गयी।
7हे परमेश्वर, तू भय विस्मयपूर्ण है! जब तू कुपित होता है तेरे सामने कोई व्यक्ति टिक नहीं सकता।
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10हे परमेश्वर, जब तू दुष्टों को दण्ड देता है। लोग तेरा गुण गाते हैं। तू अपना क्रोध प्रकट करता है और शेष बचे लोग बलशाली हो जाते हैं।
11लोग परमेश्वर की मन्नतें मानेंगे और वे उन वस्तुओं को जिनकी मन्नतें उन्होंने मानीं हैं, यहोवा को अर्पण करेंगे। लोग हर किसी स्थान से उस परमेश्वर को उपहार लायेंगे।
12परमेश्वर बड़े बड़े सम्राटों को हराता है। धरती के सभी शासकों उसका भय मानों।