Psalms 75ERV

1हे परमेश्वर, हम तेरी प्रशंसा करते हैं! हम तेरे नाम का गुणगान करते हैं! तू समीप है और लोग तेरे उन अद्भत कर्मो का जिनको तू करता है, बखान करते हैं।

2परमेश्वर, कहता है, “मैंने न्याय का समय चुन लिया, मैं निष्पक्ष होकर के न्याय करूँगा।

3धरती और धरती की हर वस्तु डगमगा सकती है और गिरने को तैयार हो सकती है, किन्तु मैं ही उसे स्थिर रखता हूँ।

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5[This verse may not be a part of this translation]

6इस धरती पर सचुमच, कोई भी मनुष्य नीच को महान नहीं बना सकता।

7परमेश्वर न्याय करता है। परमेश्वर इसका निर्णय करता है कि कौन व्यक्ति महान होगा। परमेश्वर ही किसी व्यक्ति को महत्त्वपूर्ण पद पर बिठाता है। और किसी दूसरे को निची दशा में पहुँचाता है।

8परमेश्वर दुष्टों को दण्ड देने को तत्पर है। परमेश्वर के पास विष मिला हुआ मधु पात्र है। परमेश्वर इस दाखमधु (दण्ड) को उण्डेलता है और दुष्ट जन उसे अंतिम बूँद तक पीते हैं।

9मैं लोगों से इन बातों का सदा बखान करूँगा। मैं इस्राएल के परमेश्वर के गुण गाऊँगा।

10मैं दुष्ट लोगों की शक्ति को छीन लूँगा, और मैं सज्जनों को शक्ति दूँगा।

Easy-to-Read Version Copyright © 2010 World Bible Translation Center

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