1मैं धीरज के साथ अपने उद्धार के लिए यहोवा का बाट जोहता हूँ।
2परमेश्वर मेरा गढ़ है। परमेश्वर मुझको बचाता है। ऊँचे पर्वत पर, परमेश्वर मेरा सुरक्षा स्थान है। मुझको महा सेनायें भी पराजित नहीं कर सकतीं।
3तू मुझ पर कब तक वार करता रहेगा मैं एक झूकी दीवार सा हो गया हूँ, और एक बाड़े सा जो गिरने ही वाला है।
4वे लोग मेरे नाश का कुचक्र रच रहें हैं। मेरे विषय में वे झूठी बातें बनाते हैं। लोगों के बीच में, वे मेरी बढाई करते, किन्तु वे मुझको लुके-छिपे कोसते हैं।
5मैं यहोवा की बाट धीरज के साथ जोहता हूँ। बस परमेश्वर ही अपने उद्धार के लिए मेरी आशा है।
6परमेश्वर मेरा गढ़ है। परमेश्वर मुझको बचाता है। ऊँचे पर्वत में परमेश्वर मेरा सुरक्षा स्थान है।
7महिमा और विजय, मुझे परमेश्वर से मिलती है। वह मेरा सुदृढ़ गढ़ है। परमेश्वर मेरा सुरक्षा स्थल है।
8मैं तेरे नाम का गुण सदा गाऊँगा। उन बातों को करूँगा जिनके करने का वचन मैंने दिया है। लिये दाऊद का एक पद।
9सचमुच लोग कोई मदद नहीं कर सकते। सचमुच तुम उनके भरोसे सहायता पाने को नहीं रह सकते! परमेश्वर की तुलना में वे हवा के झोंके के समान हैं।
10तुम बल पर भरोसा मत रखो की तुम शक्ति के साथ वस्तुओं को छीन लोगे। मत सोचो तुम्हें चोरी करने से कोई लाभ होगा। और यदि धनवान भी हो जाये तो कभी दौलत पर भरोसा मत करो, कि वह तुमको बचा लेगी।
11एक बात ऐसी है जो परमेश्वर कहता है, जिसके भरोसे तुम सचमुच रह सकते हो: ‘शक्ति परमेश्वर से आती है!’
12[This verse may not be a part of this translation]