1हे परमेश्वर, मेरा प्रार्थना गीत सुन। मेरी विनती सुन।
2जहाँ भी मैं कितनी ही निर्बलता में होऊँ, मैं सहायता पाने को तुझको पुकारूँगा! जब मेरा मन भारी हो और बहुत दु:खी हो, तू मुझको बहुत ऊँचे सुरक्षित स्थान पर ले चल।
3तू ही मेरा शरणस्थल है! तू ही मेरा सुदृढ़ गढ़ है, जो मुझे मेरे शत्रुओं से बचाता है।
4तेरे डेरे में, मैं सदा सदा के लिए निवास करूँगा। मैं वहाँ छिपूँगा जहाँ तू मुझे बचा सके।
5हे परमेश्वर, तूने मेरी वह मन्नत सुनी है, जिसे तुझपर चढ़ाऊँगा, किन्तु तेरे भक्तों के पास हर वस्तु उन्हें तुझसे ही मिली है।
6राजा को लम्बी आयु दे। उसको चिरकाल तक जीने दे!
7उसको सदा परमेश्वर के साथ में बना रहने दे! तू उसकी रक्षा निज सच्चे प्रेम से कर।
8[This verse may not be a part of this translation]