1प्रभु मेरा चरवाहा है, मुझ-भेड़ को अभाव न होगा।
2वह मुझे हरी-भरी भूमि पर विश्राम कराता है; वह मुझे झरने के शांत तट पर ले जाता है;
3वह मुझे नवजीवन देता है; वह अपने नाम के लिए धर्म के मार्ग पर मेरा नेतृत्व करता है।
4यद्यपि मैं घोर अंधकारमय घाटी से गुजरता हूँ, तो भी अनिष्ट से नहीं डरता, क्योंकि हे प्रभु, तू मेरे साथ है। तेरी सोंठी, तेरी लाठी मुझे सहारा देती हैं।
5मेरे शत्रुओं की उपस्थिति में तू मेरे लिए खाने की मेज़ लगाता है; तू तेल से मेरे सिर का अभ्यंजन करता है, मेरा प्याला छलक रहा है।
6निश्चय भलाई और करुणा जीवन भर मेरा अनुसरण करेंगी; और मैं प्रभु के घर में युग-युगांत निवास करूंगा।