Romans 132017

1हर एक व्यक्ति प्रधान अधिकारियों के अधीन रहे; क्‍योंकि कोई अधिकार ऐसा नहीं, जो परमेश्‍वर की ओर से न हो; और जो अधिकार हैं, वे परमेश्‍वर के ठहराए हुए हैं।

2इस से जो कोई अधिकार का विरोध करता है, वह परमेश्‍वर की विधि का साम्‍हना करता है, और साम्‍हना करनेवाले दण्‍ड पाएँगे।

3क्‍योंकि हाकिम अच्‍छे काम के नहीं, परन्‍तु बुरे काम के लिये डर का कारण हैं; सो यदि तू हाकिम से निडर रहना चाहता है, तो अच्‍छा काम कर और उसकी ओर से तेरी सराहना होगी;

4क्‍योंकि वह तेरी भलाई के लिये परमेश्‍वर का सेवक है। परन्‍तु यदि तू बुराई करे, तो डर; क्‍योकि वह तलवार व्‍यर्थ लिये हुए नहीं और परमेश्‍वर का सेवक है; कि उसके क्रोध के अनुसार बुरे काम करनेवाले को दण्‍ड दे।

5इसलिये अधीन रहना न केवल उस क्रोध से परन्‍तु डर से अवश्‍य है, वरन विवेक भी यही गवाही देता है।

6इसलिये कर भी दो, क्‍योंकि शासन करनेवाले परमेश्वर के सेवक हैं, और सदा इसी काम में लगे रहते हैं।

7इसलिये हर एक का हक्‍क चुकाया करो; जिसे कर चाहिए, उसे कर दो; जिसे महसूल चाहिए, उसे महसूल दो; जिस से डरना चाहिए, उससे डरो; जिस का आदर करना चाहिए उसका आदर करो।

8आपस के प्रेम को छोड़ और किसी बात में किसी के कर्जदान न हो; क्‍योंकि जो दूसरे से प्रेम रखता है, उसी ने व्‍यवस्‍था पूरी की है।

9क्‍योंकि यह कि “व्‍यभिचार न करना, हत्‍या न करना, चोरी न करना, लालच न करना,” और इन को छोड़ और कोई भी आज्ञा हो तो सब का सारांश इस बात में पाया जाता है, “अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख।”

10प्रेम पड़ोसी की कुछ बुराई नहीं करता, इसलिये प्रेम रखना व्‍यवस्‍था को पूरा करना है।

11और समय को पहिचान कर ऐसा ही करो, इसलिये कि अब तुम्‍हारे लिये नींद से जाग उठने की घड़ी आ पहुँची है; क्‍योंकिं जिस समय हम ने विश्‍वास किया था, उस समय के विचार से अब हमारा उद्धार निकट है।

12रात बहुत बीत गई है, और दिन निकलने पर है; इसलिये हम अन्‍धकार के कामों को तज कर ज्‍योति के हथियार बान्‍ध लें।

13जैसा दिन को शोभा देता है, वैसा ही हम सीधी चाल चलें; न कि लीला क्रीड़ा, और पियक्‍कड़पन, न व्‍यभिचार, और लुचपन में, और न झगड़े और डाह में।

14वरन प्रभु यीशु मसीह को पहिन लो, और शरीर की अभिलाषाओं को पूरा करने का उपाय न करो।

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