Revelation 22017

1“इफिसुस की कलीसिया के दूत को यह लिख: जो सातों तारे अपने दाहिने हाथ में लिए हुए है, और सोने की सातों दीवटों के बीच में फिरता है, वह यह कहता है:

2‘मै तेरे काम, और परिश्रम, और तेरा धीरज जानता हूँ; और यह भी कि तू बुरे लोगों को तो देख नहीं सकता; और जो अपने आप को प्रेरित कहते हैं, और हैं नहीं, उन्‍हें तूने परखकर झूठा पाया।

3और तू धीरज धरता है, और मेरे नाम के लिये दु:ख उठाते-उठाते थका नहीं।

4‘पर मुझे तेरे विरूद्ध यह कहना है कि तूने अपना पहला सा प्रेम छोड़ दिया है।

5‘इसलिये स्मरण कर, कि तू कहाँ से गिरा है, और मन फिरा और पहले के समान काम कर; और यदि तू मन न फिराएगा, तो मै तेरे पास आकर तेरी दीवट को उस स्‍थान से हटा दूँगा।

6‘पर हाँ, तुझ में यह बात तो है, कि तू नीकुलइयों के कामों से घृणा करता है, जिनसे मैं भी घृणा करता हूँ।

7‘जिसके कान हों, वह सुन ले कि आत्‍मा कलीसियाओं से क्‍या कहता है: जो जय पाए, मैं उसे उस जीवन के पेड़ में से जो परमेश्‍वर के स्‍वर्गलोक में है, फल खाने को दूँगा।’

8“स्‍मुरना की कलीसिया के दूत को यह लिख: जो प्रथम और अन्‍तिम है; जो मर गया था और अब जीवित हो गया है, वह यह कहता है:

9‘मैं तेरे क्‍लेश और दरिद्रता को जानता हूँ (परन्‍तु तू धनी है); और जो लोग अपने आप को यहूदी कहते हैं और हैं नहीं, पर शैतान की सभा हैं, उनकी निन्‍दा को भी जानता हूँ।

10‘जो दु:ख तुझ को झेलने होंगे, उनसे मत डर: क्‍योंकि देखो, शैतान तुम में से कुछ को जेलखाने में डालने पर है ताकि तुम परखे जाओ; और तुम्‍हें दस दिन तक क्‍लेश उठाना होगा: प्राण देने तक विश्‍वासी रह; तो मैं तुझे जीवन का मुकुट दूँगा।

11‘जिसके कान हों, वह सुन ले कि आत्‍मा कलीसियाओं से क्‍या कहता है: जो जय पाए, उसको दूसरी मृत्‍यु से हानि न पहूँचेगी।’

12“पिरगमुन की कलीसिया के दूत को यह लिख: जिसके पास दोधारी और तेज तलवार है, वह यह कहता है:

13‘मैं यह तो जानता हूँ, कि तू वहाँ रहता है जहाँ शैतान का सिंहासन है, और मेरे नाम पर स्‍थिर रहता है; और मुझ पर विश्‍वास करने से उन दिनों में भी पीछे नहीं हटा जिनमें मेरा विश्‍वासयोग्‍य साक्षी अन्‍तिपास, तुम में उस स्‍थान पर घात किया गया जहाँ शैतान रहता है।

14‘पर मुझे तेरे विरूद्ध कुछ बातें कहनी हैं, क्‍योंकि तेरे यहाँ कुछ तो ऐसे हैं, जो बिलाम की शिक्षा को मानते हैं, जिसने बालाक को इस्राएलियों के आगे ठोकर का कारण रखना सिखाया, कि वे मूर्तियों पर चढ़ाई गई वस्तुएँ खाएँ, और व्‍यभिचार करें।

15‘वैसे ही तेरे यहाँ कुछ तो ऐसे हैं, जो नीकुलइयों की शिक्षा को मानते हैं।

16‘अतः मन फिरा, नहीं तो मैं तेरे पास शीघ्र ही आकर, अपने मुख की तलवार से उनके साथ लड़ूँगा।

17‘जिसके कान हों, वह सुन ले कि आत्‍मा कलीसियाओं से क्‍या कहता है; जो जय पाए, उसको मैं गुप्‍त मन्‍ना में से दूँगा, और उसे एक श्‍वेत पत्‍थर भी दूँगा; और उस पत्‍थर पर एक नाम लिखा हुआ होगा, जिसे उसके पानेवाले के सिवाय और कोई न जानेगा।’

18“थूआतीरा की कलीसिया के दूत को यह लिख: परमेश्‍वर का पुत्र जिसकी आँखें आग की ज्‍वाला के समान, और जिसके पाँव उत्तम पीतल के समान हैं, वह यह कहता है:

19‘मैं तेरे कामों, और प्रेम, और विश्‍वास, और सेवा, और धीरज को जानता हूँ, और यह भी कि तेरे पिछले काम पहलों से बढ़कर हैं।

20‘पर मुझे तेरे विरूद्ध यह कहना है, कि तू उस स्‍त्री इजेबेल को रहने देता है जो अपने आप को भविष्‍यद्वक्तिन कहती है, और मेरे दासों को व्‍यभिचार करने, और मूर्तियों के आगे चढ़ाई गई वस्तुएँ खाना सिखलाकर भरमाती है।

21‘मैंने उसको मन फिराने के लिये अवसर दिया, पर वह अपने व्‍यभिचार से मन फिराना नहीं चाहती।

22‘देख, मैं उसे खाट पर डालता हूँ; और जो उसके साथ व्‍यभिचार करते हैं यदि वे भी उसके से कामों से मन न फिराएँगे तो उन्‍हें बड़े क्‍लेश में डालूँगा।

23‘मैं उसके बच्‍चों को मार डालूँगा; और तब सब कलीसियाएँ जान लेंगी कि हृदय और मन का परखनेवाला मैं ही हूँ: और मैं तुम में से हर एक को उसके कामों के अनुसार बदला दूँगा।

24‘पर तुम थूआतीरा के बाकी लोगों से, जितने इस शिक्षा को नहीं मानते, और उन बातों को जिन्‍हें शैतान की गहिरी बातें कहते हैं नहीं जानते, यह कहता हूँ, कि मैं तुम पर और बोझ न डालूँगा।

25‘पर हाँ, जो तुम्‍हारे पास है उसको मेरे आने तक थामें रहो।

26जो जय पाए, और मेरे कामों के अनुसार अन्‍त तक करता रहे, ‘मैं उसे जाति-जाति के लोगों पर अधिकार दूँगा।

27और वह लोहे का राजदण्‍ड लिये हुए उन पर राज्‍य करेगा, जिस प्रकार कुम्‍हार के मिट्टी के बर्तन चकनाचूर हो जाते है: मैने भी ऐसा ही अधिकार अपने पिता से पाया है।

28और मैं उसे भोर का तारा दूँगा।

29‘जिसके कान हों, वह सुन ले कि आत्‍मा कलीसियाओं से क्‍या कहता है।’

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