Revelation 152017

1फिर मैंने स्‍वर्ग में एक और बड़ा और अद्भुत चिन्‍ह देखा, अर्थात् सात स्‍वर्गदूत जिनके पास सातों अन्तिम विपत्तियाँ थीं, क्‍योंकि उनके हो जाने पर परमेश्‍वर के प्रकोप का अन्‍त है।

2और मैंने आग से मिले हुए काँच का सा एक समुद्र देखा, और जो उस पशु पर और उसकी मूर्ति पर, और उसके नाम के अंक पर जयवन्‍त हुए थे, उन्‍हें उस काँच के समुद्र के निकट परमेश्‍वर की वीणाओं को लिए हुए खड़े देखा।

3और वे परमेश्‍वर के दास मूसा का गीत, और मेमने का गीत गा गाकर कहते थे, “हे सर्वशक्तिमान प्रभु परमेश्‍वर, तेरे कार्य महान, और अद्भुत हैं, हे युग-युग के राजा, तेरी चाल ठीक और सच्‍ची है।

4“हे प्रभु, कौन तुझ से न डरेगा? और तेरे नाम की महिमा न करेगा? क्‍योंकि केवल तू ही पवित्र है, और सारी जातियाँ आकर तेरे सामने दण्‍डवत् करेंगी, क्‍योंकि तेरे न्‍याय के काम प्रगट हो गए हैं।”

5और इसके बाद मैंने देखा, कि स्‍वर्ग में साक्षी के तम्‍बू का मन्‍दिर खोला गया,

6और वे सातों स्‍वर्गदूत जिनके पास सातों विपत्तियाँ थीं, मलमल के शुद्ध और चमकदार वस्त्र पहने और छाती पर सोने की पट्टियाँ बाँधे हुए मन्‍दिर से निकले।

7तब उन चारों प्राणियों में से एक ने उन सात स्‍वर्गदूतों को परमेश्‍वर के, जो युगानुयुग जीवता है, प्रकोप से भरे हुए सात सोने के कटोरे दिए।

8और परमेश्‍वर की महिमा, और उसकी सामर्थ्य के कारण मन्‍दिर धुएँ से भर गया और जब तक उन सातों स्‍वर्गदूतों की सातों विपत्तियाँ समाप्‍त न हुई, तब तक कोई मन्‍दिर में न जा सका।

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