Revelation 142017

1फिर मैंने दृष्‍टि की, और देखो, वह मेमना सिय्‍योन पहाड़ पर खड़ा है, और उसके साथ एक लाख चौवालीस हजार जन हैं, जिनके माथे पर उसका और उसके पिता का नाम लिखा हुआ है।

2और स्‍वर्ग से मुझे एक ऐसा शब्‍द सुनाई दिया, जो जल की बहुत धाराओं और बड़े गर्जन का सा शब्‍द था, और जो शब्‍द मैंने सुना वह ऐसा था, मानो वीणा बजानेवाले वीणा बजाते हों।

3और वे सिंहासन के सामने और चारों प्राणियों और प्राचीनों के सामने मानो, एक नया गीत गा रहे थे, और उन एक लाख चौवालीस हजार जनो को छोड़, जो पृथ्‍वी पर से मोल लिए गए थे, कोई वह गीत न सीख सकता था।

4ये वे हैं, जो स्‍त्रियों के साथ अशुद्ध नहीं हुए, पर कुँवारे हैं; ये वे ही हैं, कि जहाँ कहीं मेमना जाता है, वे उसके पीछे हो लेते हैं; ये तो परमेश्‍वर के निमित्त पहले फल होने के लिये मनुष्‍यों में से मोल लिए गए हैं।

5और उनके मुँह से कभी झूठ न निकला था, वे निर्दोष हैं।

6फिर मैंने एक और स्‍वर्गदूत को आकाश के बीच में उड़ते हुए देखा जिसके पास पृथ्‍वी पर के रहनेवालों की हर एक जाति, और कुल, और भाषा, और लोगों को सुनाने के लिये सनातन सुसमाचार था।

7और उसने बड़े शब्‍द से कहा, “परमेश्‍वर से डरो, और उसकी महिमा करो, क्‍योंकि उसके न्‍याय करने का समय आ पहुँचा है; और उसका भजन करो, जिसने स्‍वर्ग और पृथ्‍वी और समुद्र और जल के सोते बनाए।”

8फिर इसके बाद एक और, दूसरा स्‍वर्गदूत यह कहता हुआ आया, “गिर पड़ा, वह बड़ा बेबीलोन गिर पड़ा जिसने अपने व्‍यभिचार की कोपमय मदिरा सारी जातियों को पिलाई है।”

9फिर इनके बाद एक और, तीसरा स्‍वर्गदूत बड़े शब्‍द से यह कहता हुआ आया, “जो कोई उस पशु और उसकी मूर्ति की पूजा करे, और अपने माथे या अपने हाथ पर उसकी छाप ले,

10तो वह परमेश्‍वर का प्रकोप की निरी मदिरा जो उसके क्रोध के कटोरे में डाली गई है, पीएगा और पवित्र स्‍वर्गदूतों के सामने और मेमने के सामने आग और गन्‍धक की पीड़ा में पड़ेगा।

11और उनकी पीड़ा का धुआँ युगानुयुग उठता रहेगा, और जो उस पशु और उसकी मूर्ति की पूजा करते हैं, और जो उसके नाम ही छाप लेते हैं, उनको रात-दिन चैन न मिलेगा।”

12पवित्र लोगों का धीरज इसी में है, जो परमेश्‍वर की आज्ञाओं को मानते, और यीशु पर विश्‍वास रखते हैं।

13और मैंने स्‍वर्ग से यह शब्‍द सुना, “लिख: जो मृतक प्रभु में मरते हैं, वे अब से धन्‍य हैं।” आत्‍मा कहता है, “हाँ, क्‍योंकि वे अपने परिश्रमों से विश्राम पाएँगे, और उनके कार्य उनके साथ हो लेते हैं।”

14मैंने दृष्‍टि की, और देखो, एक उजला बादल है, और उस बादल पर मनुष्‍य के पुत्र सरीखा कोई बैठा है, जिसके सिर पर सोने का मुकुट और हाथ में चोखा हँसुआ है।

15फिर एक और स्‍वर्गदूत ने मन्‍दिर में से निकलकर, उससे जो बादल पर बैठा था, बड़े शब्‍द से पुकारकर कहा, “अपना हँसुआ लगाकर लवनी कर, क्‍योंकि लवने का समय आ पहुँचा है, इसलिये कि पृथ्‍वी की खेती पक चुकी है।”

16अतः जो बादल पर बैठा था, उसने पृथ्‍वी पर अपना हँसुआ लगाया, और पृथ्‍वी की लवनी की गई।

17फिर एक और स्‍वर्गदूत उस मन्‍दिर में से निकला, जो स्‍वर्ग में है, और उसके पास भी चोखा हँसुआ था।

18फिर एक और स्‍वर्गदूत, जिसे आग पर अधिकार था, वेदी में से निकला, और जिसके पास चोखा हँसुआ था, उससे ऊँचे शब्‍द से कहा, “अपना चोखा हँसुआ लगाकर पृथ्‍वी की दाखलता के गुच्‍छे काट ले; क्‍योंकि उसकी दाख पक चुकी है।”

19तब उस स्‍वर्गदूत ने पृथ्‍वी पर अपना हँसुआ लगाया, और पृथ्‍वी की दाखलता का फल काटकर, अपने परमेश्‍वर के प्रकोप के बड़े रसकुण्‍ड में डाल दिया।

20और नगर के बाहर उस रसकुण्‍ड में दाख रौंदे गए, और रसकुण्‍ड में से इतना लहू निकला कि घोड़ों के लगामों तक पहुँचा, और सौ कोस तक बह गया।

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