Matthew 242017

1जब यीशु मन्‍दिर से निकलकर जा रहा था, तो उसके चेले उसको मन्‍दिर की रचना दिखाने के लिये उस के पास आए।

2उसने उनसे कहा, “क्‍या तुम यह सब नहीं देखते? मैं तुम से सच कहता हूँ, यहाँ पत्‍थर पर पत्‍थर भी न छूटेगा, जो ढाया न जाएगा।”

3और जब वह जैतून पहाड़ पर बैठा था, तो चेलों ने अलग उसके पास आकर कहा, “हम से कह कि ये बातें कब होंगी? और तेरे आने का, और जगत के अन्‍त का क्‍या चिन्‍ह होगा?”

4यीशु ने उनको उत्तर दिया, “सावधान रहो! कोई तुम्‍हें न भरमाने पाए।

5”क्‍योंकि बहुत से ऐसे होंगे जो मेरे नाम से आकर कहेंगे, ‘मैं मसीह हूँ’, और बहुतों को भरमाएँगे।

6”तुम लड़ाइयों और लड़ाइयों की चर्चा सुनोगे; देखो घबरा न जाना क्‍योंकि इन का होना अवश्‍य है, परन्‍तु उस समय अन्‍त न होगा।

7”क्‍योंकि जाति पर जाति, और राज्‍य पर राज्‍य चढ़ाई करेगा, और जगह-जगह अकाल पड़ेंगे, और भुईडोल होंगे।

8”ये सब बातें पीड़ाओं का आरम्‍भ होंगी।

9”तब वे क्‍लेश दिलाने के लिये तुम्‍हें पकड़वाएँगे, और तुम्‍हें मार डालेंगे और मेरे नाम के कारण सब जातियों के लोग तुम से बैर रखेंगे।

10”तब बहुतेरे ठोकर खाएँगे, और एक दूसरे को पकड़वाएँगे और एक दूसरे से बैर रखेंगे।

11”बहुत से झूठे भविष्‍यद्वक्‍ता उठ खड़े होंगे, और बहुतों को भरमाएँगे ।

12”और अधर्म के बढ़ने से बहुतों का प्रेम ठण्‍डा हो जाएगा।

13”परन्‍तु जो अन्‍त तक धीरज धरे रहेगा, उसी का उद्धार होगा।

14”और राज्‍य का यह सुसमाचार सारे जगत में प्रचार किया जाएगा, कि सब जातियों पर गवाही हो, तब अन्‍त आ जाएगा।

15”इसलिए जब तुम उस उजाड़नेवाली घृणित वस्‍तु को जिसकी चर्चा दानिय्‍येल भविष्‍यद्वक्‍ता के द्वारा हुई थी, पवित्र स्‍थान में खड़ी हुई देखो, (जो पढ़े, वह समझे)।

16तब जो यहूदिया में हों वे पहाड़ों पर भाग जाएँ।

17”जो छत पर हो, वह अपने घर में से सामान लेने को न उतरे।

18”और जो खेत में हो, वह अपना कपड़ा लेने को पीछे न लौटे।

19”उन दिनों में जो गर्भवती और दूध पिलाती होंगी, उनके लिये हाय, हाय।

20”और प्रार्थना करो; कि तुम्‍हें जाड़े में या सब्‍त के दिन भागना न पड़े।

21”क्‍योंकि उस समय ऐसा भारी क्‍लेश होगा, जैसा जगत के आरम्‍भ से न अब तक हुआ, और न कभी होगा।

22”और यदि वे दिन घटाए न जाते, तो कोई प्राणी न बचता; परन्‍तु चुने हुओं के कारण वे दिन घटाए जाएँगे।

23”उस समय यदि कोई तुम से कहे, कि देखो, मसीह यहाँ हैं! या वहाँ है! तो प्रतीति न करना।

24”क्‍योंकि झूठे मसीह और झूठे भविष्‍यद्वक्‍ता उठ खड़े होंगे, और बड़े चिन्‍ह और अद्भुत काम दिखाएँगे, कि यदि हो सके तो चुने हुओं को भी भरमा दें।

25”देखो, मैं ने पहले से तुम से यह सब कुछ कह दिया है।

26”इसलिये यदि वे तुम से कहें, ‘देखो, वह जंगल में है’, तो बाहर न निकल जाना; ‘देखो, वह कोठरियों में हैं’, तो प्रतीति न करना।

27”क्‍योंकि जैसे बिजली पूर्व से निकलकर पश्‍चिम तक चमकती जाती है, वैसा ही मनुष्‍य के पुत्र का भी आना होगा।

28”जहाँ लोथ हो, वहीं गिद्ध इकट्ठे होंगे।

29”उन दिनों के क्‍लेश के बाद तुरन्‍त सूर्य अंधियारा हो जाएगा, और चान्‍द का प्रकाश जाता रहेगा, और तारे आकाश से गिर पड़ेंगे और आकाश की शक्तियाँ हिलाई जाएँगी।

30”तब मनुष्‍य के पुत्र का चिन्‍ह आकाश में दिखाई देगा, और तब पृथ्‍वी के सब कुलों के लोग छाती पीटेंगे; और मनुष्‍य के पुत्र को बड़ी सामर्थ्य और ऐश्‍वर्य के साथ आकाश के बादलों पर आते देखेंगे।

31”और वह तुरही के बड़े शब्‍द के साथ, अपने दूतों को भेजेगा, और वे आकाश के इस छोर से उस छोर तक, चारों दिशा से उसके चुने हुओं को इकट्ठे करेंगे।

32”अंजीर के पेड़ से यह दृष्‍टान्‍त सीखो: जब उसकी डाली कोमल हो जाती और पत्ते निकलने लगते हैं, तो तुम जान लेते हो, कि ग्रीष्‍म काल निकट है।

33इसी रीति से जब तुम इन सब बातों को देखो, तो जान लो, कि वह निकट है, वरन् द्वार पर है।

34”मैं तुम से सच कहता हूँ, कि जब तब ये सब बातें पूरी न हो लें, तब तक इस पीढ़ी का अंत नहीं होगा।

35”आकाश और पृथ्‍वी टल जाएँगे, परन्‍तु मेरी बातें कभी न टलेंगी।

36”उस दिन और उस घड़ी के विषय में कोई नहीं जानता, न स्‍वर्ग के दूत, और न पुत्र, परन्‍तु केवल पिता।

37”जैसे नूह के दिन थे, वैसा ही मनुष्‍य के पुत्र का आना भी होगा।

38”क्‍योंकि जैसे जल-प्रलय से पहले के दिनों में, जिस दिन तक कि नूह जहाज पर न चढ़ा, उस दिन तक लोग खाते-पीते थे, और उन में ब्‍याह शादी होती थी।

39और जब तक जल-प्रलय आकर उन सब को बहा न ले गया, तब तक उनको कुछ भी मालूम न पड़ा; वैसे ही मनुष्‍य के पुत्र का आना भी होगा।

40”उस समय दो जन खेत में होंगे, एक ले लिया जाएगा और दूसरा छोड़ दिया जाएगा।

41”दो स्‍त्रियाँ चक्‍की पीसती रहेंगी, एक ले ली जाएगी, और दूसरी छोड़ दी जाएगी।

42”इसलिये जागते रहो, क्‍योंकि तुम नहीं जानते कि तुम्‍हारा प्रभु किस दिन आएगा।

43”परन्‍तु यह जान लो कि यदि घर का स्‍वामी जानता होता कि चोर किस पहर आएगा, तो जागता रहता; और अपने घर में सेंध लगने न देता।

44”इसलिये तुम भी तैयार रहो, क्‍योंकि जिस घड़ी के विषय में तुम सोचते भी नहीं हो, उसी घड़ी मनुष्‍य का पुत्र आ जाएगा।

45”अतः वह विश्‍वासयोग्‍य और बुद्धिमान दास कौन है, जिसे स्‍वामी ने अपने नौकर-चाकरों पर सरदार ठहराया, कि समय पर उन्‍हें भोजन दे?

46”धन्‍य है, वह दास, जिसे उसका स्‍वामी आकर ऐसा की करते पाए।

47”मैं तुम से सच कहता हूँ; वह उसे अपनी सारी संपत्ति पर अधिकारी ठहराएगा।

48”परन्‍तु यदि वह दुष्‍ट दास सोचने लगे, कि मेरे स्‍वामी के आने में देर है।

49और अपने साथी दासों को पीटने लगे, और पियक्‍कड़ों के साथ खाए-पीए।

50तो उस दास का स्‍वामी ऐसे दिन आएगा, जब वह उसकी बाट न जोहता हो, और ऐसी घड़ी कि वह न जानता हो,

51और उसे भारी ताड़ना देकर, उसका भाग कपटियों के साथ ठहराएगा: वहाँ रोना और दाँत पीसना होगा।

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