Matthew 112017

1जब यीशु अपने बारह चेलों को आज्ञा दे चुका, तो वह उनके नगरों में उपदेश और प्रचार करने को वहाँ से चला गया।

2यूहन्ना ने बन्‍दीगृह में मसीह के कामों का समाचार सुनकर अपने चेलों को उससे यह पूछने भेजा।

3कि क्‍या आनेवाला तू ही है, या हम दूसरे की बाट जोहें?

4यीशु ने उत्तर दिया, “जो कुछ तुम सुनते हो और देखते हो, वह सब जाकर यूहन्ना से कह दो।

5कि अन्‍धे देखते हैं और लंगड़े चलते फिरते हैं, कोढ़ी शुद्ध किए जाते हैं और बहरे सुनते हैं, मुर्दे जिलाए जाते हैं, और कंगालों को सुसमाचार सुनाया जाता है।

6और धन्‍य है वह, जो मेरे कारण ठोकर न खाए।”

7जब वे वहाँ से चल दिए, तो यीशु यूहन्ना के विषय में लोगों से कहने लगा, “तुम जंगल में क्‍या देखने गए थे? क्‍या हवा से हिलते हुए सरकण्‍डे को?

8फिर तुम क्‍या देखने गए थे? देखो, जो कोमल वस्‍त्र पहनते हैं, वे राजभवनों में रहते हैं।

9तो फिर क्‍यों गए थे? क्‍या किसी भविष्‍यद्वक्‍ता को देखने को? हाँ, मैं तुम से कहता हूँ, वरन् भविष्‍यद्वक्‍ता से भी बड़े को।

10यह वही है, जिसके विषय में लिखा है, कि देख; मैं अपने दूत को तेरे आगे भेजता हूँ, जो तेरे आगे तेरा मार्ग तैयार करेगा।

11मैं तुम से सच कहता हूँ, कि जो स्‍त्रियों से जन्‍मे हैं, उन में से यूहन्ना बपतिस्‍मा देनेवालों से कोई बड़ा नहीं हुआ; पर जो स्‍वर्ग के राज्‍य में छोटे से छोटा है वह उससे बड़ा है।

12यूहन्ना बपतिस्‍मा देनेवाले के दिनों से अब तक स्‍वर्ग के राज्‍य में बलपूर्वक प्रवेश होता रहा है, और बलवाल उसे छीन लेते हैं।

13यूहन्ना तक सारे भविष्‍यद्वक्‍ता और व्‍यवस्‍था भविष्‍यद्ववाणी करते रहे।

14और चाहो तो मानो, एलिय्‍याह जो आनेवाला था, वह यही है।

15जिसके सुनने के कान हों, वह सुन ले।

16मैं इस समय के लोगों की उपमा किस से दूँ? वे उन बालकों के समान हैं, जो बाजारों में बैठे हुए एक दूसरे से पुकारकर कहते हैं।

17कि हम ने तुम्‍हारे लिये बांसली बजाई, और तुम न नाचे; हम ने विलाप किया, और तुम ने छाती नहीं पीटी।

18क्‍योंकि यूहन्ना न खाता आया और न पीता, और वे कहते हैं कि उसमें दुष्‍टात्‍मा है।

19मनुष्‍य का पुत्र खाता-पीता आया, और वे कहते हैं कि देखो, पेटू और पियक्‍कड़ मनुष्‍य, महसूल लेनेवालों और पापियों का मित्र! पर ज्ञान अपने कामों में सच्‍चा ठहराया गया है।”

20तब वह उन नगरों को उलाहना देने लगा, जिन में उसने बहुतेरे सामर्थ्य के काम किए थे; क्‍योंकि उन्होंने अपना मन नहीं फिराया था।

21”हाय, खुराजीन! हाय, बैतसैदा! जो सामर्थ्य के काम तुम में किए गए, यदि वे सूर और सैदा में किए जाते, तो टाट ओढ़कर, और राख में बैठकर, वे कब से मन फिरा लेते।

22परन्‍तु मैं तुम से कहता हूँ; कि न्‍याय के दिन तुम्‍हारी दशा से सूर और सैदा की दशा अधिक सहने योग्‍य होगी।

23और हे कफरनहूम, क्‍या तू स्‍वर्ग तक ऊँचा किया जाएगा? तू तो अधोलोक तक नीचे जाएगा; जो सामर्थ्य के काम तुझ में किए गए है, यदि सदोम में किए जाते, तो वह आज तक बना रहता।

24पर मैं तुम से कहता हूँ, कि न्‍याय के दिन तेरी दशा से सदोम के देश की दशा अधिक सहने योग्‍य होगी।”

25उसी समय यीशु ने कहा, “हे पिता, स्‍वर्ग और पृथ्‍वी के प्रभु, मैं तेरा धन्‍यवाद करता हूँ, कि तू ने इन बातों को ज्ञानियों और समझदारों से छिपा रखा, और बालकों पर प्रगट किया है।

26”हाँ, हे पिता, क्‍योंकि तुझे यही अच्‍छा लगा।

27”मेरे पिता ने मुझे सब कुछ सौंपा है, और कोई पुत्र को नहीं जानता, केवल पिता; और कोई पिता को नहीं जानता, केवल पुत्र और वह जिस पर पुत्र उसे प्रगट करना चाहे।

28”हे सब परिश्रम करनेवालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्‍हें विश्राम दूँगा।

29”मेरा जूआ अपने ऊपर उठा लो; और मुझ से सीखो; क्‍योंकि मैं नम्र और मन में दीन हूँ: और तुम अपने मन में विश्राम पाओगे।

30”क्‍योंकि मेरा जूआ सहज और मेरा बोझ हल्‍का है।”

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