Mark 32017

1और वह फिर आराधनालय में गया; और वहाँ एक मनुष्‍य था, जिसका हाथ सूख गया था।

2और वे उस पर दोष लगाने के लिये उसकी घात में लगे हुए थे, कि देखें, वह सब्‍त के दिन में उसे चंगा करता है कि नहीं।

3उसने सूखे हाथवाले मनुष्‍य से कहा, “बीच में खड़ा हो।”

4और उनसे कहा, “क्‍या सब्‍त के दिन भला करना उचित है या बुरा करना, प्राण को बचाना या मारना?” पर वे चुप रहे।

5और उसने उनके मन की कठोरता से उदास होकर, उनको क्रोध से चारों ओर देखा, और उस मनुष्‍य से कहा, “अपना हाथ बढ़ा।” उसने बढ़ाया, और उसका हाथ अच्‍छा हो गया।

6तब फरीसी बाहर जाकर तुरन्‍त हेरोदियों के साथ उसके विरोध में सम्‍मति करने लगे, कि उसे किस प्रकार नाश करें।

7और यीशु अपने चेलों के साथ झील की ओर चला गया: और गलील से एक बड़ी भीड़ उसके पीछे हो ली।

8और यहूदिया, और यरूशलेम और इदूमिया से, और यरदन के पार, और सूर और सैदा के आसपास से एक बड़ी भीड़ यह सुनकर, कि वह कैसे अचम्‍भे के काम करता है, उसके पास आई।

9और उसने अपने चेलों से कहा, “भीड़ के कारण एक छोटी नाव मेरे लिये तैयार रहे ताकि वे मुझे दबा न सकें।”

10क्‍योंकि उसने बहुतों को चंगा किया था; इसलिये जितने लोग रोग से ग्रसित थे, उसे छूने के लिये उस पर गिरे पड़ते थे।

11और अशुद्ध आत्‍माएँ भी, जब उसे देखती थीं, तो उसके आगे गिर पड़ती थीं, और चिल्‍लाकर कहती थीं कि तू परमेश्‍वर का पुत्र है।

12और उसने उन्‍हें बहुत चिताया, कि मुझे प्रगट न करना।

13फिर वह पहाड़ पर चढ़ गया, और जिन्‍हें वह चाहता था उन्‍हें अपने पास बुलाया; और वे उसके पास चले आए।

14तब उसने बारह पुरूषों को नियुक्‍त किया, कि वे उसके साथ साथ रहें, और वह उन्‍हें भेजे, कि प्रचार करें।

15और दुष्‍टात्‍माओं को निकालने का अधिकार रखें।

16और वे ये हैं: शमौन जिस का नाम उसने पतरस रखा।

17और जब्दी का पुत्र याकूब, और याकूब का भाई यूहन्ना, जिनका नाम उसने बूअनरगिस, अर्थात् गर्जन के पुत्र रखा।

18और अन्‍द्रियास, और फिलिप्‍पुस, और बरतुल्‍मै, और मत्ती, और थोमा, और हलफई का पुत्र याकूब; और तद्दै, और शमौन कनानी।

19और यहूदा इस्‍करियोती, जिस ने उसे पकड़वा भी दिया।

20और वह घर में आया: और ऐसी भीड़ इकट्ठी हो गई, कि वे रोटी भी न खा सके।

21जब उसके कुटुम्‍बियों ने यह सुना, तो उसे पकड़ने के लिये निकले; क्‍योंकि कहते थे, कि उसका चित्त ठिकाने नहीं है।

22और शास्‍त्री जो यरूशलेम से आए थे, यह कहते थे, कि उसमें शैतान है, और यह भी, कि वह दुष्‍टात्‍माओं के सरदार की सहायता से दुष्‍टात्‍माओं को निकालता है।

23और वह उन्‍हें पास बुलाकर, उनसे दृष्टान्तों में कहने लगा, “शैतान क्‍योंकर शैतान को निकाल सकता है?

24और यदि किसी राज्‍य में फूट पड़े, तो वह राज्‍य क्‍योंकर स्‍थिर रह सकता है?

25और यदि किसी घर में फूट पड़े, तो वह घर क्‍योंकर स्‍थिर रह सकेगा?

26और यदि शैतान अपना ही विरोधी होकर अपने में फूट डाले, तो वह क्‍योंकर बना रह सकता है? उसका तो अन्‍त ही हो जाता है।

27किन्‍तु कोई मनुष्‍य किसी बलवन्‍त के घर में घुसकर उसका माल लूट नहीं सकता, जब तक कि वह पहले उस बलवन्‍त को न बाँध ले; और तब उसके घर को लूट लेगा।

28मैं तुम से सच कहता हूँ, कि मनुष्‍यों की सन्‍तान के सब पाप और निन्‍दा जो वे करते हैं, क्षमा की जाएगी।

29परन्‍तु जो कोई पवित्रात्‍मा के विरूद्ध निन्‍दा करे, वह कभी भी क्षमा न किया जाएगा: वरन् वह अनन्‍त पाप का अपराधी ठहरता है।”

30क्‍योंकि वे यह कहते थे, कि उसमें अशुद्ध आत्‍मा है।

31और उसकी माता और उसके भाई आए, और बाहर खड़े होकर उसे बुलवा भेजा।

32और भीड़ उसके आसपास बैठी थी, और उन्‍होंने उससे कहा, “देख, तेरी माता और तेरे भाई बाहर तुझे ढूंढते हैं।”

33यीशु ने उन्‍हें उत्तर दिया, “मेरी माता और मेरे भाई कौन हैं?”

34और उन पर जो उसके आस पास बैठे थे, दृष्‍टि करके कहा, “देखो, मेरी माता और मेरे भाई यह हैं।

35क्‍योंकि जो कोई परमेश्‍वर की इच्‍छा पर चले, वही मेरा भाई, और बहिन और माता है।”

Copyright © 2017 Bridge Connectivity Solutions. Released under the Creative Commons Attribution No Derivatives license 4.0.

Choose Translation

Switch translation for Mark 3.

Reading Settings

Paragraph viewDisplay verses as flowing paragraphs instead of individual lines
Show verse numbersDisplay verse numbers inline
Red letterHighlight the words of Christ in red

Sign in to save your reading preferences across sessions.