Mark 22017

1कई दिन के बाद वह फिर कफरनहूम में आया और सुना गया, कि वह घर में है।

2फिर इतने लोग इकट्ठे हुए, कि द्वार के पास भी जगह नहीं मिली; और वह उन्‍हें वचन सुना रहा था।

3और लोग एक झोले के मारे हुए को चार मनुष्‍यों से उठवाकर उसके पास ले आए।

4परन्‍तु जब वे भीड़ के कारण उसके निकट न पहुँच सके, तो उन्‍होंने उस छत को जिसके नीचे वह था, खोल दिया और जब उसे उधेड़ चुके, तो उस खाट को जिस पर झोले का मारा हुआ पड़ा था, लटका दिया।

5यीशु ने, उनका विश्‍वास देखकर, उस झोले के मारे हुए से कहा, “हे पुत्र, तेरे पाप क्षमा हुए।”

6तब कई एक शास्‍त्री जो वहाँ बैठे थे, अपने अपने मन में विचार करने लगे,

7“यह मनुष्‍य क्‍यों ऐसा कहता है? यह तो परमेश्‍वर की निन्‍दा करता है! परमेश्‍वर को छोड़ और कौन पाप क्षमा कर सकता है?”

8यीशु ने तुरन्‍त अपनी आत्‍मा में जान लिया, कि वे अपने अपने मन में ऐसा विचार कर रहे हैं, और उनसे कहा, “तुम अपने अपने मन में यह विचार क्‍यों कर रहे हो?

9सहज क्‍या है? क्‍या झोले के मारे से यह कहना कि तेरे पाप क्षमा हुए, या यह कहना, कि उठ अपनी खाट उठा कर चल फिर?

10परन्‍तु जिस से तुम जान लो कि मनुष्‍य के पुत्र को पृथ्‍वी पर पाप क्षमा करने का भी अधिकार है।” उसने उस झोले के मारे हुए से कहा,

11“मैं तुझ से कहता हूँ, उठ, अपनी खाट उठाकर अपने घर चला जा।”

12वह उठा, और तुरन्‍त खाट उठाकर सब के सामने से निकलकर चला गया। इस पर सब चकित हुए, और परमेश्‍वर की बड़ाई करके कहने लगे, कि हम ने ऐसा कभी नहीं देखा।

13वह फिर निकलकर झील के किनारे गया, और सारी भीड़ उसके पास आई, और वह उन्‍हें उपदेश देने लगा।

14जाते हुए यीशु ने हलफई के पुत्र लेवी को चुंगी की चौकी पर बैठे देखा, और उससे कहा, “मेरे पीछे हो ले।” और वह उठकर, उसके पीछे हो लिया।

15और वह उसके घर में भोजन करने बैठा; और बहुत से चुंगी लेने वाले और पापी भी उसके और चेलों के साथ भोजन करने बैठे, क्‍योंकि वे बहुत से थे, और उसके पीछे हो लिये थे।

16और शास्त्रियों और फरीसियों ने यह देखकर, कि वह तो पापियों और चुंगी लेनेवालों के साथ भोजन कर रहा है, उसके चेलों से कहा, “वह तो चुंगी लेनेवालों और पापियों के साथ खाता पीता है!”

17यीशु ने यह सुनकर, उनसे कहा, “भले चंगों को वैद्य की आवश्‍यकता नहीं, परन्‍तु बीमारों को है: मैं धर्मियों को नहीं, परन्‍तु पापियों को बुलाने आया हूँ।”

18यूहन्ना के चेले, और फरीसी उपवास करते थे; अतः उन्‍होंने आकर उससे यह कहा; कि यूहन्ना के चेले और फरीसियों के चेले क्‍यों उपवास रखते हैं, परन्‍तु तेरे चेले उपवास नहीं रखते?

19यीशु ने उनसे कहा, “जब तक दुल्‍हा बरातियों के साथ रहता है क्‍या वे उपवास कर सकते हैं? अतः जब तक दूल्‍हा उनके साथ है, तब तक वे उपवास नहीं कर सकते।

20परन्‍तु वे दिन आएँगे, कि दूल्‍हा उनसे अलग किया जाएगा; उस समय वे उपवास करेंगे।

21कोरे कपड़े का पैवन्‍द पुराने वस्त्र पर कोई नहीं लगाता; नहीं तो वह पैवन्‍द उसमें से कुछ खींच लेगा, अर्थात् नया, पुराने से, और वह और फट जाएगा।

22नये दाखरस को पुरानी मशकों में कोई नहीं रखता, नहीं तो दाखरस मश्‍कों को फाड़ देगा, और दाखरस और मश्‍कें दोनों नष्‍ट हो जाएँगी; परन्‍तु दाख का नया रस नई मश्‍कों में भरा जाता है।”

23और ऐसा हुआ कि वह सब्‍त के दिन खेतों में से होकर जा रहा था; और उसके चेले चलते हुए बालें तोड़ने लगे।

24तब फरीसियों ने उससे कहा, “देख, ये सब्‍त के दिन वह काम क्‍यों करते हैं जो उचित नहीं?”

25उसने उनसे कहा, “क्‍या तुम ने कभी नहीं पढ़ा, कि जब दाऊद को आवश्‍यकता हुई और जब वह और उसके साथी भूखे हुए, तब उसने क्‍या किया था?

26उसने क्‍योंकर अबियातार महायाजक के समय, परमेश्‍वर के भवन में जाकर, भेंट की रोटियाँ खाईं, जिसका खाना याजकों को छोड़ और किसी को भी उचित नहीं, और अपने साथियों को भी दीं?”

27और उसने उनसे कहा, “सब्‍त का दिन मनुष्‍य के लिये बनाया गया है, न कि मनुष्‍य सब्‍त के दिन के लिये।

28इसलिये मनुष्‍य का पुत्र सब्‍त के दिन का भी स्‍वामी है।”

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