Luke 132017

1उस समय कुछ लोग आ पहुँचे, और उससे उन गलीलियों की चर्चा करने लगे, जिन का लहू पीलातुस ने उन ही के बलिदानों के साथ मिलाया था।

2यह सुन उसने उनसे उत्तर में यह कहा, “क्‍या तुम समझते हो, कि ये गलीली, और सब गलीलियों से पापी थे कि उन पर ऐसी विपत्ति पड़ी?”

3“मैं तुम से कहता हूँ, कि नहीं; परन्‍तु यदि तुम मन न फिराओगे तो तुम सब भी इसी रीति से नाश होगे।

4“या क्‍या तुम समझते हो, कि वे अठारह जन जिन पर शीलोह का गुम्‍मट गिरा, और वे दब कर मर गए: यरूशलेम के और सब रहनेवालों से अधिक अपराधी थे?

5“मैं तुम से कहता हूँ, कि नहीं; परन्‍तु यदि तुम मन न फिराओगे तो तुम भी सब इसी रीति से नाश होगें।”

6फिर उसने यह दृष्‍टान्‍त भी कहा, “किसी की अंगूर की बारी में एक अंजीर का पेड़ लगा हुआ था: वह उसमें फल ढूँढ़ने आया, परन्‍तु न पाया।

7“तब उसने बारी के रखवाले से कहा, ‘देख तीन वर्ष से मैं इस अंजीर के पेड़ में फल ढूँढ़ने आता हूँ, परन्‍तु नहीं पाता, इसे काट डाल कि यह भूमि को भी क्‍यों रोके रहे?’

8“उसने उसको उत्तर दिया, कि हे स्‍वामी, इसे इस वर्ष तो और रहने दे; कि मैं इसके चारो ओर खोदकर खाद डालूँ।

9अतः आगे को फले तो भला, नहीं तो उसे काट डालना।”

10सब्‍त के दिन वह एक आराधनालय में उपदेश कर रहा था।

11और देखो, एक स्‍त्री थी, जिसे अठारह वर्ष से एक दुर्बल करनेवाली दुष्‍टात्‍मा लगी थी, और वह कुबड़ी हो गई थी, और किसी रीति से सीधी नहीं हो सकती थी।

12यीशु ने उसे देखकर बुलाया, और कहा, “हे नारी, तू अपनी दुर्बलता से छूट गई।”

13तब उसने उस पर हाथ रखे, और वह तुरन्‍त सीधी हो गई, और परमेश्‍वर की बड़ाई करने लगी।

14इसलिये कि यीशु ने सब्‍त के दिन उसे अच्‍छा किया था, आराधनालय का सरदार रिसियाकर लोगों से कहने लगा, “छ: दिन हैं, जिन में काम करना चाहिए, अतः उन ही दिनों में आकर चंगे होओ; परन्‍तु सब्‍त के दिन में नहीं।”

15यह सुन कर प्रभु ने उत्तर देकर कहा, “हे कपटियों, क्‍या सब्‍त के दिन तुम में से हर एक अपने बैल या गदहे को थान से खोलकर पानी पिलाने नहीं ले जाता?

16“और क्‍या उचित न था, कि यह स्‍त्री जो अब्राहम की बेटी है जिसे शैतान ने अठारह वर्ष से बान्‍ध रखा था, सब्‍त के दिन इस बन्‍धन से छुड़ाई जाती?”

17जब उसने ये बातें कहीं, तो उसके सब विरोधी लज्‍जित हो गए, और सारी भीड़ उन महिमा के कामों से जो वह करता था, आनन्‍दित हुई।

18फिर उसने कहा, “परमेश्‍वर का राज्‍य किसके नाई है? और मैं उसकी उपमा किससे दूँ?

19“वह राई के एक दाने के नाई है, जिसे किसी मनुष्‍य ने लेकर अपनी बारी में बोया: और वह बढ़कर पेड़ हो गया; और आकाश के पक्षियों ने उसकी डालियों पर बसेरा किया।”

20उसने फिर कहा, “मैं परमेश्‍वर के राज्‍य कि उपमा किस से दूँ?

21“वह खमीर के नाई है, जिस को किसी स्‍त्री ने लेकर तीन पसेरी आटे में मिलाया, और होते-होते सब आटा खमीर हो गया।”

22वह नगर-नगर, और गाँव-गाँव होकर उपदेश करता हुआ यरूशलेम की ओर जा रहा था।

23और किसी ने उससे पूछा, “हे प्रभु, क्‍या उद्धार पानेवाले थोड़े हैं?” उसने उनसे कहा,

24“सकेत द्वार से प्रवेश करने का यत्‍न करो, क्‍योंकि मैं तुम से कहता हूँ, कि बहुत से प्रवेश करना चाहेंगे, और न कर सकेंगे।

25“जब घर का स्‍वामी उठकर द्वार बन्‍द कर चुका हो, और तुम बाहर खड़े हुए द्वार खटखटाकर कहने लगो, ‘हे प्रभु, हमारे लिये खोल दे,’ और वह उत्तर दे कि मैं तुम्‍हें नहीं जानता, तुम कहाँ के हो?

26“तब तुम कहने लगोगे, कि हम ने तेरे सामने खाया-पीया और तू ने हमारे बजारों में उपदेश किया।

27परन्‍तु वह कहेगा, मैं तुम से कहता हूँ, ‘मैं नहीं जानता तुम कहाँ से हो। हे कुकर्म करनेवालो, तुम सब मुझ से दूर हो।’

28“वहाँ रोना और दाँत पीसना होगा: जब तुम अब्राहम और इसहाक और याकूब और सब भविष्‍यद्वक्‍ताओं को परमेश्‍वर के राज्‍य में बैठे, और अपने आप को बाहर निकाले हुए देखोगे।

29“और पूर्व और पश्चिम; उत्तर और दक्षिण से लोग आकर परमेश्‍वर के राज्‍य के भोज में भागी होंगे।

30“और देखो, कितने पिछले हैं वे प्रथम होंगे, और कितने जो प्रथम हैं, वे पिछले होंगे।”

31उसी घड़ी कितने फरीसियो ने आकर उससे कहा, “यहाँ से निकलकर चला जा; क्‍योंकि हेरोदेस तुझे मार डालना चाहता है।”

32उसने उनसे कहा, “जाकर उस लोमड़ी से कह दो, कि देख मैं आज और कल दुष्‍टात्‍माओं को निकालता और बिमारों को चंगा करता हूँ और तीसरे दिन पूरा करूँगा।

33“तौभी मुझे आज और कल और परसों चलना अवश्‍य है, क्‍योंकि हो नही सकता कि कोई भविष्‍यद्वक्‍ता यरूशलेम के बाहर मारा जाए।

34“हे यरूशलेम! हे यरूशलेम! तू जो भविष्‍यद्वक्‍ताओं को मार डालती है, और जो तेरे पास भेजे गए उन्‍हें पत्‍थरवाह करती है; कितनी ही बार मैं ने यह चाहा, कि जैसे मुर्गी अपने बच्‍चों को अपने पंखो के नीचे इकट्ठे करती है, वैसे ही मैं भी तेरे बालकों को इकट्ठे करूँ, पर तुम ने यह न चाहा।

35“देखो, तुम्‍हारा घर तुम्‍हारे लिये उजाड़ छोड़ा जाता है, और मैं तुम से कहता हूँ; जब तक तुम न कहोगे, कि धन्‍य है वह, जो प्रभु के नाम से आता है, तब तक तुम मुझे फिर कभी न देखोगे।”

Copyright © 2017 Bridge Connectivity Solutions. Released under the Creative Commons Attribution No Derivatives license 4.0.

Choose Translation

Switch translation for Luke 13.

Reading Settings

Paragraph viewDisplay verses as flowing paragraphs instead of individual lines
Show verse numbersDisplay verse numbers inline
Red letterHighlight the words of Christ in red

Sign in to save your reading preferences across sessions.