John 162017

1“ये बातें मैं ने तुम से इसलिये कहीं कि तुम ठोकर न खाओ।

2वे तुम्‍हें आराधनालयों में से निकाल देंगे, वरन वह समय आता है, कि जो कोई तुम्‍हें मार डालेगा यह समझेगा कि मैं परमेश्‍वर की सेवा करता हूँ।

3और यह वे इसलिये करेंगे कि उन्होंने न पिता को जाना है और न मुझे जानते हैं।

4परन्‍तु ये बातें मैं ने इसलिये तुम से कहीं, कि जब उन का समय आए तो तुम्‍हें स्‍मरण आ जाए, कि मैं ने तुम से पहले ही कह दिया था, “मैं ने आरम्‍भ में तुम से ये बातें इसलिये नहीं कहीं क्‍योंकि मैं तुम्‍हारे साथ था।

5अब मैं अपने भेजनेवाले के पास जाता हूँ और तुम में से कोई मुझ से नहीं पूछता, ‘तू कहाँ जाता हैं?’

6परन्‍तु मैं ने जो ये बातें तुम से कही हैं, इसलिये तुम्‍हारा मन शोक से भर गया।

7तौभी मैं तुम से सच कहता हूँ, कि मेरा जाना तुम्‍हारे लिये अच्‍छा है, क्‍योंकि यदि मैं न जाऊं, तो वह सहायक तुम्‍हारे पास न आएगा, परन्‍तु यदि मैं जाउँगा, तो उसे तुम्‍हारे पास भेज दूँगा।

8और वह आकर संसार को पाप और धार्मिकता और न्‍याय के विषय में निरूत्तर करेगा।

9पाप के विषय में इसलिये कि वे मुझ पर विश्‍वास नहीं करते;

10और धार्मिकता के विषय में इसलिये कि मैं पिता के पास जाता हूँ, और तुम मुझे फिर न देखोगे;

11न्‍याय के विषय में इसलिये कि संसार का सरदार दोषी ठहराया गया है।

12“मुझे तुम से और भी बहुत सी बातें कहनी हैं, परन्‍तु अभी तुम उन्‍हें सह नहीं सकते।

13परन्‍तु जब वह अर्थात् सत्‍य का आत्‍मा आएगा, तो तुम्‍हें सब सत्‍य का मार्ग बताएगा, क्‍योंकि वह अपनी ओर से न कहेगा, परन्‍तु जो कुछ सुनेगा, वही कहेगा, और आनेवाली बातें तुम्‍हें बताएगा।

14वह मेरी महिमा करेगा, क्‍योंकि वह मेरी बातों में से लेकर तुम्‍हें बताएगा।

15जो कुछ पिता का है, वह सब मेरा है; इसलिये मैं ने कहा, कि वह मेरी बातों में से लेकर तुम्‍हें बताएगा।

16“थोड़ी देर में तुम मुझे न देखोगे, और फिर थोड़ी देर में मुझे देखोगे।”

17तब उसके कितने चेलों ने आपस में कहा, “यह क्‍या है, जो वह हम से कहता है, ‘थोड़ी देर में तुम मुझे न देखोगे, और फिर थोड़ी देर में मुझे देखोगे?’ और यह ‘इसलिये कि मैं कि मैं पिता के पास जाता हूँ’?”

18तब उन्होंने कहा, “यह ‘थोड़ी देर’ जो वह कहता है, क्‍या बात है? हम नहीं जानते, कि क्‍या कहता है।”

19यीशु ने यह जानकर, कि वे मुझ से पूछना चाहते हैं, उनसे कहा, “क्‍या तुम आपस में मेरी इस बात के विषय में पूछ ताछ करते हो, ‘थोड़ी देर में तुम मुझे न देखोगे, और फिर थोड़ी देर में मुझे देखोगे’?

20मैं तुम से सच सच कहता हूँ; कि तुम रोओगे और विलाप करोगे, परन्‍तु संसार आनन्‍द करेगा: तुम्‍हें शोक होगा, परन्‍तु तुम्‍हारा शोक आनन्‍द बन जाएगा।

21जब स्‍त्री जनने लगती है तो उसको शोक होता है, क्‍योंकि उसकी दु:ख की घड़ी आ पहुँची, परन्‍तु जब वह बालक जन्‍म चुकी तो इस आनन्‍द से कि जगत में एक मनुष्‍य उत्‍पन्‍न हुआ, उस संकट को फिर स्‍मरण नहीं करती।

22और तुम्‍हें भी अब तो शोक है, परन्‍तु मैं तुम से फिर मिलूँगा और तुम्‍हारे मन में आनन्‍द होगा; और तुम्‍हारा आनन्‍द कोई तुम से छीन न लेगा।

23उस दिन तुम मुझ से कुछ न पूछोगे: मैं तुम से सच सच कहता हूँ, यदि पिता से कुछ माँगोगे, तो वह मेरे नाम से तुम्‍हें देगा।

24अब तक तुम ने मेरे नाम से कुछ नहीं माँगा; माँगो तो पाओगे ताकि तुम्‍हारा आनन्‍द पूरा हो जाए।।

25“मैं ने ये बातें तुम से दृष्‍टान्‍तों में कही हैं, परन्‍तु वह समय आता है, कि मैं तुम से दृष्‍टान्‍तों में और फिर नहीं कहूँगा परन्‍तु खोलकर तुम्‍हें पिता के विषय में बताऊँगा।

26उस दिन तुम मेरे नाम से माँगोगे, और मैं तुम से यह नहीं कहता, कि मैं तुम्‍हारे लिये पिता से विनती करूँगा।

27क्‍योंकि पिता तो आप ही तुम से प्रीति रखता है, इसलिये कि तुम ने मुझ से प्रीति रखी है, और यह भी प्रतीति की है, कि मैं पिता कि ओर से निकल आया।

28मैं पिता से निकलकर जगत में आया हूँ, फिर जगत को छोड़कर पिता के पास जाता हूँ।”

29उसके चेलों ने कहा, “देख, अब तो तू खोलकर कहता है, और कोई दृष्‍टान्‍त नहीं कहता।

30अब हम जान गए, कि तू सब कुछ जानता है, और तुझे प्रयोजन नहीं, कि कोई तुझ से पूछे, इस से हम प्रतीति करते हैं, कि तू परमेश्‍वर से निकला है।”

31यह सुन यीशु ने उनसे कहा, “क्‍या तुम अब प्रतीति करते हो?

32देखो, वह घड़ी आती है वरन् आ पहुँची कि तुम सब तित्तर बित्तर होकर अपना अपना मार्ग लोगे, और मुझे अकेला छोड़ दोगे, तौभी मैं अकेला नहीं क्‍योंकि पिता मेरे साथ है।

33मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्‍हें मुझ में शान्‍ति मिले; संसार में तुम्‍हें क्‍लेश होता है, परन्‍तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीत लिया है।”

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