James 32017

1हे मेरे भाइयों, तुम में से बहुत उपदेशक न बनें, क्‍योंकि जानते हो, कि हम उपदेशक और भी दोषी ठहरेंगे।

2इसलिये कि हम सब बहुत बार चूक जाते हैं: जो कोई वचन में नहीं चूकता, वही तो सिद्ध मनुष्‍य है; और सारी देह पर भी लगाम लगा सकता है।

3जब हम अपने वश में करने के लिये घोड़ों के मुँह में लगाम लगाते हैं, तो हम उनकी सारी देह को भी फेर सकते हैं।

4देखो, जहाज भी, यद्यपि ऐसे बड़े होते हैं, और प्रचण्‍ड वायु से चलाए जाते हैं, तौभी एक छोटी सी पतवार के द्वारा माँझी की इच्‍छा के अनुसार घुमाए जाते हैं।

5वैसे ही जीभ भी एक छोटा सा अंग है और बड़ी बड़ी डींगे मारती है: देखो, थोड़ी सी आग से कितने बड़े बन में आग लग जाती है।

6जीभ भी एक आग है: जीभ हमारे अंगों में अधर्म का एक लोक है और सारी देह पर कलंक लगाती है, और भवचक्र में आग लगा देती है और नरक कुण्‍ड की आग से जलती रहती है।

7क्‍योंकि हर प्रकार के बन-पशु, पक्षी, और रेंगनेवाले जन्‍तु और जलचर तो मनुष्‍य जाति के वश में हो सकते हैं और हो भी गए हैं।

8पर जीभ को मनुष्‍यों में से कोई वश में नहीं कर सकता; वह एक ऐसी बला है जो कभी रूकती ही नहीं; वह प्राण नाशक विष से भरी हुई है।

9इसी से हम प्रभु और पिता की स्‍तुति करते हैं; और इसी से मनुष्‍यों को जो परमेश्‍वर के स्‍वरूप में उत्‍पन्‍न हुए हैं स्राप देते हैं।

10एक ही मुँह से धन्‍यवाद और स्राप दोनों निकलते हैं। हे मेरे भाइयों, ऐसा नही होना चाहिए।

11क्‍या सोते के एक ही मुँह से मीठा और खारा जल दोनों निकलता है?

12हे मेरे भाइयों, क्‍या अंजीर के पेड़ में जैतून, या दाख की लता में अंजीर लग सकते हैं? वैसे ही खारे सोते से मीठा पानी नहीं निकल सकता।

13तुम में ज्ञानवान और समझदार कौन है? जो ऐसा हो वह अपने कामों को अच्‍छे चालचलन से उस नम्रता सहित प्रगट करे जो ज्ञान से उत्‍पन्‍न होती है।

14पर यदि तुम अपने अपने मन में कड़वी डाह और विरोध रखते हो, तो सत्‍य के विरोध में घमण्‍ड न करना, और न तो झूठ बोलना।

15यह ज्ञान वह नहीं, जो ऊपर से उतरता है वरन् सांसारिक, और शारीरिक, और शैतानी है।

16इसलिये कि जहाँ डाह और विरोध होता है, वहाँ बखेड़ा और हर प्रकार का दुष्‍कर्म भी होता है।

17पर जो ज्ञान ऊपर से आता है वह पहले तो पवित्र होता है फिर मिलनसार, कोमल और मृदुभाव और दया, और अच्‍छे फलों से लदा हुआ और पक्षपात और कपट रहित होता है।

18और मिलाप करानेवालों के लिये धार्मिकता का फल मेल-मिलाप के साथ बोया जाता है।

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