James 22017

1हे मेरे भाइयों, हमारे महिमायुक्‍त प्रभु यीशु मसीह का विश्‍वास तुम में पक्षपात के साथ न हो।

2क्‍योंकि यदि एक पुरूष सोने के छल्‍ले और सुन्‍दर वस्‍त्र पहिने हुए तुम्‍हारी सभा में आए और एक कंगाल भी मैले कुचैले कपड़े पहिने हुए आए।

3और तुम उस सुन्‍दर वस्‍त्रवाले का मुँह देखकर कहो, “तू वहाँ अच्‍छी जगह बैठ,” और उस कंगाल से कहो, “तू यहाँ खड़ा रह,” या “मेरे पाँवों की पीढ़ी के पास बैठ।”

4तो क्‍या तुम ने आपस में भेद भाव न किया और कुविचार से न्‍याय करनेवाले न ठहरे?

5हे मेरे प्रिय भाइयों सुनो; क्‍या परमेश्‍वर ने इस जगत के कंगालों को नहीं चुना कि विश्‍वास में धनी, और उस राज्‍य के अधिकारी हों, जिस की प्रतिज्ञा उसने उनसे की है जो उससे प्रेम रखते हैं?

6पर तुम ने उस कंगाल का अपमान किया: क्‍या धनी लोग तुम पर अत्‍याचार नहीं करते और क्‍या वे ही तुम्‍हें कचहरियों में घसीट घसीट कर नहीं ले जाते?

7क्‍या वे उस उत्तम नाम की निन्‍दा नहीं करते जिसके तुम कहलाए जाते हो?

8तौभी यदि तुम पवित्र शास्‍त्र के इस वचन के अनुसार, “तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख,” सचमुच उस राज्‍य व्‍यवस्‍था को पूरी करते हो, तो अच्‍छा करते हो।

9पर यदि तुम पक्षपात करते हो, तो पाप करते हो; और व्‍यवस्‍था तुम्‍हें अपराधी ठहराती है।

10क्‍योंकि जो कोई सारी व्‍यवस्‍था का पालन करता है परन्‍तु एक ही बात में चूक जाए तो वह सब बातों मे दोषी ठहरा।

11इसलिये कि जिस ने यह कहा, “तू व्‍यभिचार न करना” उसी ने यह भी कहा, “तू हत्‍या न करना” इसलिये यदि तू ने व्‍यभिचार तो नहीं किया, पर हत्‍या की तौभी तू व्‍यवस्‍था का उलंघन करने वाला ठहरा।

12तुम उन लोगों की नाई वचन बोलो, और काम भी करो, जिनका न्‍याय स्‍वतंत्रता की व्‍यवस्‍था के अनुसार होगा।

13क्‍योंकि जिस ने दया नहीं की, उसका न्‍याय बिना दया के होगा: दया न्‍याय पर जयवन्‍त होती है।

14हे मेरे भाइयों, यदि कोई कहे कि मुझे विश्‍वास है पर वह कर्म न करता हो, तो उससे क्‍या लाभ? क्‍या ऐसा विश्‍वास कभी उसका उद्धार कर सकता है?

15यदि कोई भाई या बहिन नंगे उघाड़े हों, और उन्‍हें प्रति दिन भोजन की घटी हो,

16और तुम में से कोई उनसे कहे, “कुशल से जाओ, तुम गरम रहो और तृप्‍त रहो,” पर जो वस्‍तुएं देह के लिये आवश्‍यक हैं वह उन्‍हें न दे, तो क्‍या लाभ?

17वैसे ही विश्‍वास भी, यदि कर्म सहित न हो तो अपने स्‍वभाव में मरा हुआ है।

18वरन् कोई कह सकता है, “तुझे विश्‍वास है, और मैं कर्म करता हूँ।” तू अपना विश्‍वास मुझे कर्म बिना तो दिखा; और मैं अपना विश्‍वास अपने कर्मों के द्वारा तुझे दिखाऊँगा।

19तुझे विश्‍वास है कि एक ही परमेश्‍वर है: तू अच्‍छा करता है: दुष्‍टात्‍मा भी विश्‍वास रखते, और थरथराते हैं।

20पर हे निकम्‍मे मनुष्‍य क्‍या तू यह भी नहीं जानता, कि कर्म बिना विश्‍वास व्‍यर्थ है?

21जब हमारे पिता अब्राहम ने अपने पुत्र इसहाक को वेदी पर चढ़ाया, तो क्‍या वह कर्मो से धार्मिक न ठहरा था।

22सो तू ने देख लिया कि विश्‍वास ने उस के कामों के साथ मिलकर प्रभाव डाला है और कर्मो से विश्‍वास सिद्ध हुआ।

23और पवित्र शास्‍त्र का यह वचन पूरा हुआ, “अब्राहम ने परमेश्‍वर की प्रतीति की, और यह उसके लिये धर्म गिना गया,” और वह परमेश्‍वर का मित्र कहलाया।

24सो तुम ने देख लिया कि मनुष्‍य केवल विश्‍वास से ही नहीं, वरन् कर्मों से भी धर्मी ठहरता है।

25वैसे ही राहाब वेश्‍या भी जब उसने दूतों को अपने घर में उतारा, और दूसरे मार्ग से विदा किया, तो क्‍या कर्मों से धार्मिक न ठहरी?

26निदान, जैसे देह आत्‍मा बिना मरी हुई है वैसा ही विश्‍वास भी कर्म बिना मरा हुआ है।

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