Acts 62017

1उन दिनों में जब चेलों की संख्या बहुत बढ़ने लगी, तब यूनानी भाषा बोलनेवाले इब्रानियों पर कुड़कुड़ाने लगे, कि प्रतिदिन की सेवकाई में हमारी विधवाओं की सुधि नहीं ली जाती।

2तब उन बारहों ने चेलों की मण्‍डली को अपने पास बुलाकर कहा, “यह ठीक नहीं कि हम परमेश्‍वर का वचन छोड़कर खिलाने-पिलाने की सेवा में रहें।

3इसलिये हे भाइयो, अपने में से सात सुनाम पुरूषों को जो पवित्र आत्‍मा और बुद्धि से परिपूर्ण हो, चुन लो, कि हम उन्‍हें इस काम पर ठहरा दें।

4परन्‍तु हम तो प्रार्थना में और वचन की सेवा में लगे रहेंगे।”

5यह बात सारी मण्‍डली को अच्‍छी लगी, और उन्होंने स्तिफनुस नामक एक पुरूष को जो विश्‍वास और पवित्र आत्‍मा से परिपूर्ण था, और फिलिप्‍पुस और प्रुखुरुस और नीकानोर और तीमोन और परमिनास और अन्‍ताकिया वासी नीकुलाउस को जो यहूदी मत में आ गया था, चुन लिया।

6और इन्‍हें प्रेरितों के सामने खड़ा किया और उन्होंने प्रार्थना करके उन पर हाथ रखे।

7और परमेश्‍वर का वचन फैलता गया और यरूशलेम में चेलों की गिनती बहुत बढ़ती गई; और याजकों का एक बड़ा समाज इस मत के अधीन हो गया।

8स्तिफनुस अनुग्रह और सामर्थ्य से परिपूर्ण होकर लोगों में बड़े-बड़े अद्भुत काम और चिन्‍ह दिखाया करता था।

9तब उस आराधनालय में से जो लिबिरतीनों की कहलाती थी, और कुरेनी और सिकन्‍दरिया और किलिकिया और एशिया के लोगों में से कई एक उठकर स्‍तिफनुस से वाद-विवाद करने लगे।

10परन्‍तु उस ज्ञान और उस आत्‍मा का जिस से वह बातें करता था, वे सामना न कर सके।

11इस पर उन्होंने कई लोगों को उकसाया जो कहने लगे, “हम ने इसे मूसा और परमेश्‍वर के विरोध में निन्‍दा की बातें कहते सुना है।”

12और लोगों और प्राचीनों और शास्‍त्रियों को भड़काकर चढ़ आए और उसे पकड़कर महासभा में ले आए।

13और झूठे गवाह खड़े किए, जिन्‍होंने कहा, “यह मनुष्‍य इस पवित्र स्‍थान और व्‍यवस्‍था के विरोध में बोलना नहीं छोड़ता।

14क्‍योंकि हमने उसे यह कहते सुना है, कि यही यीशु नासरी इस जगह को ढा देगा, और उन रीतियों को बदल डालेगा जो मूसा ने हमें सौंपी हैं।”

15तब सब लोगों ने जो सभा में बैठे थे, उसकी ओर ताककर उसका मुखड़ा स्‍वर्गदूत का सा देखा।

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