Acts 122017

1उस समय हेरोदेस राजा ने कलीसिया के कई एक व्यक्तियों को दु:ख देने के लिये उन पर हाथ डाले।

2उसने यूहन्‍ना के भाई याकूब को तलवार से मरवा डाला।

3जब उसने देखा, कि यहूदी लोग इस से आनन्‍दित होते हैं, तो उसने पतरस को भी पकड़ लिया। वे दिन अखमीरी रोटी के दिन थे।

4और उसने उसे पकड़ कर बन्‍दीगृह में डाला, और रखवाली के लिये, चार-चार सिपाहियों के चार पहरों में रखा: इस मनसा से कि फसह के बाद उसे लोगों के सामने लाए।

5बन्‍दीगृह में पतरस की रखवाली हो रही थी; परन्‍तु कलीसिया उसके लिये लौ लगाकर परमेश्‍वर से प्रार्थना कर रही थी।

6और जब हेरोदेस उसे उनके सामने लाने को था, तो उसी रात पतरस दो जंजीरों से बंधा हुआ, दो सिपाहियों के बीच में सो रहा था; और पहरूए द्वार पर बन्‍दीगृह की रखवाली कर रहे थे।

7तो देखो, प्रभु का एक स्‍वर्गदूत आ खड़ा हुआ और उस कोठरी में ज्‍योति चमकी, और उसने पतरस की पसली पर हाथ मार कर उसे जगाया, और कहा, “उठ, जल्दी कर।” और उसके हाथ से जंजीरें खुलकर गिर पड़ीं।

8तब स्‍वर्गदूत ने उससे कहा, “कमर बाँध, और अपने जूते पहन ले।” उसने वैसा ही किया, फिर उसने उससे कहा, “अपना वस्‍त्र पहनकर मेरे पीछे हो ले।”

9वह निकलकर उसके पीछे हो लिया; परन्‍तु यह न जानता था कि जो कुछ स्‍वर्गदूत कर रहा है, वह सच है, बल्क़ि यह समझा कि मैं दर्शन देख रहा हूँ।

10तब वे पहले और दूसरे पहरे से निकलकर उस लोहे के फाटक पर पहुँचे, जो नगर की ओर है। वह उनके लिये आप से आप खुल गया, और वे निकलकर एक ही गली होकर गए, इतने में स्वर्गदूत उसे छोड़कर चला गया।

11तब पतरस ने सचेत होकर कहा, “अब मैंने सच जान लिया कि प्रभु ने अपना स्‍वर्गदूत भेजकर मुझे हेरोदेस के हाथ से छुड़ा लिया, और यहूदियों की सारी आशा तोड़ दी।”

12और यह सोचकर, वह उस यूहन्‍ना की माता मरियम के घर आया, जो मरकुस कहलाता है। वहाँ बहुत लोग इकट्ठे होकर प्रार्थना कर रहे थे।

13जब उसने फाटक की खिड़की खटखटाई तो रूदे नामक एक दासी सुनने को आई।

14और पतरस का शब्‍द पहचानकर, उसने आनन्‍द के मारे फाटक न खोला; परन्‍तु दौड़कर भीतर गई, और बताया कि पतरस द्वार पर खड़ा है।

15उन्होंने उससे कहा, “तू पागल है।” परन्‍तु वह दृढ़ता से बोली कि ऐसा ही है: तब उन्होंने कहा, “उसका स्‍वर्गदूत होगा।”

16परन्‍तु पतरस खटखटाता ही रहा: अतः उन्होंने खिड़की खोली, और उसे देखकर चकित रह गए।

17तब उसने उन्‍हें हाथ से संकेत किया कि चुप रहें; और उनको बताया कि प्रभु किस रीति से मुझे बन्‍दीगृह से निकाल लाया है। फिर कहा, “याकूब और भाइयों को यह बात कह देना।” तब निकलकर दूसरी जगह चला गया।

18भोर को सिपाहियों में बड़ी हलचल होने लगी कि पतरस कहाँ गया।

19जब हेरोदेस ने उसकी खोज की और न पाया, तो पहरूओं की जाँच करके आज्ञा दी कि वे मार डाले जाएँ: और वह यहूदिया को छोड़कर कैसरिया में जा कर रहने लगा।

20हेरोदेस सूर और सैदा के लोगों से बहुत अप्रसन्‍न था। सो वे एक चित्त होकर उसके पास आए और बलास्‍तुस को जो राजा का एक कर्मचारी था, मनाकर मेल करना चाहा; क्‍योंकि राजा के देश से उनके देश का पालन-पोषण होता था।

21ठहराए हुए दिन हेरोदेस राजवस्‍त्र पहनकर सिंहासन पर बैठा; और उनको व्‍याख्‍यान देने लगा।

22और लोग पुकार उठे, “यह तो मनुष्‍य का नहीं परमेश्‍वर का शब्‍द है।”

23उसी क्षण प्रभु के एक स्‍वर्गदूत ने तुरन्‍त उसे मारा, क्‍योंकि उसने परमेश्वर की महिमा नही की और उसके शरीर में कीड़े पड़ गए और वह मर गया।

24परन्‍तु परमेश्‍वर का वचन बढ़ता और फैलता गया।

25जब बरनबास और शाऊल अपनी सेवा पूरी कर चुके तो यूहन्‍ना को जो मरकुस कहलाता है, साथ लेकर यरूशलेम से लौटे।

Copyright © 2017 Bridge Connectivity Solutions. Released under the Creative Commons Attribution No Derivatives license 4.0.

Choose Translation

Switch translation for Acts 12.

Reading Settings

Paragraph viewDisplay verses as flowing paragraphs instead of individual lines
Show verse numbersDisplay verse numbers inline
Red letterHighlight the words of Christ in red

Sign in to save your reading preferences across sessions.