Acts 112017

1और प्रेरितों और भाइयों ने जो यहूदिया में थे सुना, कि अन्‍यजातियों ने भी परमेश्‍वर का वचन मान लिया है।

2और जब पतरस यरूशलेम में आया, तो खतना किए हुए लोग उससे वाद-विवाद करने लगे,

3“तूने खतनारहित लोगों के यहाँ जाकर उनके साथ खाया।”

4तब पतरस ने उन्‍हें आरम्‍भ से क्रमानुसार कह सुनाया;

5“मैं याफा नगर में प्रार्थना कर रहा था, और बेसुध होकर एक दर्शन देखा, कि एक पात्र, बड़ी चादर के समान चारों कोनों से लटकाया हुआ, आकाश से उतरकर मेरे पास आया।

6जब मैंने उस पर ध्‍यान किया, तो पृथ्‍वी के चौपाए और वनपशु और रेंगनेवाले जन्‍तु और आकाश के पक्षी देखे;

7और यह आवाज़ भी सुना, ‘हे पतरस उठ मार और खा।’

8मैंने कहा, ‘नहीं प्रभु, नहीं; क्‍योंकि कोई अपवित्र या अशुद्ध वस्‍तु मेरे मुँह में कभी नहीं गई।’

9इसके उत्तर में आकाश से दूसरी आवाज़ आई, ‘जो कुछ परमेश्‍वर ने शुद्ध ठहराया है, उसे अशुद्ध मत कह।’

10तीन बार ऐसा ही हुआ; तब सब कुछ फिर आकाश पर खींच लिया गया।

11और देखो, तुरन्‍त तीन मनुष्‍य जो कैसरिया से मेरे पास भेजे गए थे, उस घर पर जिसमें हम थे, आ खड़े हुए।

12तब आत्‍मा ने मुझ से उनके साथ बेझिझक हो लेने को कहा, और ये छ: भाई भी मेरे साथ हो लिए; और हम उस मनुष्‍य के घर में गए।

13और उसने बताया, कि मैंने एक स्‍वर्गदूत को अपने घर में खड़ा देखा, जिसने मुझ से कहा, ‘याफा में मनुष्‍य भेजकर शमौन को जो पतरस कहलाता है, बुलवा ले।

14वह तुझ से ऐसी बातें कहेगा, जिनके द्वारा तू और तेरा सारा घराना उद्धार पाएगा।’

15जब मैं बातें करने लगा, तो पवित्र आत्‍मा उन पर उसी रीति से उतरा, जिस रीति से आरम्‍भ में हम पर उतरा था।

16तब मुझे प्रभु का वह वचन स्‍मरण आया; जो उसने कहा, ‘यूहन्‍ना ने तो पानी से बपतिस्‍मा दिया, परन्‍तु तुम पवित्र आत्‍मा से बपतिस्‍मा पाओगे।’

17अतः जब कि परमेश्‍वर ने उन्‍हें भी वही दान दिया, जो हमें प्रभु यीशु मसीह पर विश्‍वास करने से मिला; तो मैं कौन था जो परमेश्‍वर को रोक सकता था?”

18यह सुनकर, वे चुप रहे, और परमेश्‍वर की बड़ाई करके कहने लगे, “तब तो परमेश्‍वर ने अन्‍यजातियों को भी जीवन के लिये मन फिराव का दान दिया है।”

19जो लोग उस क्‍लेश के मारे जो स्‍तिफनुस के कारण पड़ा था, तित्तर-बित्तर हो गए थे, वे फिरते-फिरते फीनीके और साइप्रस और अन्‍ताकिया में पहुँचे; परन्‍तु यहूदियों को छोड़ किसी और को वचन न सुनाते थे।

20परन्‍तु उनमें से कुछ साइप्रस वासी और कुरेनी थे, जो अन्‍ताकिया में आकर युनानियों को भी प्रभु यीशु का सुसमचार की बातें सुनाने लगे।

21और प्रभु का हाथ उन पर था, और बहुत लोग विश्‍वास करके प्रभु की ओर फिरे।

22तब उनकी चर्चा यरूशलेम की कलीसिया के सुनने में आई, और उन्होंने बरनबास को अन्‍ताकिया भेजा।

23वह वहाँ पहुँचकर, और परमेश्‍वर के अनुग्रह को देखकर आनन्‍दित हुआ; और सब को उपदेश दिया कि तन मन लगाकर प्रभु से लिपटे रहें।

24क्‍योंकि वह एक भला मनुष्‍य था; और पवित्र आत्‍मा और विश्‍वास से परिपूर्ण था; और बहुत से लोग प्रभु में आ मिले।

25तब वह शाऊल को ढूँढने के लिये तरसुस को चला गया।

26और जब उनसे मिला तो उसे अन्‍ताकिया में लाया, और ऐसा हुआ कि वे एक वर्ष तक कलीसिया के साथ मिलते और बहुत से लोगों को उपदेश देते रहे, और चेले सब से पहले अन्‍ताकिया ही में मसीही कहलाए।

27उन्‍हीं दिनों में कई भविष्यवक्ता यरूशलेम से अन्‍ताकिया में आए।

28उनमें से अगबुस ने खड़े होकर आत्‍मा की प्रेरणा से यह बताया, कि सारे जगत में बड़ा अकाल पड़ेगा, और वह अकाल क्‍लौदियुस के समय में पड़ा।

29तब चेलों ने निर्णय किया कि हर एक अपनी अपनी पूँजी के अनुसार यहूदिया में रहनेवाले भाइयों की सेवा के लिये कुछ भेजे।

30और उन्होंने ऐसा ही किया; और बरनबास और शाऊल के हाथ प्राचीनों के पास कुछ भेज दिया।

Copyright © 2017 Bridge Connectivity Solutions. Released under the Creative Commons Attribution No Derivatives license 4.0.

Choose Translation

Switch translation for Acts 11.

Reading Settings

Paragraph viewDisplay verses as flowing paragraphs instead of individual lines
Show verse numbersDisplay verse numbers inline
Red letterHighlight the words of Christ in red

Sign in to save your reading preferences across sessions.