1 Thessalonians 32017

1इसलिये जब हम से और भी न रहा गया, तो हम ने यह ठहराया कि एथेन्‍स में अकेले रह जाएँ।

2और हम ने तीमुथियुस को जो मसीह के सुसमाचार में हमारा भाई, और परमेश्‍वर का सेवक है, इसलिये भेजा, कि वह तुम्‍हें स्‍थिर करे; और तुम्‍हारे विश्‍वास के विषय में तुम्‍हें समझाए।

3कि कोई इन क्‍लेशों के कारण डगमगा न जाए; क्‍योंकि तुम आप जानते हो, कि हम इन ही के लिये ठहराए गए हैं।

4क्‍योंकि पहले भी, जब हम तुम्‍हारे यहाँ थे, तो तुम से कहा करते थे, कि हमें क्‍लेश उठाने पड़ेंगे, और ऐसा ही हुआ है, और तुम जानते भी हो।

5इस कारण जब मुझ से और न रहा गया, तो तुम्‍हारे विश्‍वास का हाल जानने के लिये भेजा, कि कहीं ऐसा न हो, कि परीक्षा करनेवाले ने तुम्‍हारी परीक्षा की हो, और हमारा परिश्रम व्‍यर्थ हो गया हो।

6पर अभी तीमुथियुस ने जो तुम्‍हारे पास से हमारे यहाँ आकर तुम्‍हारे विश्‍वास और प्रेम का सुसमाचार सुनाया और इस बात को भी सुनाया, कि तुम सदा प्रेम के साथ हमें स्‍मरण करते हो, और हमारे देखने की लालसा रखते हो, जैसा हम भी तुम्‍हें देखने की।

7इसलिये हे भाइयों, हम ने अपनी सारी सकेती और क्‍लेश में तुम्‍हारे विश्‍वास से तुम्‍हारे विषय में शान्‍ति पाई।

8क्‍योंकि अब यदि तुम प्रभु में स्‍थिर रहो तो हम जीवित हैं।

9और जैसा आनन्‍द हमें तुम्‍हारे कारण अपने परमेश्‍वर के साम्‍हने है, उसके बदले तुम्‍हारे विषय में हम किस रीति से परमेश्‍वर का धन्‍यवाद करें?

10हम राज दिन बहुत ही प्रार्थना करते रहते हैं, कि तुम्‍हारा मुँह देखें, और तुम्‍हारे विश्‍वास की घटी पूरी करें।

11अब हमारा परमेश्‍वर और पिता आप ही और हमारा प्रभु यीशु, तुम्‍हारे यहाँ आने के लिये हमारी अगुवाई करे।

12और प्रभु ऐसा करे, कि जैसा हम तुम से प्रेम रखते हैं; वैसा ही तुम्‍हारा प्रेम भी आपस में, और सब मनुष्‍यों के साथ बढ़े, और उन्‍नति करता जाए,

13ताकि वह तुम्‍हारे मनों को ऐसा स्‍थिर करे, कि जब हमारा प्रभु यीशु अपने सब पवित्र लोगों के साथ आए, तो वे हमारे परमेश्‍वर और पिता के साम्‍हने पवित्रता में निर्दोष ठहरें।

Copyright © 2017 Bridge Connectivity Solutions. Released under the Creative Commons Attribution No Derivatives license 4.0.

Choose Translation

Switch translation for 1 Thessalonians 3.

Reading Settings

Paragraph viewDisplay verses as flowing paragraphs instead of individual lines
Show verse numbersDisplay verse numbers inline
Red letterHighlight the words of Christ in red

Sign in to save your reading preferences across sessions.