1 Corinthians 92017

1क्‍या मैं स्‍वतंत्र नहीं? क्‍या मैं प्रेरित नहीं? क्‍या मैं ने यीशु को जो हमारा प्रभु है, नहीं देखा? क्‍या तुम प्रभु में मेरे बनाए हुए नहीं?

2यदि मैं औरों के लिये प्रेरित नहीं, तौभी तुम्‍हारे लिये तो हूँ; क्‍योंकि तुम प्रभु में मेरी प्रेरिताई पर छाप हो।

3जो मुझे जाँचते हैं, उनके लिये यही मेरा उत्तर है।

4क्‍या हमें खाने-पीने का अधिकार नहीं?

5क्‍या हमें यह अधिकार नहीं, कि किसी मसीही बहिन को विवाह कर के लिए फिरें, जैसा और प्रेरित और प्रभु के भाई और कैफा करते हैं?

6या केवल मुझे और बरनबास को अधिकार नहीं कि कमाई करना छोड़ें।

7कौन कभी अपनी गिरह से खाकर सिपाही का काम करता है? कौन दाख की बारी लगाकर उसका फल नहीं खाता? कौन भेड़ों की रखवाली करके उन का दूध नहीं पीता?

8क्‍या मैं ये बातें मनुष्‍य ही की रीति पर बोलता हूँ?

9क्‍या व्‍यवस्‍था भी यही नहीं कहती? क्‍योंकि मूसा की व्‍यवस्‍था में लिखा है “दए में चलते हुए बैल का मुंह न बान्‍धना।” क्‍या परमेश्‍वर बैलों ही की चिन्‍ता करता है?

10या विशेष करके हमारे लिये कहता है। हां, हमारे लिये ही लिखा गया, क्‍योंकि उचित है, कि जोतनेवाला आशा से जोते, और दावनेवाला भागी होने की आशा से दावनी करे।

11सो जब कि हम ने तुम्‍हारे लिये आत्‍मिक वस्तुएँ बोई, तो क्‍या यह कोई बड़ी बात है, कि तुम्‍हारी शारीरिक वस्‍तुओं की फसल काटें।

12जब औरों का तुम पर यह अधिकार है, तो क्‍या हमारा इस से अधिक न होगा? परन्‍तु हम यह अधिकार काम में नहीं लाए; परन्‍तु सब कुछ सहते हैं, कि हमारे द्वारा मसीह के सुसमाचार की कुछ रोक न हो।

13क्‍या तुम नहीं जानते कि जो पवित्र वस्‍तुओं की सेवा करते हैं, वे मन्‍दिर में से खाते हैं; और जो वेदी की सेवा करते हैं; वे वेदी के साथ भागी होते हैं?

14इसी रीति से प्रभु ने भी ठहराया, कि जो लोग सुसमाचार सुनाते हैं, उनकी जीविका सुसमाचार से हो।

15परन्‍तु मैं इन में से कोई भी बात काम में न लाया, और मैं ने तो ये बातें इसलिये नहीं लिखीं, कि मेरे लिये ऐसा किया जाए, क्‍योंकि इस से तो मेरा मरना ही भला है; कि कोई मेरा घमण्‍ड व्‍यर्थ ठहराए।

16और यदि मैं सुसमाचार सुनाऊँ, तो मेरा कुछ घमण्‍ड नहीं; क्‍योंकि यह तो मेरे लिये अवश्‍य है; और यदि मैं सुसमाचार न सुनाऊं, तो मुझ पर हाय!

17क्‍योंकि यदि अपनी इच्‍छा से यह करता हूँ, तो मजदूरी मुझे मिलती है, और यदि अपनी इच्‍छा से नहीं करता, तौभी भण्‍डारीपन मुझे सौंपा गया है।

18सो मेरी कौन सी मजदूरी है? यह कि सुसमाचार सुनाने में मैं मसीह का सुसमाचार सेंत मेंत कर दूँ; यहाँ तक कि सुसमाचार में जो मेरा अधिकार है, उसको मैं पूरी रीति से काम में लाऊँ।

19क्‍योंकि सब से स्‍वतंत्र होने पर भी मैं ने अपने आप को सब का दास बना दिया है; कि अधिक लोगों को खींच लाऊँ।

20मैं यहूदियों के लिये यहूदी बना कि यहूदियों को खींच लाऊँ, जो लोग व्‍यवस्‍था के आधीन हैं उनके लिये मैं व्‍यवस्‍था के आधीन न होने पर भी व्‍यवस्‍था के आधीन बना, कि उन्‍हें जो व्‍यवस्‍था के आधीन हैं, खींच लाऊँ।

21व्यवस्थाहीनो के लिये मैं (जो परमेश्‍वर की व्‍यवस्‍था से हीन नहीं, परन्‍तु मसीह की व्‍यवस्‍था के आधीन हूँ) व्‍यवस्‍थाहीन सा बना, कि व्‍यवस्‍थाहीनों को खींच लाऊँ।

22मैं निर्बलों के लिये निर्बल सा बना, कि निर्बलों को खींच लाऊँ, मैं सब मनुष्‍यों के लिये सब कुछ बना हूँ, कि किसी न किसी रीति से कई एक का उद्धार कराऊँ।

23और मैं सब कुछ सुसमाचार के लिये करता हूँ, कि औरों के साथ उसका भागी हो जाऊँ।

24क्‍या तुम नहीं जानते, कि दौड़ में तो दौड़ते सब ही हैं, परन्‍तु इनाम एक ही ले जाता है? तुम वैसे ही दौड़ो, कि जीतो।

25और हर एक पहलवान सब प्रकार का संयम करता है, वे तो एक मुरझानेवाले मुकुट को पाने के लिये यह सब करते हैं, परन्‍तु हम तो उस मुकुट के लिये करते हैं, जो मुरझाने का नहीं।

26इसलिये मैं तो इसी रीति से दौड़ता हूँ, परन्‍तु बेठिकाने नहीं, मैं भी इसी रीति से मुक्‍कों से लड़ता हूँ, परन्‍तु उसके समान नहीं जो हवा पीटता हुआ लड़ता है।

27परन्तु मैं अपनी देह को मारता कूटता, और वश में लाता हूँ; ऐसा न हो कि औरों को प्रचार करके, मैं आप ही किसी रीति से निकम्‍मा ठहरूँ।

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