1 Corinthians 12017

1पौलुस की ओर से जो परमेश्‍वर की इच्‍छा से यीशु मसीह का प्रेरित होने के लिये बुलाया गया और भाई सोस्‍थिनेस की ओर से।

2परमेश्‍वर की उस कलीसिया के नाम जो कुरिन्‍थुस में है, अर्थात् उनके नाम जो मसीह यीशु में पवित्र किए गए, और पवित्र होने के लिये बुलाए गए हैं; और उन सब के नाम भी जो हर जगह हमारे और अपने प्रभु यीशु मसीह के नाम की प्रार्थना करते हैं।

3हमारे पिता परमेश्‍वर और प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्‍हें अनुग्रह और शान्‍ति मिलती रहे।

4मैं तुम्‍हारे विषय में अपने परमेश्‍वर का धन्‍यवाद सदा करता हूँ, इसलिये कि परमेश्‍वर का यह अनुग्रह तुम पर मसीह यीशु में हुआ।

5कि उसमें होकर तुम हर बात में अर्थात् सारे वचन और सारे ज्ञान में धनी किए गए।

6कि मसीह की गवाही तुम में पक्‍की निकली।

7यहाँ तक कि किसी वरदान में तुम्‍हें घटी नहीं, और तुम हमारे प्रभु यीशु मसीह के प्रगट होने की बाट जोहते रहते हो।

8वह तुम्‍हें अन्‍त तक दृढ़ भी करेगा, कि तुम हमारे प्रभु यीशु मसीह के दिन में निर्दोष ठहरो।

9परमेश्‍वर सच्‍चा** है; जिस ने तुम को अपने पुत्र हमारे प्रभु यीशु मसीह की संगति में बुलाया है।

10हे भाइयो, मैं तुम से यीशु मसीह जो हमारा प्रभु है उसके नाम के द्वारा बिनती करता हूँ, कि तुम सब एक ही बात कहो; और तुम में फूट न हो, परन्‍तु एक ही मन और एक ही मत होकर मिले रहो।

11क्‍योंकि हे मेरे भाइयों, खलोए के घराने के लोगों ने मुझे तुम्‍हारे विषय में बताया है, कि तुम में झगड़े हो रहे हैं।

12मेरा कहना यह है, कि तुम में से कोई तो अपने आप को “पौलुस का,” कोई “अपुल्‍लोस का,” कोई “कैफा का,” कोई “मसीह का” कहता है।

13क्‍या मसीह बट गया? क्‍या पौलुस तुम्‍हारे लिये क्रूस पर चढ़ाया गया? या तुम्‍हें पौलुस के नाम पर बपतिस्‍मा मिला?

14मैं परमेश्‍वर का धन्‍यवाद करता हूँ, कि क्रिस्‍पुस और गयुस को छोड़, मैं ने तुम में से किसी को भी बपतिस्‍मा नहीं दिया।

15कहीं ऐसा न हो, कि कोई कहे, कि तुम्‍हें मेरे नाम पर बपतिस्‍मा मिला।

16और मैं ने स्‍तिफनास के घराने को भी बपतिस्‍मा दिया; इन को छोड़, मैं नहीं जानता कि मैं ने और किसी को बपतिस्‍मा दिया।

17क्‍योंकि मसीह ने मुझे बपतिस्‍मा देने को नहीं, बरन सुसमाचार सुनाने को भेजा है, और यह भी शब्‍दों के ज्ञान के अनुसार नहीं, ऐसा न हो कि मसीह का क्रूस व्‍यर्थ ठहरे।

18क्योंकि क्रूस की कथा नाश होनेवालों के निकट मूर्खता है, परन्‍तु हम उद्धार पानेवालों के निकट परमेश्‍वर की सामर्थ है।

19क्योंकि लिखा है, “मैं ज्ञानवानों के ज्ञान को नाश करूँगा, और समझदारों की समझ को तुच्‍छ कर दूँगा।”

20कहाँ रहा ज्ञानवान? कहाँ रहा शास्‍त्री? कहाँ रहा इस संसार का विवादी? क्‍या परमेश्‍वर ने संसार के ज्ञान को मूर्खता नहीं ठहराया?

21क्‍योंकि जब परमेश्‍वर के ज्ञान के अनुसार संसार ने ज्ञान से परमेश्‍वर को न जाना तो परमेश्‍वर को यह अच्‍छा लगा, कि इस प्रचार की मूर्खता के द्वारा विश्‍वास करनेवालों को उद्धार दे।

22यहूदी तो चिन्‍ह चाहते हैं, और यूनानी ज्ञान की खोज में हैं,

23परन्‍तु हम तो उस क्रूस पर चढ़ाए हुए मसीह का प्रचार करते हैं जो यहूदियों के निकट ठोकर का कारण, और अन्‍यजातियों के निकट मूर्खता है;

24परन्‍तु जो बुलाए हुए हैं क्‍या यहूदी, क्‍या यूनानी, उनके निकट मसीह परमेश्‍वर की सामर्थ, और परमेश्‍वर का ज्ञान है।

25क्‍योंकि परमेश्‍वर की मूर्खता मनुष्‍यों के ज्ञान से ज्ञानवान है; और परमेश्‍वर की निर्बलता मनुष्‍यों के बल से बहुत बलवान है।

26हे भाइयो, अपने बुलाए जाने को तो सोचो, कि न शरीर के अनुसार बहुत ज्ञानवान, और न बहुत सामर्थी, और न बहुत कुलीन बुलाए गए।

27परन्‍तु परमेश्‍वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है, कि ज्ञानवालों को लज्‍जित करे; और परमेश्‍वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है, कि बलवानों को लज्‍जित करे।

28और परमेश्‍वर ने जगत के नीचों और तुच्‍छों को, बरन जो हैं भी नहीं उनको भी चुन लिया, कि उन्‍हें जो हैं, व्‍यर्थ ठहराए।

29ताकि कोई प्राणी परमेश्‍वर के साम्‍हने घमण्‍ड न करने पाए।

30परन्‍तु उसी की ओर से तुम मसीह यीशु में हो, जो परमेश्‍वर की ओर से हमारे लिये ज्ञान ठहरा अर्थात् धर्म, और पवित्रता, और छुटकारा।

31ताकि जैसा लिखा है, वैसा ही हो, “जो घमण्‍ड करे वह प्रभु में घमण्‍ड करे।”

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