1परमेश्वर के दास और यीशु मसीह के प्रेरित पौलुस की ओर से, जो परमेश्वर के चुने हुओं के विश्वास और सत्य के उस ज्ञान के लिए ठहराया गया है जो भक्ति की ओर ले जाता है;
2उस अनंत जीवन की आशा में जिसकी प्रतिज्ञा परमेश्वर ने, जो झूठ नहीं बोल सकता, सनातन काल से की है,
3परंतु उचित समय पर उसने अपने वचन को उस प्रचार के द्वारा प्रकट किया जो हमारे उद्धारकर्ता परमेश्वर की आज्ञा के अनुसार मुझे सौंपा गया;
4विश्वास की सहभागिता में मेरे सच्चे पुत्र तीतुस के नाम: परमेश्वर पिता और हमारे उद्धारकर्ता मसीह यीशु की ओर से तुझे अनुग्रह और शांति मिले।
5मैं तुझे क्रेते में इस कारण छोड़ आया था कि तू शेष बातों को सुधारे और मेरे आदेश के अनुसार प्रत्येक नगर में प्रवरों को नियुक्त करे।
6प्रवर निर्दोष, और एक ही पत्नी का पति हो, और उसके बच्चे विश्वासी हों, दुराचार या अवज्ञाकारिता के दोषी न हों।
7परमेश्वर के भंडारी के रूप में अध्यक्ष के लिए आवश्यक है कि वह निर्दोष हो; वह न तो अहंकारी, न क्रोधी, न पियक्कड़, न मारपीट करनेवाला और न ही धन का लोभी हो,
8बल्कि अतिथि-सत्कार करनेवाला, भलाई का चाहनेवाला, समझदार, न्यायप्रिय, पवित्र और संयमी हो,
9और वह उस विश्वासयोग्य वचन को दृढ़ता से थामे रहे जो धर्मोपदेश के अनुसार है, ताकि वह खरी शिक्षा का उपदेश दे सके और विरोधियों का मुँह भी बंद कर सके।
10यह इसलिए आवश्यक है क्योंकि बहुत से लोग अधीनता में न रहनेवाले, बकवादी और धोखा देनेवाले हैं, विशेषकर ख़तनावालों में से।
11इनका मुँह बंद करना आवश्यक है, क्योंकि वे नीचता से धन कमाने के लिए गलत शिक्षा देकर घर के घर बिगाड़ रहे हैं।
12उनमें से एक ने जो उन्हीं का भविष्यवक्ता है, कहा है: “क्रेतेवासी सदैव झूठे, हिंसक पशु और आलसी पेटू होते हैं।”
13यह गवाही सच है। इस कारण तू उन्हें कड़ाई से झिड़क, ताकि वे विश्वास में पक्के हो जाएँ,
14और यहूदियों की कल्पित कथाओं और सच्चाई से भटके मनुष्यों की आज्ञाओं पर ध्यान न दें।
15शुद्ध लोगों के लिए सब वस्तुएँ शुद्ध हैं, परंतु अशुद्ध और अविश्वासियों के लिए कुछ भी शुद्ध नहीं, बल्कि उनके मन और विवेक दोनों ही अशुद्ध हैं।
16वे परमेश्वर को जानने का दावा तो करते हैं परंतु अपने कार्यों से उसका इनकार करते हैं। वे घृणित, आज्ञा न माननेवाले और किसी भले कार्य के योग्य नहीं हैं।