1अतः तुम्हारे सह-प्रवर और मसीह के दुःखों के साक्षी तथा उस प्रकट होनेवाली महिमा के सहभागी के रूप में मैं तुम्हारे बीच जो प्रवर हैं उन्हें समझाता हूँ:
2परमेश्वर के उस झुंड की, जो तुम्हारे बीच है, रखवाली करो, किसी दबाव से नहीं बल्कि परमेश्वर की इच्छा के अनुसार, और नीच कमाई के लिए नहीं बल्कि उत्साह से;
3और जो लोग तुम्हें सौंपे गए हैं उन पर प्रभुता मत जताओ बल्कि झुंड के लिए आदर्श बनो।
4जब प्रधान चरवाहा प्रकट होगा, तब तुम महिमा के उस मुकुट को प्राप्त करोगे जो कभी नहीं मुरझाएगा।
5इसी प्रकार, हे जवानो, तुम भी प्रवरों के अधीन रहो। तुम सब एक दूसरे के प्रति दीनता को धारण कर लो, क्योंकि परमेश्वर अभिमानियों का विरोध करता है, परंतु दीनों पर अनुग्रह करता है।
6इसलिए परमेश्वर के बलवंत हाथ के नीचे दीनता से रहो, ताकि वह तुम्हें उचित समय पर ऊँचा उठाए।
7अपनी सारी चिंता उसी पर डाल दो, क्योंकि वह तुम्हारा ध्यान रखता है।
8सचेत और जागते रहो। तुम्हारा विरोधी शैतान, गरजनेवाले सिंह के समान इस ताक में रहता है कि किसको फाड़ खाए।
9विश्वास में दृढ़ होकर उसका सामना करो और यह जान लो कि तुम्हारे भाई जो इस संसार में हैं, इसी प्रकार दुःख सह रहे हैं।
10अब परमेश्वर जो समस्त अनुग्रह का दाता है, और जिसने तुम्हें मसीह में अपनी अनंत महिमा के लिए बुलाया है, वह तुम्हारे थोड़ी देर तक दुःख उठाने के बाद स्वयं तुम्हें सिद्ध, ढृढ़, बलवंत और स्थिर करेगा।
11उसी का पराक्रम युगानुयुग बना रहे। आमीन।
12मैंने सिलवानुस के द्वारा, जिसे मैं विश्वासयोग्य भाई मानता हूँ, तुम्हें उत्साहित करते और यह गवाही देते हुए संक्षेप में लिखा है कि यही परमेश्वर का सच्चा अनुग्रह है। इसी में स्थिर रहो।
13वह जो बेबीलोन में है और तुम्हारे साथ चुनी हुई है, तुम्हें नमस्कार कहती है, और मेरा पुत्र मरकुस भी तुम्हें नमस्कार कहता है।
14प्रेम के चुंबन से एक दूसरे का अभिवादन करो। तुम सब को जो मसीह में हो, शांति मिलती रहे। आमीन।