Zechariah 3HHBD

1फिर उस ने यहोशू महायाजक को यहोवा के दूत के साम्हने खड़ा हुआ मुझे दिखाया, और शैतान उसकी दहिनी ओर उसका विरोध करने को खड़ा था।

2तब यहोवा ने शैतान से कहा, हे शैतान यहोवा तुझ को घुड़के! यहोवा जो यरूशलेम को अपना लेता है, वही तुझे घुड़के! क्या यह आग से निकाली हुई लुकटी सी नहीं है?

3उस समय यहोशू तो दूत के साम्हने मैला वस्त्रा पहिने हुए खड़ा था।

4तब दूत ने उन से जो साम्हने खड़े थे कहा, इसके ये मैले वस्त्रा उतारो। फिर उस ने उस से कहा, देख, मैं ने तेरा अधर्म दूर किया है, और मैं तुझे सुन्दर वस्त्रा पहिना देता हूं।

5तब मैं ने कहा, इसके सिर पर एक शुद्ध पगड़ी रखी जाए। और उन्हों ने उसके सिर पर याजक के योग्य शुद्ध पगड़ी रखी, और उसको वस्त्रा पहिनाए; उस समय यहोवा का दूत पास खड़ा रहा।।

6तब यहोवा के दूत ने यहोशू को चिताकर कहा,

7सेनाओं का यहोवा तुझ से यों कहता है: यदि तू मेरे मार्गों पर चले, और जो कुछ मैं ने तुझे सौंप दिया है उसकी रक्षा करे, तो तू मेरे भवन का न्यायी, और मेरे आंगनों का रक्षक होगा; और मैं तुझ को इनके बीच में आने जाने दूंगा जो पास खड़े हैं।

8हे यहेाशू महायाजक, तू सुन ले, और तेरे भाईबन्धु जो तेरे साम्हने खड़े हैं वे भी सुनें, क्योंकि वे मनुष्य शुभ शकुन हैं: सुनो, मैं अपने दास शाख को प्रगट करूंगा।

9उस पत्थर को देख जिसे मैं ने यहोशू के आगे रखा है, उस एक ही पत्थर के ऊपर सात आंखें बनी हैं, सेनाओं के यहोवा की यह वाणी है, देख मैं उस पत्थर पर खोद देता हूं, और इस देश के अधर्म को एक ही दिन में दूर कर दूंगा।

10उसी दिन तुम अपने अपने भाईबन्धुओं को दाखलता और अंजीर के वृक्ष के नीचे आने के लिये बुलाओगे, सेनाओं के यहोवा की यही वाणी है।।

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