1यहूदा के राजा उज्जियाह, योताम, आहाज, और हिजकिरयाह के दिनों में और इस्राएल के राजा योआश के पुत्रा यारोबाम के दिनों में, यहोवा का वचन बेरी के पुत्रा होशे के पास पहुंचा।।
2जब यहोवा ने होशे के द्वारा पहिले पहिल बातें कीं, तब उस ने होशे से यह कहा, जाकर एक वेश्या को अपनी पत्नी बना ले, और उसके कुकर्म के लड़केबालों को अपने लड़केबाले कर ले, क्योंकि यह देश यहोवा के पीछे चलना छोड़कर वेश्या का सा बहुत काम करता है।
3सो उस ने जाकर दिबलैम की बेटी गोमेर को अपनी पत्नी कर लिया, और वह उस से गर्भवती हुई और उसके पुत्रा उत्पन्न हुआ।
4तब यहोवा ने उस से कहा, उसका नाम यिज्रैल रख; क्योंकि थोड़े ही काल में मैं येहू के घराने को यिज्रैल की हत्या का दण्ड दूंगा, और मैं इस्राएल के घराने के राज्य का अन्त कर दूंगा।
5और उस समय मैं यिज्रैल की तराई में इस्राएल के धनुष को तोड़ डालूंगा।।
6और वह स्त्री फिर गर्भवती हुई और उसके एक बेटी उत्पन्न हुई। तब यहोवा ने होशे से कहा, उसका नाम लोरूहामा रख; क्योंकि मैं इस्राएल के घराने में फिर कभी दया करके उनका अपराध किसी प्रकार से क्षमा न करूंगा।
7परन्तु यहूदा के घराने पर मैं दया करूंगा, और उनका उद्धार करूंगा; उनका उद्धार मैं धनुष वा तलवार वा युद्ध वा घोड़ों वा सवारों के द्वारा नहीं, परन्तु उनके परमेश्वर यहोवा के द्वारा करूंगा।।
8जब उस स्त्री ने लोरूहामा का दुध छुड़ाया, तब वह गर्भवती हुई और उस से एक पुत्रा उत्पन्न हुआ।
9तब यहोवा ने कहा, इसका नाम लोअम्मी रख; क्योंकि तुम लोग मेरी प्रजा नहीं हो, और न मैं तुम्हारा परमेश्वर रहूंगा।।
10तौभी इस्राएलियों की गिनती समुद्र की बालू की सी हो जाएगी, जिनका मापना- गिनना अनहोना है; और जिस स्थान में उन से यह कहा जाता था कि तुम मेरी प्रजा नहीं हो, उसी स्थान में वे जीवित परमेश्वर के पुत्रा कहलाएंगे।
11तब यहूदी और इस्राएली दोनों इकट्ठे हो अपना एक प्रधान ठहराकर देश से चले आएंगे; क्योंकि यिज्रेल का दिन प्रसिद्ध होगा।