1मैंने फिर निगाह ऊची की और मैंने एक उङता हुआ गोल पत्रक देखा।
2दूत ने मुझसे पूछा, ‘तुम क्या देखते हो’ मैंने कहा , ‘मैं एक उङता हुआ गोल लिपटा पत्रक देख रहा हूँ। यह गोल लिपटा पत्रक तींस फुट लम्बा और पन्द्रह फूट चौङा है।’
3तब दुत ने मुझ से कहा , उस गोल लिपटे पत्रक पर एक शाप लिखा हैं। और दुसरी ओर उन लोगों को शाप है, जो प्रतिज्ञा करके झुट बोलते हैं
4सर्वशक्तिमान यहोवा कहता है, ‘मैं इस गोल लिपटे पत्रक को चोरों के घर और उन लोगों के घर भेजूँगा जा गलत प्रतिज्ञा करते समय मेरे नाम का उपयाग करते हैं । वह गोल लिपटा पत्रक वहीं रहेगा। यहाँ तक कि पत्थर और लकङी के खम्भे भी नष्ट हो जाएंगे।’
5तब मेरे साथ बात करने वाला दूत गया। उसने मुझ से कहा, ‘देखो! तुम क्या होता हुआ देख रहे हो’
6मैंने कहा, ‘मैं नही जानता, कि यह क्या हैं’ उसने कहा, ‘वह मापक टोकरी हैं’ उसने यह भी कहा, ‘यह टोकरी इस देश के लोगों के पापों को नापने के लिये हैं।’
7टोकरी का ढक्कन सीसे का था जब वह खोला गया, तब उसके भीतर बैठी स्त्री मिली।
8दूत ने कहा स्त्री बुराई का प्रतीक है। ‘तब दुत ने स्त्री को टोकरी में धक्का दे डाला और सीसे के ढक्कन को उसके मुख में रख दिया। इससे यह प्रकट होता था, कि पाप बहुत भरी (बुरा) है।
9तब मैंने नजर उठाई और दो स्त्रियों को सारस के समान पंख सहित देखा। वे उङी और अपने पंखों में हवा के साथ उन्होंने टोकरी को उठा लि या। वे टोकरी लिये हवा में उङती रहीं।
10तब मैंने बातें करने वाले उस दूत से पूछा, ‘वे टोकरी को कहाँ ले जा रही हैं’
11दुत ने मुझ से कहा , ‘ वे शिनार में इसके लिये एक मंदिर बनाने जा रही हैं जब वे मंदिर बना लेंगी तो वे उस टोकरी को वहाँ रखेंगी’