Psalms 58ERV

1न्यायाधीशों, तुम पक्षपात रहित नहीं रहे। तुम लोगों का न्याय निज निर्णयों में निष्पक्ष नहीं करते हो।

2नहीं, तुम तो केवल बुरी बातें ही सोचते हो। इस देश में तुम हिंसापुर्ण अपराध करते हो।

3वे दुष्ट लोग जैसे ही पैदा होते हैं, बुरे कामों को करने लग जाते हैं। वे पैदा होते ही झूठ बोलने लग जाते हैं।

4वे उस भयानक साँप और नाग जैसे होते हैं जो सुन नहीं सकता। वे दुष्ट जन भी अपने कान सत्य से मूंद लेते हैं।

5बुरे लोगवैसे ही होते हैं जैसे सपेरों के गीतों को या उनके संगीतों को काला नाग नहीं सुन सकता।

6हे यहोवा! वे लोग ऐसे होते हैं जैसे सिंह। इसलिए हे यहोवा, उनके दाँत तोड़।

7जैसे बहता जल विलुप्त हो जाता है, वैसे ही वे लोग लुप्त हो जायें। और जैसे राह की उगी दूब कुचल जाती है, वैसे वे भी कुचल जायें।

8वे घोंघे के समान हो जो चलने में गल जाते। वे उस शिशु से हो जो मरा ही पैदा हुआ, जिसने दिन का प्रकाश कभी नहीं देखा।

9वे उस बाड़ के काँटों की तरह शीघ्र ही नष्ट हो, जो आग पर चढ़ी हाँड़ी गर्माने के लिए शीघ्र जल जाते हैं।

10जब सज्जन उन लोगों को दण्ड पाते देखता है जिन्होंने उसके साथ बुर किया है, वह हर्षित होता है। वह अपना पाँव उन दुष्टों के खून में धोयेगा।

11परमेश्वर महान है, आकाश से ऊँची, उसकी महिमा धरती पर छा जाये। लिये दाऊद का एक भक्ति गीत।

Easy-to-Read Version Copyright © 2010 World Bible Translation Center

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