Psalms 33ERV

1हे सज्जन लोगों, यहोवा में आनन्द मनाओ! सज्जनो सत पुरुषों, उसकी स्तुति करो!

2वीणा बजाओ और उसकी स्तुति करो! यहोवा के लिए दस तार वाले सांरगी बजाओ।

3अब उसके लिये नया गीत गाओ। खुशी की धुन सुन्दरता से बजाओ!

4परमेश्वर का वचन सत्य है। जो भी वह करता है उसका तुम भरोसा कर सकते हो।

5नेकी और निष्पक्षता परमेश्वर को भाती है। यहोवा ने अपने निज करुणा से इस धरती को भर दिया है।

6यहोवा ने आदेश दिया और सृष्टि तुरंत अस्तित्व में आई। परमेश्वर के श्वास ने धरती पर हर वस्तु रची।

7परमेश्वर ने सागर में एक ही स्थान पर जल समेटा। वह सागर को अपने स्थान पर रखता है।

8धरती के हर मनुष्य को यहोवा का आदर करना और डरना चाहिए। इस विश्व में जो भी मनुष्य बसे हैं, उनको चाहिए कि वे उससे डरें।

9क्योंकि परमेश्वर को केवल बात भर कहनी है, और वह बात तुरंत घट जाती है। यदि वह किसी को रुकने का आदेश दे, तो वह तुरंत थम दाती है।

10परमेश्वर चाहे तो सभी सुझाव व्यर्थ करे। वह किसी भी जन के सब कुचक्रों को व्यर्थ कर सकता है।

11किन्तुयहोवा के उपदेश सदा ही खरे होते है। उसकी योजनाएँ पीढी पर पीढी खरी होती हैं।

12धन्य हैं वे मनुष्य जिनका परमेश्वर यहोवा है। परमेश्वर ने उन्हें अपने ही मनुष्य होने को चुना है।

13यहोवा स्वर्ग से नीचे देखता रहता है। वह सभी लोगों को देखता रहता है।

14वह ऊपर ऊँचे पर संस्थापित आसन से धरती पर रहने वाले सब मनुष्यों को देखता रहता है।

15परमेश्वर ने हर किसी का मन रचा है। सो कोई क्या सोच रहा है वह समझता है।

16राजा की रक्षा उसके महाबल से नहीं होती है, और कोई सैनिक अपने निज शक्ति से सुरक्षित नहीं रहता।

17युद्ध में सचमुच अश्वबल विजय नहीं देता। सचमुच तुम उनकी शक्ति से बच नहीं सकते।

18जो जन यहोवा का अनुसरण करते हैं, उन्हें यहोवा देखता है और रखवाली करता है। जो मनुष्य उसकी आराधना करते हैं, उनको उसका महान प्रेम बचाता है।

19उन लोगों को मृत्यु से बचाता है। वे जब भूखे होते तब वह उन्हें शक्ति देता है।

20इसलिए हम यहोवा की बाट जोहेंगे। वह हमारी सहायता और हमारी ढाल है।

21परमेश्वर मुझको आनन्दित करता है। मुझे सचमुच उसके पवित्र नाम पर भरोसा है।

22[This verse may not be a part of this translation]

Easy-to-Read Version Copyright © 2010 World Bible Translation Center

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