Psalms 18ERV

1उसने कहा, “यहोवा मेरी शक्ति है, मैं तुझ पर अपनी करुणा दिखाऊँगा!

2यहोवा मेरी चट्टान, मेरा गढ़, मेरा शरणस्थल है।” मेरा परमेश्वर मेरी चट्टान है। मैं तेरी शरण मे आया हूँ। उसकी शक्ति मुझको बचाती है। यहोवा ऊँचे पहाड़ों पर मेरा शरणस्थल है।

3यहोवा को जो स्तुति के योग्य है, मैं पुकारुँगा और मैं अपने शत्रुओं से बचाया जाऊँगा।

4मेरे शत्रुओं ने मुझे मारने का यत्न किया। मैं चारों ओर मृत्यु की रस्सियों से घिरा हूँ! मुझ को अधर्म की बाढ़ ने भयभीत कर दिया।

5मेरे चारों ओर पाताल की रस्सियाँ थी। और मुझ पर मृत्यु के फँदे थे।

6मैं घिरा हुआ था और यहोवा को सहायता के लिये पुकारा। मैंने अपने परमेश्वर को पुकारा। परमेश्वर पवित्र निज मन्दिर में विराजा। उसने मेरी पुकार सुनी और सहायता की।

7तब पृथ्वी हिल गई और काँप उठी; और पहाड़ों की नींव कंपित हो कर हिल गई क्योंकि यहोवा अति क्रोधित हुआ था!

8परमेश्वर के नथनों से धुँआ निकल पड़ा। परमेश्वर के मुख से ज्वालायें फूट निकली, और उससे चिंगारियाँ छिटकी।

9यहोवा स्वर्ग को चीर कर नीचे उतरा! सघन काले मेघ उसके पाँव तले थे।

10उसने उड़ते करुब स्वर्गदूतों पर सवारी की वायु पर सवार हो वह ऊँचे उड़ चला।

11यहोवा ने स्वयं को अँधेरे में छिपा लिया, उसको अम्बर का चँदोबा घिरा था। वह गरजते बादलों के सघन घटा-टोप में छिपा हुआ था।

12परमेश्वर का तेज बादल चीर कर निकला। बरसा और बिजलियाँ कौंधी।

13यहोवा का उद्घोष नाद अम्बर में गूँजा! परम परमेश्वर ने निज वाणी को सुनने दिया! फिर ओले बरसे और बिजलियाँ कौंध उठी।

14यहोवा ने बाण छोड़े और शत्रु बिखर गये। उसके अनेक तड़ित बज्रों ने उनको पराजित किया।

15हे यहोवा, तूने गर्जना की और मुख से आँधी प्रवाहित की। जल पीछे हट कर दबा और समुद्र का जल अतल दिखने लगा, और धरती की नींव तक उधड़ी।

16यहोवा ऊपर अम्बर से नीचे उतरा और मेरी रक्षा की। मुझको मेरे कष्टों से उबार लिया।

17मेरे शत्रु मुझसे कहीं अधिक सशक्त थे। वे मुझसे कहीं अधिक बलशाली थे, और मुझसे बैर रखते थे। सो परमेश्वर ने मेरी रक्षा की।

18जब मैं विपत्ति में था, मेरे शत्रुओं ने मुझ पर प्रहार किया किन्तु तब यहोवा ने मुझ को संभाला!

19यहोवा को मुझसे प्रेम था, सो उसने मुझे बचाया और मुझे सुरक्षित ठौर पर ले गया।

20मैं अबोध हूँ, सो यहोवा मुझे बचायेगा। मैंने कुछ बुरा नहीं किया। वह मेरे लिये उत्तम चीजें करेगा।

21क्योंकि मैंने यहोवा की आज्ञा पालन किया! अपने परमेश्वर यहोवा के प्रति मैंने कोई भी बुरा काम नहीं किया।

22मैं तो यहोवा के व्यवस्था विधानों को और आदेशों को हमेशा ध्यान में रखता हूँ!

23स्वयं को मैं उसके सामने पवित्र रखता हूँ और अबोध बना रहता हूँ।

24क्योंकि मैं अबोध हूँ! इसलिये मुझे मेरा पुरस्कार देगा! जैसा परमेश्वर देखता है कि मैंने कोई बुरा नहीं किया, अत:वह मेरे लिये उत्तम चीज़ें करेगा।

25हे यहोवा, तू विश्वसनीय लोगों के साथ विश्वसनीय और खरे लोगों के साथ तू खरा है।

26हे यहोवा शुद्ध के साथ तू अपने को शुद्ध दिखाता है, और टेढ़ों के साथ तू तिछर्ा बनता है। किन्तु, तू नीच और कुटिल जनों से भी चतुर है।

27हे यहोवा, तू नम्र जनों के लिये सहाय है, किन्तु जिनमें अहंकार भरा है उन मनुष्यों को तू बड़ा नहीं बनने देता।

28हे यहोवा, तू मेरा जलता दीप है। हे मेरे परमेश्वर तू मेरे अधंकार को ज्योति में बदलता है!

29हे यहोवा, तेरी सहायता से, मैं सैनिकों के साथ दौड़ सकता हूँ। तेरी ही सहायता से, मैं शत्रुओं के प्राचीर लाँघ सकता हूँ।

30परमेश्वर के विधान पवित्र और उत्तम हैं और यहोवा के शब्द सत्यपूर्ण होते हैं। वह उसको बचाता है जो उसके भरोसे हैं।

31यहोवा को छोड़ बस और कौन परमेश्वर है मात्र हमारे परमेश्वर के और कौन चट्टान है

32मुझको परमेश्वर शक्ति देता है। मेरे जीवन को वह पवित्र बनाता है।

33परमेश्वर मेरे चरणों को हिरण की सी तीव्र गति देता है। वह मुझे स्थिर बनाता और मुझे चट्टानी शिखरों से गिरने से बचाता है।

34हे यहोवा, मुझको सिखा कि युद्ध मैं कैसे लडूँ वह मेरी भुजाओं को शक्ति देता है जिससे मैं काँसे के धनुष की डोरी खींच सकूँ।

35हे परमेश्वर, अपनी ढाल से मेरी रक्षा कर। तू मुझको अपनी दाहिनी भुजा से अपनी महान शक्ति प्रदान करके सहारा दे।

36हे परमेश्वर, तू मेरे पाँवों को और टखनों को दृढ़ बना ताकि मैं तेजी से बिना लड़खड़ाहट के बढ़ चलूँ।

37फिर अपने शत्रुओं का पीछा करुँ, और उन्हें पकड़ सकूँ। उनमें से एक को भी नहीं बच पाने दूँगा।

38मैं अपने शत्रुओं को पराजित करुँगा। उनमें से एक भी फिर खड़ा नहीं. होगा। मेरे सभी शत्रु मेरे पाँवों पर गिरेंगे।

39हे परमेश्वर, तूने मुझे युद्ध में शक्ति दी, और मेरे सब शत्रुओं को मेरे सामने झुका दिया।

40तूने मेरे शत्रुओं की पीठ मेरी ओर फेर दी, ताकि मैं उनको काट डालूँ जो मुझ से द्वेष रखते हैं!

41जब मेरे बैरियों ने सहायता को पुकारा, उन्हें सहायता देने आगे कोई नहीं आया। यहाँ तक कि उन्होंने यहोवा तक को पुकारा, किन्तु यहोवा से उनको उत्तर न मिला।

42मैं अपने शत्रुओं को कूट कूट कर धूल में मिला दूँगा, जिसे पवन उड़ा देती है। मैंने उनको कुचल दिया और मिट्टी में मिला दिया।

43मुझे उनसे बचा ले जो मुझसे युद्ध करते हैं। मुझे उन जातियों का मुखिया बना दे, जिनको मैं जानता तक नहीं हूँ ताकि वे मेरी सेवा करेंगे।

44फिर वे लोग मेरी सुनेंगे और मेरे आदेशों को पालेंगे, अन्य राष्टों के जन मुझसे डरेंगे।

45वे विदेशी लोग मेरे सामने झुकेंगे क्योंकि वे मुझसे भयभीत होंगे। वे भय से काँपते हुए अपने छिपे स्थानों से बाहर निकल आयेंगे।

46यहोवा सजीव है! मैं अपनी चट्टान के यश गीत गाता हूँ। मेरा महान परमेश्वर मेरी रक्षा करता है।

47धन्य है, मेरा पलटा लेने वाला परमेश्वर जिसने देश-देश के लोगों को मेरे बस में कर दिया है।

48यहोवा, तूने मुझे शत्रुओं से छुड़ाया है। तूने मेरी सहायता की ताकि मैं उन लोगों को हरा सकूँ जो मेरे विरुद्ध खड़े हुए। तूने मुझे कठोर व्यक्तियों से बचाया है।

49हे यहोवा, इसी कारण मैं देशों के बीच तेरी स्तुति करता हूँ। इसी कारण मैं तेरे नाम का भजन गाता हूँ।

50यहोवा अपने राजा की सहायता बहुत से युद्धों को जीतने में करता है! वह अपना सच्चा प्रेम, अपने चुने हुए राजा पर दिखाता है। वह दाऊद और उसके वंशजों के लिये सदा विश्वास योग्य रहेगा!

Easy-to-Read Version Copyright © 2010 World Bible Translation Center

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