1यहोवा के सभी भक्त आनन्दित रहते हैं। वे लोग परमेश्वर जैसा चाहता, वैसा गाते हैं।
2तूने जिनके लिये काम किया है, उन वस्तुओं का तू आनन्द लेगा। उन ऐसी वस्तुओं को कोई भी व्यक्ति तुझसे नहीं छिनेगा। तू प्रसन्न रहेगा और तेरे साथ भली बातें घटेंगी।
3घर पर तेरी घरवाली अंगूर की बेल सी फलवती होगी। मेज के चारों तरफ तेरी संतानें ऐसी होंगी, जैसे जैतून के वे पेड़ जिन्हें तूने रोपा है।
4इस प्रकार यहोवा अपने अनुयायिओं को सचमुच आशीष देगा।
5यहोवा सिय्योन से तुझ को आशीर्वाद दे यह मेरी कामना है। जीवन भर यरुशलेम में तुझको वरदानों का आनन्द मिले।
6तू अपने नाती पोतों को देखने के लिये जीता रहे यह मेरी कामना है। इस्राएल में शांति रहे।