1फिर शूही प्रदेश के बिल्दद ने उत्तर देते हूए कहा:
2“अय्यूब, इस तरह की बातें करना तू कब छोड़ेगा तुझे चुप होना चाहिये और फिर सुनना चाहिये। तब हम बातें कर सकते हैं।
3तू क्यों यह सोचता हैं कि हम उतने मूर्ख हैं जितनी मूर्ख गायें।
4अय्यूब, तू अपने क्रोध से अपनी ही हानि कर रहा है। क्या लोग धरती बस तेरे लिये छोड़ दे क्या तू यह सोचता है कि बस तुझे तृप्त करने को परमेश्वर धरती को हिला देगा?
5हाँ, बुरे जन का प्रकाश बुझेगा और उसकी आग जलना छोड़ेगी।
6उस के तम्बू का प्रकाश काला पड़ जायेगा और जो दीपक उसके पास है वह बुझ जायेगा।
7उस मनुष्य के कदम फिर कभी मजबूत और तेज नहीं होंगे। किन्तु वह धीरे चलेगा और दुर्बल हो जायेगा। अपने ही कुचक्रों से उसका पतन होगा।
8उसके अपने ही कदम उसे एक जाल के फन्दे में गिरा देंगे। वह चल कर जाल में जायेगा और फंस जायेगा।
9कोई जाल उसकी एड़ी को पकड़ लेगा। एक जाल उसको कसकर जकड़ लेगा।
10एक रस्सा उसके लिये धरती में छिपा होगा। कोई जाल राह में उसकी प्रतीक्षा में है।
11उसके तरफ आतंक उसकी टोह में हैं। उसके हर कदम का भय पीछा करता रहेगा।
12भयानक विपत्तियाँ उसके लिये भूखी हैं। जब वह गिरेगा, विनाश और विध्वंस उसके लिये तत्पर रहेंगे।
13महाव्याधि उसके चर्म के भागों को निगल जायेगी। वह उसकी बाहों और उसकी टाँगों को सड़ा देगी।
14अपने घर की सुरक्षा से दुर्जन को दूर किया जायेगा और आतंक के राजा से मिलाने के लिये उसको चलाकर ले जाया जायेगा।
15उसके घर में कुछ भी न बचेगा क्योंकि उसके समूचे घर में धधकती हुई गन्धक बिखेरी जायेगी।
16नीचे गई जड़ें उसकी सूख जायेंगी और उसके ऊपर की शाखाएं मुरझा जायेंगी।
17धरती के लोग उसको याद नहीं करेंगे। बस अब कोई भी उसको याद नहीं करेगा।
18प्रकाश से उसको हटा दिया जायेगा और वह अंधकार में ढकेल जायेगा। वे उसको दुनियां से दूर भाग देंगे।
19उसकी कोई सन्तान नहीं होगी अथवा उसके लोगों के कोई वंशज नहीं होंगे। उसके घर में कोई भी जीवित नहीं बचेगा।
20पश्चिम के लोग सहमें रह जायेंगे जब वे सुनेंगे कि उस दुर्जन के साथ क्या घटी। लोग पूर्व के आतंकित हो सुन्न रह जायेंगे। 21सचमुच दुर्जन के घर के साथ ऐसा ही घटेगा। ऐसी ही घटेगा उस व्यक्ति के साथ जो परमेश्वर की परवाह नहीं करते।”
21[This verse may not be a part of this translation]