Hosea 6ERV

1आओ, हम यहोवा के पास लौट आयें। उसने आघात दिये थे वही हमें चंगा करेगा। उसने हमें आघात दिये थे वही उन पर मरहम भी लगायेगा।

2दो दिन के बाद वही हमें फिर जीवन की ओर लौटायेगा। तीसरे दिन वह ही हमें उठा कर खड़ा करेगा, हम उसके सामने फिर जी पायेंगे।

3आओ, यहोवा के विषय में जानकारी करें। आओ, यहोवा को जानने का कठिन जतन करें। हमको इसका पता है कि वह आ रहा है वैसे ही जैसे हम को ज्ञान है कि प्रभात आ रहा है। यहोवा हमारे पास वैसे ही आयेगा जैसे कि बसंत कि वह वर्षा आती है जो धरती को सींचती है।

4हे एप्रैम, तुम ही बताओ कि मैं (यहोवा) तुम्हारे साथ क्या करूँ हे यहूदा, तुम्हारे साथ मुझे क्या करना चाहिये तुम्हारी आस्था भोर की धुंध सी है। तुम्हारी आस्था उस ओस की बूँद सी है जो सुबह होते ही कही चली जाती है।

5मैंने नबियों का प्रयोग किया और लोगों के लिये नियम बना दिये। मेरे आदेश पर लोगों का वध किया गया किन्तु इन निर्णयों से भली बाते ऊपजेंगी।

6क्योंकि मुझे सच्चा प्रेम भाता है न कि मुझे बलियाँ भाती हैं, मुझे भाता है कि परमेश्वर का ज्ञान रखें, न कि वे यहाँ होमबलियाँ लाया करें।

7किन्तु लोगों ने वाचा तोड़ दी थी जैसे उसे आदम ने तोड़ा था। अपने ही देश में उन्होंने मेरे संग विश्वासघात किया।

8गिलाद उन लोगों की नगरी है, जो पाप किया करते हैं। वहाँ के लोग चालबाज हैं और वे औरों की हत्या करते हैं।

9जैसे डाकू किसी की घात में छुपे रहते हैं कि उस पर हमला करें, वैसे ही शकेम की राह पर याजक घात में बैठे रहते हैं। जो लोग वहाँ से गुजरते हैं वे उन्हें मार डालते हैं। उन्होंने बुरे काम किये हैं।

10इस्राएल की प्रजा में मैंने भयानक बात देखी है। एप्रैम परमेश्वर के हेतू सच्चा नहीं रहा था। इस्राएल पाप से दोषयुक्त हो गया है।

11यहूदा, तेरे लिये भी एक कटनी का समय है। यह उस समय होगा, जब मैं अपने लोगों को बंधुआयी से लौटा कर लाऊँगा।

Easy-to-Read Version Copyright © 2010 World Bible Translation Center

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