Romans 2

CLBSI

1इसलिए, हे दूसरों पर दोष लगाने वाले! तुम चाहे जो भी हो, अक्षम्‍य हो। तुम दूसरों पर दोष लगाने के कारण अपने को दोषी ठहराते हो; क्‍योंकि तुम, जो दूसरों पर दोष लगाते हो, ये ही कुकर्म स्‍वयं करते हो।

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