1हे परमेश्वर, हम तेरी सराहना करते हैं। हम तेरी स्तुति करते हैं; तेरा नाम हमारे निकट है; लोग तेरे आश्चर्यपूर्ण कार्यों का वर्णन करते हैं।
2परमेश्वर कहता है: ‘निर्धारित समय पर, जिसे मैं ही ठहराऊंगा, निष्पक्षता से मैं न्याय करूंगा।
3जब पृथ्वी और उसके समस्त निवासी डगमगाने लगते हैं, तब मैं ही पृथ्वी के स्तम्भों को स्थिर करता हूँ। सेलाह
4मैं अंहकारियों से यह कहता हूँ, “अहंकार मत करो,” और दुर्जनों से, “घमण्ड से अपने सींग मत उठाओ,
5अपने सींग ऊंचे मत उठाओ, और गर्दन टेढ़ी कर धृष्ट वचन मत बोलो।” ’
6न पूर्व से, न पश्चिम से, और न निर्जन प्रदेश से उद्धार संभव है;
7किन्तु परमेश्वर ही न्यायकर्ता है, वह एक को नीचा करता, तो दूसरे को ऊंचा उठाता है।
8प्रभु के हाथ में एक पात्र है, संमिश्रित-उफनते अंगूर रस से भरा, वह उसमें से एक घूंट उण्डेलेगा, और पृथ्वी के समस्त दुर्जन उसे निचोड़कर तलछट तक पी जाएंगे।
9मैं सदा आनन्द मनाऊंगा, मैं इस्राएल के परमेश्वर की स्तुति गाऊंगा।
10वह समस्त दुर्जनों के निकले हुये सींग काट देगा, किन्तु धार्मिकों के सींग ऊंचे किए जाएंगे।