1प्रभु यों कहता है: ‘न्याय का पालन करो, और धर्म के कार्य करो; क्योंकि मेरी मुक्ति का आगमन समीप है, मेरा उद्धार शीघ्र प्रकट होगा।
2‘धन्य है वह मनुष्य जो न्याय का पालन करता है; धन्य है मानव-पुत्र जो धर्म को पकड़े रहता है, जो विश्राम-दिवस को पवित्र मानता है, और उसको अपवित्र नहीं करता, जो सब प्रकार की बुराई से स्वयं को दूर रखता है।’
3जो विदेशी व्यक्ति प्रभु का अनुयायी हो गया है, वह यह न कहे: ‘प्रभु निस्सन्देह, मुझे अपने निज लोगों से अलग करेगा।’ खोजा व्यक्ति भी यह न कहे: ‘मैं तो सूखा वृक्ष हूं!’
4क्योंकि प्रभु यह कहता है: ‘जो खोजा व्यक्ति मेरे विश्राम-दिवसों का पालन करता है, जो उन कामों को करता है, जिनसे मैं प्रसन्न होता हूं, जो मेरे विधान पर दृढ़ रहता है,
5मैं उसको अपने गृह में, अपनी शहरपनाह के भीतर ऐसा स्थायी नाम दूंगा जो पुत्रों और पुत्रियों से श्रेष्ठ होगा। मैं उसको शाश्वत नाम दूंगा जो कभी न मिटेगा।
6‘जो विदेशी व्यक्ति मुझ-प्रभु के अनुयायी हो गए हैं, जो मेरी सेवा करते हैं, मेरे नाम से प्रेम करते हैं, और मेरे सेवक हैं, जो विश्राम-दिवस का पालन करते हैं और उसको अपवित्र नहीं करते हैं, जो मेरे विधान पर दृढ़ हैं;
7उनको मैं अपने पवित्र पर्वत पर लाऊंगा; अपने प्रार्थनाघर में उन्हें आनन्द प्रदान करूंगा। जब वे वेदी पर अपनी अग्निबलि तथा अन्न-बलि चढ़ाएंगे तब मैं उनकी बलि स्वीकार करूंगा; क्योंकि मेरा घर सब जातियों के लिए प्रार्थना का घर कहलागा।’
8स्वामी-प्रभु जो इस्राएल के निष्कासित लोगों को एकत्र करता है, यह कहता है: ‘जो एकत्र हो चुके हैं उनके अतिरिक्त अन्य लोगों को भी मैं उनके पास एकत्र करूंगा।’
9ओ मैदान के सब पशुओ, ओ वन-पशुओ, आओ, और सब खा जाओ।
10इस्राएल के पहरेदार अन्धे हैं; वे सबके सब अज्ञानी हैं। वे गूंगे कुत्ते हैं, जो भौंक नहीं सकते। उन्हें पड़े-पड़े नींद में स्वप्न देखता प्रिय है।
11कुत्तों की भूख शान्त नहीं होती, उनका पेट कभी नहीं भरता। चरवाहों में भी समझ नहीं है, वे अपने-अपने मार्ग पर चल रहे हैं, उन सबको केवल अपने लाभ की चिन्ता है।
12वे एक दूसरे से कहते हैं: ‘आओ, शराब ले आएं, हम शराब पीकर छक जाएं, कल का दिन भी आज के समान अत्यन्त सुहावना होगा।’