1सन्तों की सहायता के लिए उस सेवा-कार्य के विषय में मुझे आप लोगों को लिखने की कोई ज़रूरत नहीं है।
2मैं इसके विषय में आपकी सद्भावना जानता हूँ। मैं मकिदुनिया-निवासियों से यह कहते हुए गर्व प्रकट करता हूँ कि यूनान की कलीसिया पिछले वर्ष से तैयार है। आपके उत्साह से बहुतों को प्रेरणा मिली है।
3मैं इन भाइयों को इसलिए भेज रहा हूँ कि हमने इस विषय पर आप पर जो गर्व प्रकट किया है, वह निराधार न निकले। मैं चाहता हूँ कि आप तैयार हों, जैसा कि मैंने कहा।
4कहीं ऐसा न हो कि कुछ मकिदुनिया-निवासी मेरे साथ आ कर यह देखें कि आप तैयार नहीं हैं और हमको-और आप को भी-लज्जित होना पड़े, जब कि हमने इस विषय में आप पर इतना भरोसा दिखलाया है।
5इसलिए मैंने भाइयों से यह अनुरोध करना आवश्यक समझा कि वे पहले आप के यहाँ आएँ और ऐसा प्रबन्ध करें कि आपने जो भेंट देने की प्रतिज्ञा की है, वह मेरे पहुँचने से पहले तैयार हो और वह भेंट आपकी कृपणता का नहीं, बल्कि आपकी उदारता का प्रमाण हो।
6इस बात का ध्यान रखें कि जो थोड़ा बोता है, वह थोड़ा काटता है; और जो बहुत बोता है, वह बहुत काटता है।
7हर एक ने अपने मन में जितना निश्चित किया है, उतना ही दे। वह अनिच्छा से अथवा लाचारी से ऐसा न करे, क्योंकि “परमेश्वर प्रसन्नता से देने वाले को प्यार करता है।”
8परमेश्वर आप लोगों को प्रचुर मात्रा में हर प्रकार का वरदान देने में समर्थ है, जिससे आप को कभी किसी तरह की कोई कमी नहीं हो, बल्कि हर शुभ कार्य के लिए भी आपके पास बहुत कुछ बच जाए।
9धर्मग्रन्थ में लिखा है, “उसने उदारतापूर्वक दरिद्रों को दान दिया है; उसकी धार्मिकता सदा बनी रहती है।”
10जो बोने वाले को बीज और खाने वाले को भोजन देता है, वह आप को बोने के लिए बीज देगा, उसे बढ़ायेगा और आपकी धार्मिकता की अच्छी फ़सल उत्पन्न करेगा।
11इस तरह आप लोग हर प्रकार के धन से सम्पन्न हो कर उदारता दिखाने में समर्थ होंगे। आपका दान, हमारे द्वारा वितरित हो कर, परमेश्वर के प्रति धन्यवाद का कारण बनेगा;
12क्योंकि यह सार्वजनिक सेवा-कार्य न केवल सन्तों की आवश्यकताओं को पूरा करता है, बल्कि परमेश्वर को धन्यवाद देने के लिए बहुत-से लोगों को प्रेरित भी करता है।
13आपका यह सेवा-कार्य प्रामाणिक मान कर लोग परमेश्वर की महिमा करेंगे, क्योंकि आप पूर्ण समर्पण के साथ मसीह के शुभ समाचार पर विश्वास करते और सहभागिता की भावना से उनकी तथा सब की उदारतापूर्वक सहायता करते हैं।
14वे आपके लिए परमेश्वर से प्रार्थना करेंगे। वे आप को प्यार करते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि परमेश्वर ने आप लोगों पर कितना अनुग्रह किया है।
15परमेश्वर को उसके अनिर्वचनीय अनुग्रह-दान के लिए धन्यवाद!